{"_id":"595be9474f1c1bae688b45e9","slug":"farmer-dies-from-heart-attack","type":"story","status":"publish","title_hn":"कर्ज में डूबे किसान की हार्टअटैक से मौत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कर्ज में डूबे किसान की हार्टअटैक से मौत
ब्यूरो/अमर उजाला, पिलाना
Updated Wed, 05 Jul 2017 12:49 AM IST
विज्ञापन
किसान की मौत के बाद विलाप करते परिजन।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अब्दुलपुर मेवला गांव में कर्ज में डूबा किसान ब्रह्मपाल सिंह कई दिन से तनाव में था। इसी कारण उसकी हार्टअटैक से मौत हो गई। गमगीन माहौल में शव का अंतिम संस्कार किया गया है।
अब्दुलपुर मेवला निवासी मनोज कुमार ने बताया कि उसके चाचा ब्रहमपाल सिंह के पास तीन बीघा जमीन है। उसी से परिवार का गुजर बसर कर रहे थे। चाचा ने अलग-अलग बैंकों से करीब 2.60 लाख रुपये का ऋण ले रखा था। पिछले कुछ समय से किश्त जमा नहीं कर पा रहे थे। एक सप्ताह पूर्व उनकी आरसी काट दी गई थी। तहसील के कर्मचारी बकाया राशि के भुगतान का दबाव बना रहे थे।
इसी के चलते पिछले कई दिनों से तनाव में चल रहे थे। सोमवार को तहसील और बैंक के कर्मचारी घर पर पहुंचे थे। उन्होंने बकाया भुगतान जमा न करने पर जमीन और घर को नीलाम करने की हिदायत दी थी। इसका सदमा चाचा सहन नहीं कर पाए।
विज्ञापन
उनकी हृदय गति रुकने से मौत हो गई। घटना से परिवार में कोहराम मच गया। गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार किया गया। ग्रामीणों ने मांग की है कि किसान का कर्ज माफ किया जाए साथ ही परिवार की आर्थिक मद्द की जाए। ताकि उनका पालन पोषण ठीक तरह से हो सके।
विज्ञापन
अब्दुलपुर मेवला निवासी मनोज कुमार ने बताया कि उसके चाचा ब्रहमपाल सिंह के पास तीन बीघा जमीन है। उसी से परिवार का गुजर बसर कर रहे थे। चाचा ने अलग-अलग बैंकों से करीब 2.60 लाख रुपये का ऋण ले रखा था। पिछले कुछ समय से किश्त जमा नहीं कर पा रहे थे। एक सप्ताह पूर्व उनकी आरसी काट दी गई थी। तहसील के कर्मचारी बकाया राशि के भुगतान का दबाव बना रहे थे।
विज्ञापन
इसी के चलते पिछले कई दिनों से तनाव में चल रहे थे। सोमवार को तहसील और बैंक के कर्मचारी घर पर पहुंचे थे। उन्होंने बकाया भुगतान जमा न करने पर जमीन और घर को नीलाम करने की हिदायत दी थी। इसका सदमा चाचा सहन नहीं कर पाए।
विज्ञापन
उनकी हृदय गति रुकने से मौत हो गई। घटना से परिवार में कोहराम मच गया। गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार किया गया। ग्रामीणों ने मांग की है कि किसान का कर्ज माफ किया जाए साथ ही परिवार की आर्थिक मद्द की जाए। ताकि उनका पालन पोषण ठीक तरह से हो सके।