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श्रद्धालुओं ने किया उत्तम मार्दव धर्म को अंगीकार
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दशलक्षण पर्व के दूसरे दिन जैन मंदिर में पूजा अर्चना करते जैन श्रद्धालु
- फोटो : BARAUT
बड़ौत। दशलक्षण पर्व के दूसरे दिन जैन मंदिरों में अलग-अलग विधान किए गए, जिनमें श्रद्धालुओं ने पूजा अर्चना करते हुए उत्तम मार्दव धर्म को अंगीकार किया।
अजितनाथ सभागार में बृहस्पतिवार को भक्तामर विधान का आयोजन किया। मुनि श्री विशुभ्र सागर महाराज एवं मुनि विश्वार्क सागर महाराज के सानिध्य में मध्य प्रदेश से पधारे विधानाचार्य पंडित राजकिंग के निर्देशन में श्रद्धालुओं ने गर्म प्रासुक जल से अजितनाथ भगवान की प्रतिमा का अभिषेक किया। शांति धारा का सौभाग्य सौधर्म इंद्र राजकुमार जैन, शुभम जैन और प्रवीण जैन को प्राप्त हुआ। श्रद्धालुओं ने देव शास्त्र गुरु पूजन, भगवान शांतिनाथ पूजन और दशलक्षण धर्म का पूजन किया। सौधर्म इंद्र राजकुमार जैन ने मंडल पर 48 अर्घ्य समर्पित किए। संगीतकार अरुण जैन के सुंदर भजनों पर जैन श्रद्धालुओं ने भाव विभोर होकर नृत्य किया। विधान में राकेश जैन, प्रदीप जैन, बालकिशन, विकास जैन, अनिल जैन, सुभाष जैन, मुकेश जैन, वरदान जैन मौजूद रहे।
उत्तम मार्दव धर्म धारण कर प्रभु की भक्ति करो
विधान में मुनि विशुभ्र सागर महाराज ने कहा कि भक्तमर पाठ अत्यंत प्रभावशाली है। आचार्य माणतुंग ने विपत्ति आने पर आदिनाथ भगवान का ध्यान किया था। वे आदिनाथ के ध्यान में लीन हो गए और भक्तामर के 48 काव्यों की रचना की। जो व्यक्ति विधि विधान से भक्तामर का पाठ करता है, उसके सभी संकट दूर होते हैं। कहा कि मान तो रावण का भी नहीं रहा, जिसने सोने की लंका बनाई थी। कहने का तात्पर्य है कि जब कुछ भी तुम्हारा नहीं है तो घमंड क्यों, इसलिए उत्तम मार्दव धर्म धारण करो और प्रभु की भक्ति करो। तभी मानव जीवन सार्थक होगा। शाम छह बजे से मंदिर में प्रतिक्रमण, आरती और जैन पाठशाला के बच्चों के द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति की गई। पुरस्कार वितरण राकेश जैन गौरव जैन द्वारा किया गया। वरदान जैन ने बताया कि शुक्रवार को अजितनाथ सभागार में अजितनाथ विधान का आयोजन किया जाएगा।
पंच परमेष्ठी विधान में 143 अर्घ्य किए समर्पित
बड़ौत। पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर नेहरू रोड में पंच परमेष्ठी विधान का भव्य आयोजन किया। सबसे पहले सौधर्म इंद्र निकेश जैन पारस जैन ने पार्श्वनाथ भगवान का अभिषेक किया। उसके बाद ईशान इंद्र सुशील जैन अजय जैन ने अभिषेक और शांति धारा की। कार्यक्रम में मौजूद सभी पुजारियों ने श्रीजी का अभिषेक किया। इसके बाद पंडित नेम चंद जैन ने दैनिक पूजा कराई, जिसमें 24 भगवानों और दशलक्षण रत्नत्रय पूजा संपन्न कराई गई। उसके बाद पंच परमेष्टि विधान का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें पांचों परमेष्टि की पूजा की गई। इसमें सौधर्म इंद्र-इंद्राणी और ईशान इंद्र-इंद्राणी और अन्य सभी पुजारियों ने मांडले पर 143 गुणों के अर्घ्य अर्पित किए। राजीव जैन ने सुंदर भजन प्रस्तुत किया। मौके पर राजीव जैन, विनय जैन, निकेश जैन, अजय जैन, सतेंद्र जैन, नरेश चंद जैन, संयम जैन, संजय जैन, अमित जैन, अदिश जैन, अनिल मौजूद रहे। दो सितंबर को पार्श्वनाथ मंदिर में भक्तांबर विधान का आयोजन किया जाएगा।
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अजितनाथ सभागार में बृहस्पतिवार को भक्तामर विधान का आयोजन किया। मुनि श्री विशुभ्र सागर महाराज एवं मुनि विश्वार्क सागर महाराज के सानिध्य में मध्य प्रदेश से पधारे विधानाचार्य पंडित राजकिंग के निर्देशन में श्रद्धालुओं ने गर्म प्रासुक जल से अजितनाथ भगवान की प्रतिमा का अभिषेक किया। शांति धारा का सौभाग्य सौधर्म इंद्र राजकुमार जैन, शुभम जैन और प्रवीण जैन को प्राप्त हुआ। श्रद्धालुओं ने देव शास्त्र गुरु पूजन, भगवान शांतिनाथ पूजन और दशलक्षण धर्म का पूजन किया। सौधर्म इंद्र राजकुमार जैन ने मंडल पर 48 अर्घ्य समर्पित किए। संगीतकार अरुण जैन के सुंदर भजनों पर जैन श्रद्धालुओं ने भाव विभोर होकर नृत्य किया। विधान में राकेश जैन, प्रदीप जैन, बालकिशन, विकास जैन, अनिल जैन, सुभाष जैन, मुकेश जैन, वरदान जैन मौजूद रहे।
उत्तम मार्दव धर्म धारण कर प्रभु की भक्ति करो
विधान में मुनि विशुभ्र सागर महाराज ने कहा कि भक्तमर पाठ अत्यंत प्रभावशाली है। आचार्य माणतुंग ने विपत्ति आने पर आदिनाथ भगवान का ध्यान किया था। वे आदिनाथ के ध्यान में लीन हो गए और भक्तामर के 48 काव्यों की रचना की। जो व्यक्ति विधि विधान से भक्तामर का पाठ करता है, उसके सभी संकट दूर होते हैं। कहा कि मान तो रावण का भी नहीं रहा, जिसने सोने की लंका बनाई थी। कहने का तात्पर्य है कि जब कुछ भी तुम्हारा नहीं है तो घमंड क्यों, इसलिए उत्तम मार्दव धर्म धारण करो और प्रभु की भक्ति करो। तभी मानव जीवन सार्थक होगा। शाम छह बजे से मंदिर में प्रतिक्रमण, आरती और जैन पाठशाला के बच्चों के द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति की गई। पुरस्कार वितरण राकेश जैन गौरव जैन द्वारा किया गया। वरदान जैन ने बताया कि शुक्रवार को अजितनाथ सभागार में अजितनाथ विधान का आयोजन किया जाएगा।
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पंच परमेष्ठी विधान में 143 अर्घ्य किए समर्पित
बड़ौत। पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर नेहरू रोड में पंच परमेष्ठी विधान का भव्य आयोजन किया। सबसे पहले सौधर्म इंद्र निकेश जैन पारस जैन ने पार्श्वनाथ भगवान का अभिषेक किया। उसके बाद ईशान इंद्र सुशील जैन अजय जैन ने अभिषेक और शांति धारा की। कार्यक्रम में मौजूद सभी पुजारियों ने श्रीजी का अभिषेक किया। इसके बाद पंडित नेम चंद जैन ने दैनिक पूजा कराई, जिसमें 24 भगवानों और दशलक्षण रत्नत्रय पूजा संपन्न कराई गई। उसके बाद पंच परमेष्टि विधान का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें पांचों परमेष्टि की पूजा की गई। इसमें सौधर्म इंद्र-इंद्राणी और ईशान इंद्र-इंद्राणी और अन्य सभी पुजारियों ने मांडले पर 143 गुणों के अर्घ्य अर्पित किए। राजीव जैन ने सुंदर भजन प्रस्तुत किया। मौके पर राजीव जैन, विनय जैन, निकेश जैन, अजय जैन, सतेंद्र जैन, नरेश चंद जैन, संयम जैन, संजय जैन, अमित जैन, अदिश जैन, अनिल मौजूद रहे। दो सितंबर को पार्श्वनाथ मंदिर में भक्तांबर विधान का आयोजन किया जाएगा।

दशलक्षण पर्व के दूसरे दिन जैन मंदिर में मोजूद जैन श्रद्धालु- फोटो : BARAUT
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