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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Baghpat News ›   Even purchased drinking water not pure

खरीदा गया पेयजल भी खरा नहीं

Fri, 22 Jul 2016 01:01 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत Updated Fri, 22 Jul 2016 01:01 AM IST
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बीमारियां परोसने वाले हैंडपंपों के पानी से अधिकतर गांवों के लोगों ने किनारा कर लिया है। गांव दर गांव वाहनों से कैंपर से पानी सप्लाई करने वालों की संख्या बढ़ गई है।
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भले ही पानी सप्लाई किया जा रहा हो, लेकिन खाद्य विभाग के नियम को पूरा नहीं करने के कारण जिले में किसी प्लांट के पास लाइसेंस नहीं है। खाद्य सुरक्षा अधिकारी सुरेंद्र कुमार चौरसिया के अनुसार पाली गांव के सिर्फ एक प्लांट के पास लाइसेंस था, इसे नियम पूरा नहीं करने के कारण निरस्त कर दिया गया है।
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सरुरपुर कलां गांव में एक प्लांट से लाइसेंस की फाइल लंबित है। बगैर लाइसेंस जिले में पानी सप्लाई करने वालों की जांच का अभियान चलाया जाएगा।

क्यों खरीद रहे हैं पानी
हिंडन और कृष्णा नदी के किनारे बसे अधिकतर गांवों के हैंडपंपों से दूषित पानी निकल रहा है। चौगामा क्षेत्र के गांगनौली, दाहा, निरपुड़ा, पट्टी बंजारान, झूंडपुर के अलावा सिसाना, निवाड़ा, सांकरौद समेत अन्य गांवों के हैंडपंपों का पानी दूषित हो गया है।
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दूषित पानी से कैंसर, विकलांगता और चर्म रोग जैसी बीमारी के सैकड़ों मरीज हैं। दूषित पानी से बचने के लिए ही लोगों ने कैंपर (पेयजल का डिब्बा) खरीदना शुरू किया है। इसके अलावा घर-घर में आरओ लगवाने का चलन भी बढ़ गया है।

क्यों खराब है पेयजल
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में दोआब पर्यावरण समिति के चेयरमैन डॉ. चंद्रवीर सिंह ने पानी की रिपोर्ट दाखिल की है। चंद्रवीर सिंह बताते हैं कि पानी में भारी तत्व केडिमयम, लेड, मरकरी, आर्सेनिक, नाइट्रेट, सल्फेट और आयरन की मात्रा बढ़ गई है। इस कारण क्षेत्र में पानी पीने लायक नहीं रह गया है। 

क्या कहते हैं ग्रामीण
टीकरी के रविंद्र राठी, तवेला गढ़ी के राजीव कुमार, संजीव राठी और प्रमोद कुमार ने कहा प्रशासन को शुद्ध पानी उपलब्ध कराने की व्यवस्था करनी चाहिए। एनजीटी भी इस बाबत निर्देश दे चुका है, लेकिन स्थानीय स्तर पर कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। ग्रामीण मजबूरन दूषित पेयजल पीने के लिए मजबूर हैं। कुछ क्षेत्रीय लोग कैंपर( पेयजल का डिब्बा) खरीदने के लिए मजबूर हैं।


15 रुपये में एक बोतल
कैंपर के अलावा जिले के कई गांवों में बोतल से भी पानी सप्लाई किया जा रहा है। प्लांट से अगर ग्रामीण पानी लेते हैं तो 20 लीटर पानी की बोतल की कीमत 10 रुपये हैं, लेकिन घर सप्लाई लेने से इसकी कीमत 15 रुपये हो जाती है। खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि जिले में किसी भी प्लांट पर बीआईएस सर्टिफिकेट भी नहीं है। इसकी जांच कराएंगे। 

अधिकारी कहिन 
बगैर लाइसेंस अगर पानी सप्लाई किया जा रहा है तो जांच कराई जाएगी। नियमानुसार ही पेयजल सप्लाई हो सकता है।  
-  ह्दय शंकर तिवारी, डीएम।
 
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