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बच्चों को संपत्ति नही संस्कार दे : गुप्ति सागर महाराज
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बड़ौत के डीजे कॉलेज के मैदान में भगवान को झूला झुलाते श्रद्धालु।
- फोटो : BARAUT
बच्चों को संपत्ति नही बेहतर संस्कार दें : गुप्ति सागर महाराज
बड़ौत। संतान को अपार संपत्ति नहीं उत्तम संस्कार दें। तभी उनका जीवन सफल होगा। यह बता गुप्ति सागर महाराज ने मंगलवार को दिगंबर जैन कॉलेज के मैदान में चल रहें पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में कहीं।
उन्होंने कहा कि संस्कार हीन रावण, कंस, दुर्योधन ने राज्य, परिवार सहित स्वयं का नाश किया। उत्तम संस्कार युक्त ध्रुव, भक्त प्रहलाद ने संसार में सर्वोत्तम पद पाया। उत्तम संस्कार संसार में सर्वश्रेष्ठ और संपूर्ण संपत्ति है जो सत्य है। आज संस्कारों के अभाव में टीवी, मोबाइल की आदत बढ़ती जा रही है। स्कूलों को भी पता नहीं कैसी शिक्षा देनी चाहिए। बच्चे कच्चे घड़े के समान होते हैं, उनको घर और स्कूल में संस्कार देने की जरूरत है लेकिन विडंबना का विषय है। वे माता-पिता की बातों का उलटा जवाब देते हैं। साथ ही बच्चों में कई घंटों तक टीवी और मोबाइल देखने की आदत बढ़ती जा रही है। ऐसा संस्कारों के अभाव से हो रहा है। यदि बच्चों में ऐसे ही संस्कारों का अभाव बढ़ता गया तो वे माता-पिता की बात सुनेंगे नहीं, सुनाएंगे। बच्चों को स्कूलों के साथ साथ धर्म की शिक्षा जरूर देनी चाहिए। कार्यक्रम में अजय, सुखमाल चंद जैन, अनिल अशोक, आंनद अमित, अनुज, वीरेंद्र पिंटी, प्रवीण, गौरव, सौरभ, रमेश, सुनील, सिद्धार्थ, आदिश जैन, कृष्णा, सुधा, निधि, शिल्पी पूनम, आदि सहित भारी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
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बड़ौत। संतान को अपार संपत्ति नहीं उत्तम संस्कार दें। तभी उनका जीवन सफल होगा। यह बता गुप्ति सागर महाराज ने मंगलवार को दिगंबर जैन कॉलेज के मैदान में चल रहें पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में कहीं।
उन्होंने कहा कि संस्कार हीन रावण, कंस, दुर्योधन ने राज्य, परिवार सहित स्वयं का नाश किया। उत्तम संस्कार युक्त ध्रुव, भक्त प्रहलाद ने संसार में सर्वोत्तम पद पाया। उत्तम संस्कार संसार में सर्वश्रेष्ठ और संपूर्ण संपत्ति है जो सत्य है। आज संस्कारों के अभाव में टीवी, मोबाइल की आदत बढ़ती जा रही है। स्कूलों को भी पता नहीं कैसी शिक्षा देनी चाहिए। बच्चे कच्चे घड़े के समान होते हैं, उनको घर और स्कूल में संस्कार देने की जरूरत है लेकिन विडंबना का विषय है। वे माता-पिता की बातों का उलटा जवाब देते हैं। साथ ही बच्चों में कई घंटों तक टीवी और मोबाइल देखने की आदत बढ़ती जा रही है। ऐसा संस्कारों के अभाव से हो रहा है। यदि बच्चों में ऐसे ही संस्कारों का अभाव बढ़ता गया तो वे माता-पिता की बात सुनेंगे नहीं, सुनाएंगे। बच्चों को स्कूलों के साथ साथ धर्म की शिक्षा जरूर देनी चाहिए। कार्यक्रम में अजय, सुखमाल चंद जैन, अनिल अशोक, आंनद अमित, अनुज, वीरेंद्र पिंटी, प्रवीण, गौरव, सौरभ, रमेश, सुनील, सिद्धार्थ, आदिश जैन, कृष्णा, सुधा, निधि, शिल्पी पूनम, आदि सहित भारी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
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