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न हारे, न डरे, आगे बढ़कर निभाई जिम्मेदारी
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26 मार्च 2020 को पुलिस लाइन में किट पहने पुलिसकर्मियों का फाइल फोटो
- फोटो : BAGHPAT
सीएमओ व डिप्टी सीएमओ भी हो गए थे संक्रमित
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। कोरोना काल में स्वास्थ्य विभाग ने अहम भूमिका निभाई। एक ओर जहां कोरोना से बचने के लिए लोग घरों में रहे। वहीं, कोरोना योद्धाओं ने आगे बढक़र जिम्मेदारी निभाई। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, कर्मचारी व पैरामेडिकल स्टाफ को भी संक्रमण से जूझना पड़ा। हालांकि उनके इरादों को डगमगा नहीं पाया। सीएमओ डॉ. आरके टंडन, उनकी पत्नी और बच्चों के अतिरिक्त डिप्टी सीएमओ डॉ. यशवीर, उनकी पत्नी और बच्चे संक्रमित हो गए थे। उन्होंने संक्रमण का मुकाबला किया और स्वस्थ होने के बाद फिर से जिम्मेदारी संभाल ली। इसी वजह से कोरोना की रफ्तार धीमी पड़ी।
जिले में बीते वर्ष 26 मार्च को दुबई से लौटे सरूरपुर निवासी युवक में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई थी। वहीं, 26 मई को कोरोना संक्रमण से ढिकौली में पहली मौत हुई थी। कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए लॉकडाउन लगा और लोग घरों में कैद हो गए। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग और पुलिस प्रशासन ने आगे बढ़कर लोगों की सुरक्षा का जिम्मा उठाया। स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने घर-घर जाकर सर्वे और जांच की। इस पर पुलिस-प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था की कमान संभाली। लोगों को संक्रमण से बचाने के प्रयास में अग्रिम पंक्ति के लोग संक्रमित होने लगे। इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी।
जिम्मेदारी समझी तो कम हो गया कोरोना
सीएमओ डॉ. आरके टंडन का कहना है कि संक्रमण से एकबारगी शरीर में कमजोरी आ गई थी। चलने पर सांस फूल जाती थी, मगर अब ठीक है। लोगों ने जिम्मेदारी समझी और कोरोना गाइडलाइन का पालन किया। इससे कोरोना कम हो गया।
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परिवार से दूर हो गए थे स्वास्थ्यकर्मी
डिप्टी सीएमओ डॉ. यशवीर सिंह के अतिरिक्त उनकी पत्नी और बच्चे संक्रमित हो गए थे। संक्रमण से बचाव के लिए उन्होंने व अन्य स्वास्थ्यकर्मियों ने अपने परिजनों से दूरी बना ली थी। सिर्फ फोन के जरिए ही बात हो पाती थी। उनका कहना है कि अब लोग जागरूक हो गए हैं, बीमारी से बचने के लिए सावधानियां बरतने लगे हैं।
कार्यालय को ही बना लिया आवास
कोरोना संक्रमण के दौरान स्वास्थ्य विभाग की भूमिका सबसे अहम रही। बागपत सीएचसी के अधीक्षक डॉ. विभाष राजपूत का परिवार दिल्ली में रहता है। संक्रमण के दौरान उन्होंने कार्यालय को ही आवास बना लिया और दिन-रात लोगों की सेवा में जुटे रहे। उन्होंने लोगों को संक्रमण से बचाव के लिए टीम के साथ घर-घर जाकर सर्वे किया और लोगों की जांच कराई। संक्रमण के दौरान वह महीनों तक परिवार से दूर रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। कोरोना काल में स्वास्थ्य विभाग ने अहम भूमिका निभाई। एक ओर जहां कोरोना से बचने के लिए लोग घरों में रहे। वहीं, कोरोना योद्धाओं ने आगे बढक़र जिम्मेदारी निभाई। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, कर्मचारी व पैरामेडिकल स्टाफ को भी संक्रमण से जूझना पड़ा। हालांकि उनके इरादों को डगमगा नहीं पाया। सीएमओ डॉ. आरके टंडन, उनकी पत्नी और बच्चों के अतिरिक्त डिप्टी सीएमओ डॉ. यशवीर, उनकी पत्नी और बच्चे संक्रमित हो गए थे। उन्होंने संक्रमण का मुकाबला किया और स्वस्थ होने के बाद फिर से जिम्मेदारी संभाल ली। इसी वजह से कोरोना की रफ्तार धीमी पड़ी।
जिले में बीते वर्ष 26 मार्च को दुबई से लौटे सरूरपुर निवासी युवक में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई थी। वहीं, 26 मई को कोरोना संक्रमण से ढिकौली में पहली मौत हुई थी। कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए लॉकडाउन लगा और लोग घरों में कैद हो गए। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग और पुलिस प्रशासन ने आगे बढ़कर लोगों की सुरक्षा का जिम्मा उठाया। स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने घर-घर जाकर सर्वे और जांच की। इस पर पुलिस-प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था की कमान संभाली। लोगों को संक्रमण से बचाने के प्रयास में अग्रिम पंक्ति के लोग संक्रमित होने लगे। इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी।
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जिम्मेदारी समझी तो कम हो गया कोरोना
सीएमओ डॉ. आरके टंडन का कहना है कि संक्रमण से एकबारगी शरीर में कमजोरी आ गई थी। चलने पर सांस फूल जाती थी, मगर अब ठीक है। लोगों ने जिम्मेदारी समझी और कोरोना गाइडलाइन का पालन किया। इससे कोरोना कम हो गया।
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परिवार से दूर हो गए थे स्वास्थ्यकर्मी
डिप्टी सीएमओ डॉ. यशवीर सिंह के अतिरिक्त उनकी पत्नी और बच्चे संक्रमित हो गए थे। संक्रमण से बचाव के लिए उन्होंने व अन्य स्वास्थ्यकर्मियों ने अपने परिजनों से दूरी बना ली थी। सिर्फ फोन के जरिए ही बात हो पाती थी। उनका कहना है कि अब लोग जागरूक हो गए हैं, बीमारी से बचने के लिए सावधानियां बरतने लगे हैं।
कार्यालय को ही बना लिया आवास
कोरोना संक्रमण के दौरान स्वास्थ्य विभाग की भूमिका सबसे अहम रही। बागपत सीएचसी के अधीक्षक डॉ. विभाष राजपूत का परिवार दिल्ली में रहता है। संक्रमण के दौरान उन्होंने कार्यालय को ही आवास बना लिया और दिन-रात लोगों की सेवा में जुटे रहे। उन्होंने लोगों को संक्रमण से बचाव के लिए टीम के साथ घर-घर जाकर सर्वे किया और लोगों की जांच कराई। संक्रमण के दौरान वह महीनों तक परिवार से दूर रहे।