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आज भी भूखी-प्यासी सड़कों पर घूम रही गाय
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अंतरराष्ट्रीय गोपाष्टमी दिवस
बड़ौत। गाय बछड़ों की पूजा का पावन त्योहार गोपाष्टमी 22 नवंबर यानी आज रविवार को मनया जाएगा। भले ही इस दिन गायों की रक्षा, संवर्धन एवं उनकी सेवा के संकल्प लेते हुए गाय-बछड़ों का पूजन किया जाता हो, लेकिन नगरीय व देहात क्षेत्र में गौवंश की हालत अच्छी नहीं है।
तड़प-तड़प कर मर रही गायें
- जनपद में 26 गौशालाएं हैं। उसके बाद भी गौवंश सड़कों पर घूम रहे हैं। सड़कों पर गाय भूख - प्यास से तड़प - तड़प कर मर रही हैं। इनकी खबर लेने वाला कोई नहीं है।
बंद हो गयीं अस्थाई गौशालाएं
- शासन के निर्देश पर अस्थायी गौशालाएं खोली गई थीं। अस्थायी गौशाला में गाय रखी थीं। इनके चारे, पानी, चिकित्सा उपचार और ठहने की व्यवस्था नगर पंचायत और ग्राम पंचायत स्तर पर होनी थी। लेकिन सुविधा नहीं दी गई। जिसके कारण काफी गौवंश दम तोड़ गए। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी बागपत डॉ. खुशीराम का कहना है कि गौशालाओं में गौवंशों की अच्छे ढंग से देखभाल की जा रही है। जो गौवंश सड़कों पर घूम रहा है, उन्हें भी गौशालाएं भेजने का प्रयास किया जा रहा है।
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गौसेवा के नाम पर लिया जाता है दान
- काफी लोग गोवंश की सेवा के लिए दान करते हैं। वह अलग बात है कि यह दान उन तक पहुंचता नहीं है। कई ऐसी संस्थाएं भी काम कर रही हैं जो विदेशों से भी गाय और गौशाला के नाम पर चंदा प्राप्त करती हैं।
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बड़ौत। गाय बछड़ों की पूजा का पावन त्योहार गोपाष्टमी 22 नवंबर यानी आज रविवार को मनया जाएगा। भले ही इस दिन गायों की रक्षा, संवर्धन एवं उनकी सेवा के संकल्प लेते हुए गाय-बछड़ों का पूजन किया जाता हो, लेकिन नगरीय व देहात क्षेत्र में गौवंश की हालत अच्छी नहीं है।
तड़प-तड़प कर मर रही गायें
- जनपद में 26 गौशालाएं हैं। उसके बाद भी गौवंश सड़कों पर घूम रहे हैं। सड़कों पर गाय भूख - प्यास से तड़प - तड़प कर मर रही हैं। इनकी खबर लेने वाला कोई नहीं है।
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बंद हो गयीं अस्थाई गौशालाएं
- शासन के निर्देश पर अस्थायी गौशालाएं खोली गई थीं। अस्थायी गौशाला में गाय रखी थीं। इनके चारे, पानी, चिकित्सा उपचार और ठहने की व्यवस्था नगर पंचायत और ग्राम पंचायत स्तर पर होनी थी। लेकिन सुविधा नहीं दी गई। जिसके कारण काफी गौवंश दम तोड़ गए। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी बागपत डॉ. खुशीराम का कहना है कि गौशालाओं में गौवंशों की अच्छे ढंग से देखभाल की जा रही है। जो गौवंश सड़कों पर घूम रहा है, उन्हें भी गौशालाएं भेजने का प्रयास किया जा रहा है।
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गौसेवा के नाम पर लिया जाता है दान
- काफी लोग गोवंश की सेवा के लिए दान करते हैं। वह अलग बात है कि यह दान उन तक पहुंचता नहीं है। कई ऐसी संस्थाएं भी काम कर रही हैं जो विदेशों से भी गाय और गौशाला के नाम पर चंदा प्राप्त करती हैं।