सुर्खियों में रहते बागपत की पंचायतों के फरमान
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यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी बागपत की पंचायतों से कई ऐसे फरमान निकले हैं, जो दुनियाभर में गूंजे। सुर्खियों में रहे और अदालतों की कार्रवाई में दर्ज है। सांकरौद प्रकरण को अभी लोग भूले नहीं है। देश की राजधानी से सटे एरिया में देहात की सामाजिक व्यवस्था में आज भी पंचायतों की महत्वपूर्ण भूमिका है। छोटी से लेकर बड़ी समस्याओं तक सुलझाने में यहां पंचायतों की अहम भूमिका रहती है।
केस 1 : खेकड़ा क्षेत्र के गांव सांकरौद में खाप पंचायत द्वारा दो बहनों के साथ दुष्कर्म कर निर्वस्त्र कर गांव में घूमाने के फरमान सुनाने की शिकायत वर्ष 2015 में सुप्रीम कोर्ट में की गई थी। इसकी गूंज विदेशों तक पहुंची थी।
केस 2 : असारा गांव में 7 जुलाई 2013 को प्रेमी युगलों के गांव में न घुसने को लेकर पंचायत बैठी थी। इसके चार दिन बाद ही पंचायत ने प्रेमी युगलों को गांव से निकालने और युवतियों के बाजार जाने पर पाबंदी लगाने का फरमान सुनाया था।
केस 3 : बसौद गांव में 1 मई 2013 में पंचायत ने प्रेमी युगल को गोली मारने का फरमान सुनाया था। उधर, बिलोचपुरा गांव में पंचायत ने 17 जुलाई 2013 को लड़के-लड़कियों के फोन सुनने पर पाबंदी लगाई थी।
केस 4 : भड़ल गांव में 10 जून 2013 को शेख सिद्दीकी बिरादरी की पंचायत में सात लोगों का सामाजिक बहिष्कार किया गया था। यह मामला भी पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय रहा था।