जिला पंचायत अध्यक्ष ही करा रही थी वसूली
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दोनों राज्यों की सीमा पर निवाड़ा चौकी के पास कुछ युवक रोड़ी, डस्ट और रेत के ट्रकों से काफी समय से वसूली कर रहे थे। वे ट्रक चालक को खुद को जिला पंचायत के लोग बताते थे। इतना ही नहीं ट्रकों को जिला पंचायत की रसीद भी देते थे। 16 अप्रैल को कोतवाली पुलिस ने वहां पर छापामारी कर चार युवकों को पकड़ लिया था।
पुलिस ने पकड़े गए संतोषपुर-बाघू गांव के युवक सचिन, कपिल, मोनू और पवन पर अवैध वसूली करने का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ धारा 420 व 468 आईपीसी में रिपोर्ट दर्ज की थी। 17 अप्रैल को पुलिस ने आरोपियों का चालान कर दिया था। जेल जाने से पूर्व आरोपियों ने कहा था कि उन्हें केस में गलत फंसाया गया है। वे अवैध वसूली नहीं करते हैं।
इस मामले में आरोपियों के परिजन खुलकर सामने आ गए है। आरोपी पवन और सचिन के भाई कपिल कुमार ने कहा कि उनके भाई व उनके साथियों को जिला पंचायत ने काम पर रखा था। अपनी रसीद बुक देकर उसने ट्रकों से वसूली करा रही थी। जानकारी दी थी कि इसका ठेका छूटा हुआ है। युवकों के पकड़े जाने के बाद जिला पंचायत के अफसरों ने हाथ खड़े कर दिए है।
उनका कहना है कि इसकी शिकायत उच्चाधिकारियों से की जाएगी। इतना ही नहीं न्याय के लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जाएगा।
जिला पंचायत अध्यक्ष रेनू धामा के पति जिला पंचायत सदस्य योगेश धामा का कहना है कि जिला पंचायत की ओर से मार्च में ठेका छोड़ा जाता है। लेकिन वसूली अवैध रूप से की जा रही थी या वैध रूप से इसकी जांच अपर मुख्य अधिकारी कर रहे हैं। जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति का पता चल सकेगा।