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Baghpat News: खेतों से पानी सूखने पर नुकसान का आंकलन होगा, मुआवजा मिलेगा
Fri, 14 Jul 2023 11:58 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत
संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत
Updated Fri, 14 Jul 2023 11:58 PM IST
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बागपत। यमुना का जलस्तर बढऩे और तटबंध टूटने से फसल डूबने पर जितना नुकसान हुआ है, उसका पानी सूखने के बाद प्रशासन की तरफ से आंकलन कराया जाएगा। जिससे रिपोर्ट शासन को भेजकर किसानों को मुआवजा दिलाया जाए। जिलाधिकारी जितेेंद्र प्रताप सिंह ने इसके लिए कृषि विभाग व राजस्व विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए है कि जहां पानी सूखता है, वहां सर्वे किया जाए।
अफसर नहीं भांप सके स्थिति, सेह के बिलों ने बढ़ाई मुसीबत
यमुना के तटबंध का निर्माण वर्ष 1977 में हुआ था। इस तटबंध की बागपत के अंदर हालत काफी खराब है। उसकी हालत को अधिकारी नहीं भांप सके। तटबंध के दोनों तरफ झाड़िया है, जिससे पानी के रिसाव का पता तक नहीं चलता है। पानी का रिसाव भी सेह के बिलों से होता रहा, क्योंकि सेह ने तटबंध में बिल बनाए हुए थे। प्रशासनिक अधिकारियों ने आजतक इसपर ध्यान नहीं दिया। अधिकारी केवल निरीक्षण की खानापूर्ति करते रहते हैं। डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि शासन स्तर से पूरे मामले की जांच के निर्देश दिए गए है। आखिर किस कारण से यमुना का तटबंध टूटा है। इसमें किस अधिकारी ने अपनी जिम्मेदारी बखूबी नहीं निभाई, उसकी जांच कराई जाएगी और उनपर शिकंजा कसा जाएगा।
खेकड़ा के लख्मी चंद पटवारी कालेज में रोके जा सकेंगे लोग
खेकड़ा। बाढ़ प्रभावित परिवारों के ठहरने के लिए लख्मी चंद पटवारी काॅलेज में व्यवस्था की गई है। यदि यमुना का पानी गांवों की तरफ ओर बढ़ता है तो ग्रामीणों को कॉलेज में बनाए गए शिविर में शरण दी जाएगी। एसडीएम ज्योति शर्मा ने बताया कि कालेज के भवन में ग्रामीणों को शरण देने के लिए व्यवस्था कराई गई है। स्वास्थ्य, राजस्व और सिंचाई विभागों की टीमें सक्रिय है।
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विधायक जायजा लेने पहुंचे, गांव में बिजली आपूर्ति शुरू हुई
विधायक योगेश धामा शुक्रवार को सुभानपुर गांव में स्थिति का जायजा लेने पहुंचे। विधायक ने ट्रैक्टर पर बैठकर गांव व जंगल में घूमकर स्थिति को देखा। जहां ग्रामीणों ने कहा कि बिजली नहीं आने से पानी की समस्या हो गई है और गांव में पेयजल तक नहीं है। जिसके बाद प्रशासन ने बिजली आपूर्ति शुरू करा दी।
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अफसर नहीं भांप सके स्थिति, सेह के बिलों ने बढ़ाई मुसीबत
यमुना के तटबंध का निर्माण वर्ष 1977 में हुआ था। इस तटबंध की बागपत के अंदर हालत काफी खराब है। उसकी हालत को अधिकारी नहीं भांप सके। तटबंध के दोनों तरफ झाड़िया है, जिससे पानी के रिसाव का पता तक नहीं चलता है। पानी का रिसाव भी सेह के बिलों से होता रहा, क्योंकि सेह ने तटबंध में बिल बनाए हुए थे। प्रशासनिक अधिकारियों ने आजतक इसपर ध्यान नहीं दिया। अधिकारी केवल निरीक्षण की खानापूर्ति करते रहते हैं। डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि शासन स्तर से पूरे मामले की जांच के निर्देश दिए गए है। आखिर किस कारण से यमुना का तटबंध टूटा है। इसमें किस अधिकारी ने अपनी जिम्मेदारी बखूबी नहीं निभाई, उसकी जांच कराई जाएगी और उनपर शिकंजा कसा जाएगा।
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खेकड़ा के लख्मी चंद पटवारी कालेज में रोके जा सकेंगे लोग
खेकड़ा। बाढ़ प्रभावित परिवारों के ठहरने के लिए लख्मी चंद पटवारी काॅलेज में व्यवस्था की गई है। यदि यमुना का पानी गांवों की तरफ ओर बढ़ता है तो ग्रामीणों को कॉलेज में बनाए गए शिविर में शरण दी जाएगी। एसडीएम ज्योति शर्मा ने बताया कि कालेज के भवन में ग्रामीणों को शरण देने के लिए व्यवस्था कराई गई है। स्वास्थ्य, राजस्व और सिंचाई विभागों की टीमें सक्रिय है।
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विधायक जायजा लेने पहुंचे, गांव में बिजली आपूर्ति शुरू हुई
विधायक योगेश धामा शुक्रवार को सुभानपुर गांव में स्थिति का जायजा लेने पहुंचे। विधायक ने ट्रैक्टर पर बैठकर गांव व जंगल में घूमकर स्थिति को देखा। जहां ग्रामीणों ने कहा कि बिजली नहीं आने से पानी की समस्या हो गई है और गांव में पेयजल तक नहीं है। जिसके बाद प्रशासन ने बिजली आपूर्ति शुरू करा दी।