Baghpat: जज्बे और लगन से सफलता की सीढ़ियां चढ़ीं बेटियां, अब तन पर सजेगी 'खाकी वर्दी'
उप्र पुलिस भर्ती परिणाम आते ही गांव गांव होली का जश्न दोगुना हो गया है। बागपत जिले की करीब 60 बेटियां खाकी वर्दी पहनेंगी लेकिन जिले के सुरूरपुरकलां गांव की 12 बेटियों का चयन यूपी पुलिस में हुआ है।
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गांव का मान बढ़ाया, अब अपराधियों को सबक सिखाएंगी
वहां के लोग इसपर फक्र करते हुए कहते हैं कि बेटियों ने गांव का गौरव तो बढ़ाया ही है, लेकिन ट्रेनिंग के बाद जब तन पर खाकी वर्दी पहनेंगी, तब गुंडों और बदमाशों को सबक सिखाएंगी। खाकी पहनने का लक्ष्य पाने को बेटियों के बुलंद इरादें और संघर्ष की दास्तान शायद ही लोग जानते हैं। बेटियों ने अपनी संघर्ष की कहानियों को साझा किया जो बाकी बेटियों के अंदर ऐसा ही हौंसला पैदा कर सकें।
हर विफलता से मजबूती होती गईं भारती
सरूरपुरकलां गांव की भारती नैन बीएससी व इतिहास से स्नातकोत्तर उत्तीर्ण कर चुकी हैं और अब इनका भी यूपी पुलिस में चयन हुआ है। बड़ी बहन पारुल दिल्ली पुलिस में पांच साल पहले भर्ती हुई जो छोटी बहन भारती नैन की प्रेरणा बन गईं। भारती नैन को यह सपना पूरा करने को कम संघर्ष नहीं करना पड़ा और कई बार विफलताएं झेलनी पड़ी।
वर्ष 2021 में यूपी पुलिस में सब इंस्पेक्टर की आखिरी मेरिट में आने से रह गईं। फिर 2024 में चंडीगढ़ पुलिस भर्ती की लिखित परीक्षा पास की, लंबी कूद में पिछड़ गईं। कुछ दिन बाद फिर साहस जुटाया और दिल्ली पुलिस भर्ती की लिखित परीक्षा पास की लेकिन अबकी बार दौड़ में पिछड़ गईं।
कई बार मिली असफलता पर नहीं हारी हिम्मत
कई बार विफलता से झटका अवश्य लगा लेकिन हिम्मत नहीं हारी। उप्र पुलिस की लिखित परीक्षा पास की तथा अब शारीरिक परीक्षा में सफलता का झंडा गाडा। घर बड़ी बहन पारुल के संग होली खेलते हुए भारती नैन ने कहा कि देखिए! विफलता से मायूसी तो होती है लेकिन कबीरदास जी का यह दोहा कि ‘मन के हारे हार और मन के जीते जीत’ मेरा हौसला बढ़ाता रहा।
अपनी विफलता के कारण का पता लगा आगे की तैयारी में जुट जाती। घर से चंद कदम दूर एक मैदान है, जहां प्रतिदिन सुबह 5 बजे तीन किमी दौड़ लगाती और फिर घर पर रहकर ऑनलाइन पढ़ाई करतीं। मां वीना व पिता रविंद्र बोले कि हमें उम्मीद ही नहीं, पक्का भरोसा था कि भारती भी बड़ी बहन पारुल की तरह वर्दी पहनने में सफल होगीं।