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आज भी बागपत के कण-कण में बसते है चौधरी चरण सिंह
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चौधरी अनंगपाल सिंह तोमर के आवास पर पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह व उनकी पत्नि श्रीमति गायत्?
- फोटो : BAGHPAT
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बागपत। किसान मसीहा चौधरी चरण सिंह आज भी बागपत के कण-कण में बसते है। वह किसानों के हित के लिए वह हमेशा आगे खड़े रहे और किसानों के लिए उन्होंने कई बड़े फैसले भी लिए। उनके बाद किसानों को सच्चा हितैषी शायद ही मिल सके।
चौधरी चरण सिंह का जन्म भले ही बागपत में नहीं हुआ हो, लेकिन उनकी कर्मभूमि बागपत रहा है। यहां से पहली बार 1936 में विधायक बने और उसके बाद से लगातार यहां के लोगों ने उनको सिरमौर बनाकर रखा। चौधरी चरण सिंह ने हमेशा किसानों के हित में कार्य किया और उनके कारण ही यूपी मेें जमींदारी प्रथा का उन्मूलन हुआ। उन्होंने लेखपाल के पद का सृजन भी किया। किसानों के हित में उन्होंने 1954 में उप्र भूमि संरक्षण कानून को पारित किया। तील अप्रैल 1967 को वह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने तो 17 अप्रैल 1968 को उन्होंने मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद मेें मध्यावधि चुनाव में उन्हें अच्छी सफलता मिली और दोबारा से 17 फरवरी 1970 के वह मुख्यमंत्री बने। इसके बाद वह केन्द्र में गृहमंत्री बने। 28 जुलाई 1979 को चौधरी चरण सिंह प्रधानमंत्री भी बने और यहां तक पहुंचने के बाद भी बागपत के लोगों को वह अपने परिवार की तरह मानते थे। वरिष्ठ अधिवक्ता देवेंद्र आर्य के अनुसार चौधरी चरण आज भी यहां के लोगों के दिलों में बसते है। उनसे जुड़ी यादें लोगों ने आज भी संजोकर रखी हुई है।
चौधरी चरण सिंह ने 24 घंटे में बनवा दी थी कई गांवों की सड़क
जिला जाट महासभा के महामंत्री अश्विनी तोमर बताते है कि उनके पिता अनंगपाल सिंह व चौधरी चरण सिंह के बीच बहुत स्नेह था। चौधरी अनंगपाल सिंह पूर्व सैनिक थे और चौधरी चरण सिंह देश के प्रधानमंत्री थे, लेकिन चौधरी चरण सिंह की सादगी थी कि वह दो बार उनके घर आए। अश्विनी तोमर ने बताया कि अहैड़ा फाटक से हरचंदपुर तक रास्ता काफी बाधित था। उनके पिता व क्षेत्र के अन्य गणमान्य लोगों के अनुरोध पर सुन्हैडा, बसी, बंदपुर होते हुए काठा तक जाने वाला रास्ता केवल चौबीस घंटे के आदेश पर सड़क बनवाकर चालू करवा दिया था। बागपत में हरियाणा-यूपी को जोड़ने के लिए यमुना नदी पर पुल, बागपत व बड़ौत में तीस-तीस बिस्तर के अस्पताल सहित अन्य कार्य कराए थे।
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चौधरी चरण सिंह का जन्म भले ही बागपत में नहीं हुआ हो, लेकिन उनकी कर्मभूमि बागपत रहा है। यहां से पहली बार 1936 में विधायक बने और उसके बाद से लगातार यहां के लोगों ने उनको सिरमौर बनाकर रखा। चौधरी चरण सिंह ने हमेशा किसानों के हित में कार्य किया और उनके कारण ही यूपी मेें जमींदारी प्रथा का उन्मूलन हुआ। उन्होंने लेखपाल के पद का सृजन भी किया। किसानों के हित में उन्होंने 1954 में उप्र भूमि संरक्षण कानून को पारित किया। तील अप्रैल 1967 को वह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने तो 17 अप्रैल 1968 को उन्होंने मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद मेें मध्यावधि चुनाव में उन्हें अच्छी सफलता मिली और दोबारा से 17 फरवरी 1970 के वह मुख्यमंत्री बने। इसके बाद वह केन्द्र में गृहमंत्री बने। 28 जुलाई 1979 को चौधरी चरण सिंह प्रधानमंत्री भी बने और यहां तक पहुंचने के बाद भी बागपत के लोगों को वह अपने परिवार की तरह मानते थे। वरिष्ठ अधिवक्ता देवेंद्र आर्य के अनुसार चौधरी चरण आज भी यहां के लोगों के दिलों में बसते है। उनसे जुड़ी यादें लोगों ने आज भी संजोकर रखी हुई है।
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चौधरी चरण सिंह ने 24 घंटे में बनवा दी थी कई गांवों की सड़क
जिला जाट महासभा के महामंत्री अश्विनी तोमर बताते है कि उनके पिता अनंगपाल सिंह व चौधरी चरण सिंह के बीच बहुत स्नेह था। चौधरी अनंगपाल सिंह पूर्व सैनिक थे और चौधरी चरण सिंह देश के प्रधानमंत्री थे, लेकिन चौधरी चरण सिंह की सादगी थी कि वह दो बार उनके घर आए। अश्विनी तोमर ने बताया कि अहैड़ा फाटक से हरचंदपुर तक रास्ता काफी बाधित था। उनके पिता व क्षेत्र के अन्य गणमान्य लोगों के अनुरोध पर सुन्हैडा, बसी, बंदपुर होते हुए काठा तक जाने वाला रास्ता केवल चौबीस घंटे के आदेश पर सड़क बनवाकर चालू करवा दिया था। बागपत में हरियाणा-यूपी को जोड़ने के लिए यमुना नदी पर पुल, बागपत व बड़ौत में तीस-तीस बिस्तर के अस्पताल सहित अन्य कार्य कराए थे।

बागपत में फलाहार करते पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह का फाइल फोटो बीच में एडवोकेट देवेन्द्र ?- फोटो : BAGHPAT
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