फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Baghpat News ›   Expectations tied to Archaeological Circle in Meerut

मेरठ में पुरातत्व सर्किल से बंध गई उम्मीद

Thu, 27 Aug 2020 11:39 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 27 Aug 2020 11:39 PM IST
विज्ञापन
Expectations tied to Archaeological Circle in Meerut
बागपत जिले में पुरातत्व महत्व के हैं कई स्थान
विज्ञापन

सिनौली में दो साल पहले किए गए उत्खनन में मिल चुका है प्राचीन रथ
अमर उजाला ब्यूरो
बागपत। पुरातात्विक स्मारकों के संरक्षण और पंजीकरण की प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाने के लिए मेरठ में नया सर्किल बनेगा। जिले में पुरातत्व महत्व के कई स्थान होने के कारण नई उम्मीद बंध गई है। सिनौली में खुदाई के दौरान एतिहासिक रथ निकल चुका है। इतिहासकारों के बीच खुशी का माहौल है।
केंद्र सरकार की ओर से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए विशेष ईएसआई का मेरठ सर्किल की घोषणा केंद्रीय संस्कृति मंत्री पहलाद सिंह पटेल ने की है। शहजाद राय शोध संस्थान बड़ौत के निदेशक डॉ अमित राय जैन का कहना है कि पश्चिम उत्तर प्रदेश में कई दशकों से मांग की जा रही थी कि आगरा सर्किल काफी दूर हो जाने के कारण यहां से प्राप्त होने वाले पुरावशेषों का सूचीकरण तथा प्राचीन स्थलों, स्मारकों का संरक्षण करने में अति कठिनाई का सामना करना पड़ता है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ परिक्षेत्र में बागपत जनपद में शहजाद राय शोध संस्थान द्वारा दो दशकों में करीब 100 पुरास्थल व स्मारकों को सर्वेक्षण देश के सामने लाया गया। परंतु सिनौली चंदायन व बरनावा के उत्खनन के अतिरिक्त जरूरत के मुताबिक अन्य स्थलों के उत्खनन व संरक्षण का कार्य नहीं किया जा सका। मेरठ सर्किल की घोषणा किए जाने से उम्मीद बन रही है कि जनपद बागपत में मेरठ के दर्जनों पूरा स्थलों व स्मारकों का संरक्षण का कार्य शीघ्रता पूर्वक कराया जा सकेगा।
विज्ञापन

इन्होंने जताई खुशी
बागपत। शहजाद राय शोध संस्थान में आयोजित बैठक में डॉक्टर कृष्ण कांत शर्मा, डॉ अमित पाठक, डॉ अमित राय जैन ने केंद्र सरकार की इस घोषणा का स्वागत किया और खुशी जताई।
विज्ञापन
विज्ञापन

यहां से निकल चुका इतिहास
बागपत। केंद्रीय सांस्कृतिक मंत्रालय की ओर से बरनावा, चंदायन और सिनौली में उत्खनन का कार्य किया जा चुका है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग उत्खनन शाखा द्वितीय और भारतीय पुरातत्व संस्थान लाल किला की संयुक्त टीम बरनावा में उत्खनन किया। वर्ष 2005 में सिनौली और वर्ष 2015 में चंदायन गांव में उत्खनन का कार्य केंद्र सरकार करा चुकी है। यहां से चित्रित धूसर मृदभांड संस्कृति, कुषाण, गुप्त और राजपूत सभ्यताओं के प्रमाण पहले से प्राप्त होते रहे है। सिनौली में दो साल पहले किए गए उत्खनन में प्राचीन रथ भी निकल चुका है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed