फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Baghpat News ›   Drug dealers have become unbridled

मेडिकल स्टोरों से गायब होने लगी जीवन रक्षक दवाएं

Sun, 09 May 2021 11:37 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 09 May 2021 11:37 PM IST
विज्ञापन
Drug dealers have become unbridled
बड़ौत। बुखार व कोरोना संक्रमण से लड़ने में कारगर दवा मेडिकल स्टोरों से गायब होने लगी हैं। वहीं, दवा के लिए खुलेआम सौदेबाजी की जा रही है। दवाओं की कालाबाजारी पर लगाम लगाने वाले बेफिक्र हैं।
विज्ञापन

कोरोना महामारी के चलते सरकारी कार्यालय बंद हैं। अधिकारी और कर्मचारी निरीक्षण नहीं कर रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप दुकानदार मनमानी कर रहे हैं। खुदरा मूल्य पर बिकने वाली दवा के दाम फिक्स नहीं रह गए हैं। मेडिकल स्टोर संचालक मनमाने दामों पर दवा बेच रहे हैं। उन्हें टोकने वाला कोई नहीं है। अमर उजाला टीम की पड़ताल में यह देखने को मिला।
विज्ञापन

इन दवाओं की बढ़ी मांग
वायरल, सर्दी-जुकाम आदि रोगों से पीड़ितों की संख्या बढ़ी है। ये ही मिलते-जुलते लक्षण कोरोना संक्रमण के भी हैं। उक्त लक्षणों एवं बीमारी में एजीथ्रोमायसिन, पैरासिटामॉल, डेकाड्रान, बीटामेथासोन, डेरीफाइलिन के साथ कफ सीरप का अहम रोल है। यदि बुखार नहीं उतर रहा है तो सिफ्टरियाजोन सालवेक्टम इंजेक्शन के साथ ही मोरपेनम इंजेक्शन दिया जा रहा है। ये दवाएं दुकानों से एकाएक गायब होने लगी हैं। जहां दवाएं उपलब्ध हैं वे मनमानी कीमत पर बेच रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

निर्धारित से ज्यादा कीमत पर बिक रही दवा
8 से 10 रुपये में मिलने वाली पैरासिटामॉल अब 15 से 20 रुपये में बिक रही है। 120 रुपये वाली एजीथ्रोमायसिन 150 रुपये में, तीन रुपये की बीटामेथासोन अब 12 रुपये में बिक रही है। ऐसा ही हाल अन्य दवाओं का है। एंटीबायोटिक इंजेक्शन के नाम पर खूब लूट मची है। मोरपेनम के साथ ही अन्य एंटीबायोटिक इंजेक्शन की कीमत महज 150 रुपये से 200 रुपये थी, अब 600 रुपये प्रति वायल बेची जा रही है।
लुप्त हुईं कुछ दवाएं
कोरोना संक्रमण में कारगर दवा फेवीफ्लू 200 व 800 मिलीग्राम की गोली लुप्त हो गई है। औसतन 400 रुपये में प्रति डिब्बा बिकने वाली यह टेबलेट लगभग डेढ़ हजार रुपये में बिकने लगी हैं।
ये बोले एसोसिएशन के अध्यक्ष
केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष देवेंद्र पंवार का कहना है कि यह सही है कि मरीजों की संख्या बढ़ने से दवा की किल्लत है। समय रहते दवा की उपलब्धता कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि कालाबाजारी नहीं की जा रही है। मेडिकल स्टोर संचालक ईमानदारी से दवा बेच रहे हैं।

ये बोले ड्रग्स इंस्पेक्टर
ड्रग्स इंस्पेक्टर वैभव बब्बर का कहना है कि कालाबाजारी की शिकायत नहीं मिली है। टीम लगातार छापा मार रही है। यदि कोई मेडिकल स्टोर संचालक अधिक दामों में दवा बेचते हैं तो शिकायत करने पर तुंरत कार्रवाई की जाएगी। संवाद
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed