{"_id":"5e3861258ebc3e4b3268de2e","slug":"district-in-the-grip-of-cancer-patients-increasing-every-year-baghpat-news-mrt467084815","type":"story","status":"publish","title_hn":"कैंसर की चपेट में जिला, हर साल बढ़ रहे मरीज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कैंसर की चपेट में जिला, हर साल बढ़ रहे मरीज
विज्ञापन
कैंसर की चपेट में जिला, हर साल बढ़ रहे मरीज
बागपत। जिला कैंसर की चपेट में है। जिले के लगभग हर गांव में कैंसर के मरीज हैं, लेकिन चौगामा क्षेत्र के गांव सबसे अधिक प्रभावित हैं। हिंडन और कृष्णा नदी के किनारे के गांव में सबसे अधिक मरीज मिले हैं। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि प्रदूषित जल से सीधे तौर पर कैंसर नहीं होता, लेकिन एनजीटी के आदेश पर जिले के 55 गांव में लगाए जा रहे मेडिकल कैंप में ही करीब 60 कैंसर के मरीज चिन्हित किए जा चुके हैं। जिले की बात करें तो कैंसर के मरीजों का आंकड़ा 250 के पार है। इनमें ऐसे भी लोग हैं, जो निजी अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं। महिलाओं में सबसे अधिक ब्रेस्ट कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं। इसके अलावा लीवर कैंसर, मुंह का कैंसर भी फैल रहा है। सबकी अलग-अलग वजह हैं।
इनसेट
काल बन रही नदियां
बागपत। चौगामा क्षेत्र के लिए जीवनदायिनी कृष्णा और हिंडन अभिशाप बन गई है। प्रदूषित जल बीमारी परोस रहा है। क्षेत्र के दाहा, निरपुडा, भड़ल और गांगनौली गांव में ब्लड कैंसर और लीवर कैंसर से मरने वालों की संख्या 70 से अधिक है। पानी में नाइट्रेट, फ्लोराइड, फास्फोरस और केडियम की मात्रा अधिक है।
इनसेट
55 गांव में सबसे ज्यादा खतरा
बागपत। कृष्णा नदी में प्रदूषण के मामले में दोआब पर्यावरण समिति, दाहा के चेयरमैन डॉ. चंद्रवीर सिंह राणा ने एनजीटी में रिट दायर की है। इस रिट के बाद 55 गांव में शुद्ध पेयजल आपूर्ति और मेडिकल कैंप लगाने के आदेश दिए हैं। सीएचसी बिनौली के अधीक्षक डॉ. अतुल बंसल 37 गांव में कैंप का संचालन करते हैं। वह कहते हैं कि उनके क्षेत्र में करीब 45 कैंसर रोगी चिन्हित किए, लेकिन सबकी वजह अलग-अलग है।
विज्ञापन
इनसेट
इसलिए बढ़ रहे हैं कैंसर रोगी
बागपत। क्षेत्र में पानी की जल निगम और अन्य एजेंसियों ने जांच कराई तो हकीकत खुलकर सामने आई। पानी में ही लैड (सीसा) की मात्रा 0.34 मिलीग्राम/लीटर पाई जा चुकी है। यह सामान्य से 34 गुणा अधिक है। इसमें क्रोमियम की मात्रा 1.84 मिलीग्राम/लीटर पाई गई है, जो सामान्य से 19 गुणा अधिक है। पेयजल में लेड की अधिकता के कारण कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी का खतरा लगातार बना रहता है।
इनसेट
तंबाकू के सेवन से खतरा
बागपत। डॉ. अतुल बंसल बताते हैं कि हर प्रकार के कैंसर की वजह अलग होती है। ब्रेस्ट कैंसर का संबंध हारमोन से होता है, जबकि तंबाकू, शराब के सेवन, धुम्रपान से भी कैंसर का खतरा रहता है। कीटनाशक भी बीमारियों के जनक बन रहे हैं।
विज्ञापन
बागपत। जिला कैंसर की चपेट में है। जिले के लगभग हर गांव में कैंसर के मरीज हैं, लेकिन चौगामा क्षेत्र के गांव सबसे अधिक प्रभावित हैं। हिंडन और कृष्णा नदी के किनारे के गांव में सबसे अधिक मरीज मिले हैं। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि प्रदूषित जल से सीधे तौर पर कैंसर नहीं होता, लेकिन एनजीटी के आदेश पर जिले के 55 गांव में लगाए जा रहे मेडिकल कैंप में ही करीब 60 कैंसर के मरीज चिन्हित किए जा चुके हैं। जिले की बात करें तो कैंसर के मरीजों का आंकड़ा 250 के पार है। इनमें ऐसे भी लोग हैं, जो निजी अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं। महिलाओं में सबसे अधिक ब्रेस्ट कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं। इसके अलावा लीवर कैंसर, मुंह का कैंसर भी फैल रहा है। सबकी अलग-अलग वजह हैं।
इनसेट
काल बन रही नदियां
बागपत। चौगामा क्षेत्र के लिए जीवनदायिनी कृष्णा और हिंडन अभिशाप बन गई है। प्रदूषित जल बीमारी परोस रहा है। क्षेत्र के दाहा, निरपुडा, भड़ल और गांगनौली गांव में ब्लड कैंसर और लीवर कैंसर से मरने वालों की संख्या 70 से अधिक है। पानी में नाइट्रेट, फ्लोराइड, फास्फोरस और केडियम की मात्रा अधिक है।
विज्ञापन
इनसेट
55 गांव में सबसे ज्यादा खतरा
बागपत। कृष्णा नदी में प्रदूषण के मामले में दोआब पर्यावरण समिति, दाहा के चेयरमैन डॉ. चंद्रवीर सिंह राणा ने एनजीटी में रिट दायर की है। इस रिट के बाद 55 गांव में शुद्ध पेयजल आपूर्ति और मेडिकल कैंप लगाने के आदेश दिए हैं। सीएचसी बिनौली के अधीक्षक डॉ. अतुल बंसल 37 गांव में कैंप का संचालन करते हैं। वह कहते हैं कि उनके क्षेत्र में करीब 45 कैंसर रोगी चिन्हित किए, लेकिन सबकी वजह अलग-अलग है।
विज्ञापन
इनसेट
इसलिए बढ़ रहे हैं कैंसर रोगी
बागपत। क्षेत्र में पानी की जल निगम और अन्य एजेंसियों ने जांच कराई तो हकीकत खुलकर सामने आई। पानी में ही लैड (सीसा) की मात्रा 0.34 मिलीग्राम/लीटर पाई जा चुकी है। यह सामान्य से 34 गुणा अधिक है। इसमें क्रोमियम की मात्रा 1.84 मिलीग्राम/लीटर पाई गई है, जो सामान्य से 19 गुणा अधिक है। पेयजल में लेड की अधिकता के कारण कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी का खतरा लगातार बना रहता है।
इनसेट
तंबाकू के सेवन से खतरा
बागपत। डॉ. अतुल बंसल बताते हैं कि हर प्रकार के कैंसर की वजह अलग होती है। ब्रेस्ट कैंसर का संबंध हारमोन से होता है, जबकि तंबाकू, शराब के सेवन, धुम्रपान से भी कैंसर का खतरा रहता है। कीटनाशक भी बीमारियों के जनक बन रहे हैं।