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पुलिस न आती तो लाशें बिछा देते
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
Updated Fri, 08 Apr 2016 01:03 AM IST
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बड़ौत में सीओ कार्यालय पर पकड़े गए बदमाशों से पूछताछ करते सीओ।
- फोटो : amar ujala
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यदि पुलिस न आती तो हम ग्रामीणों की लाशें बिछा देते। यह बात असारा क्षेत्र से पकड़े गए बदमाशों ने सीओ को पूछताछ के दौरान बताई। उनसे मिले हथियार भी उन्होंने अपने भाइयों की हत्या का बदला देने के लिए गांव के ही एक व्यक्ति से खरीदे थे। पुलिस ने पूछताछ के बाद दोनों बदमाशों को न्यायालय में पेश कर जेल भेजा।
बुधवार को असारा-भनेड़ा मार्ग पर दिन दहाड़े दो हथियारबंद बदमाशों ने गन प्वाइंट पर लेकर बाइक सवार दंपति से लूट की थी। दंपति ने असारा गांव पहुंचकर शोर मचा दिया था तो ग्रामीणों ने मुठभेड़ के बाद बदमाशों को दबोच लिया था और मारपीट कर पुलिस को सौंपा था। पकड़े गए बदमाश साबिर और जाकिर पुत्र इसराल निवासी असारा को गंभीर हालत में सीएचसी बड़ौत में भर्ती कराया था।
बृहस्पतिवार को सीओ रमाला ने अपने कार्यालय में बदमाशों से पूछताछ के बाद बताया यदि पुलिस मौके पर नहीं पहुंचती तो वे ग्रामीणों की हत्या कर देते। पकड़े गए बदमाशों में जाकिर बीए द्वितीय वर्ष का छात्र है, जबकि साबिर कक्षा दस का छात्र है। ये दोनों ही सगे भाई हैं। पांच मई 2012 में उनके सगे भाई नसीम और इसरार की हत्या की और 2005 में उनके पिता इसराल (जो हिस्ट्रीशीटर था) की भी हत्या की।
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उनका एक भाई शकील हत्या के मामले में मुजफ्फरनगर जेल में बंद है। पकड़े गए दोनों ही बदमाशों पर चार-चार मुकदमें रमाला थाने में दर्ज हैं। सीओ ने बताया उन्होंने भाइयों की हत्या का बदला लेने के लिए गांव के ही तराबू पुत्र करम अली से देशी बंदूक और 315 बोर की देशी राइफल 15-15 हजार रुपये में खरीदी और कारतूस भी गांव के ही मुस्ताक पुत्र युनूस से खरीदे।
उन्होंने बताया बदमाशों को पकड़ने वाली पुलिस टीम को एसपी ने पांच हजार रुपये का ईनाम और प्रशंसा पत्र देने की घोषणा की। दोनों को ही न्यायालय में पेश कर जेल भेजा। पकड़े गए बदमाशों के खुलासे से लगता है असारा गांव में जल्दी ही खून बहने वाला है, क्योंकि पकड़े गए बदमाशों की गांव के ही लोगों से खूनी रंजिश चली आ रही है। उनके पिता और दो भाइयों की हत्या की जा चुकी है। बदमाशों ने बताया वे शीघ्र ही जेल से छूट जाएंगे और उन्हें फिर कोई रोक नहीं पाएगा।
हथियारों की मंडी बना असारा
बड़ौत। पकड़े गए बदमाशों से जो बात सामने आई हैं, इससे लगता है असारा गांव में हथियारों की मंडी बना हुआ है। बदमाशों के अनुसार तराबू नामक व्यक्ति 15 हजार रुपये की पेशगी लेकर हथियार सप्लाई करता है और मुस्ताक 250 रुपये में एक कारतूस बेचता है। पकड़े गए बदमाशों ने बताया ये दोनों ही धंधे को कई वर्षों से कर रहे है, लेकिन पुलिस को इसकी भनक तक नहीं है।
बदमाशों का यह भी कहना था कि ये लोग असारा ही नहीं आसपास के क्षेत्र में भी हथियारों की सप्लाई करते हैं। ये हथियार कहां से लाते हैं, इसकी अभी जानकारी नहीं मिली है। उनके पकड़े जाने के बाद ही जानकारी मिल सकेगी। सीओ रमाला राजवीर सिंह ने बताया प्रकाश में आए हथियार बेचने वाले सौदागरों पर अब शिकंजा कसा जाएगा।
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बुधवार को असारा-भनेड़ा मार्ग पर दिन दहाड़े दो हथियारबंद बदमाशों ने गन प्वाइंट पर लेकर बाइक सवार दंपति से लूट की थी। दंपति ने असारा गांव पहुंचकर शोर मचा दिया था तो ग्रामीणों ने मुठभेड़ के बाद बदमाशों को दबोच लिया था और मारपीट कर पुलिस को सौंपा था। पकड़े गए बदमाश साबिर और जाकिर पुत्र इसराल निवासी असारा को गंभीर हालत में सीएचसी बड़ौत में भर्ती कराया था।
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बृहस्पतिवार को सीओ रमाला ने अपने कार्यालय में बदमाशों से पूछताछ के बाद बताया यदि पुलिस मौके पर नहीं पहुंचती तो वे ग्रामीणों की हत्या कर देते। पकड़े गए बदमाशों में जाकिर बीए द्वितीय वर्ष का छात्र है, जबकि साबिर कक्षा दस का छात्र है। ये दोनों ही सगे भाई हैं। पांच मई 2012 में उनके सगे भाई नसीम और इसरार की हत्या की और 2005 में उनके पिता इसराल (जो हिस्ट्रीशीटर था) की भी हत्या की।
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उनका एक भाई शकील हत्या के मामले में मुजफ्फरनगर जेल में बंद है। पकड़े गए दोनों ही बदमाशों पर चार-चार मुकदमें रमाला थाने में दर्ज हैं। सीओ ने बताया उन्होंने भाइयों की हत्या का बदला लेने के लिए गांव के ही तराबू पुत्र करम अली से देशी बंदूक और 315 बोर की देशी राइफल 15-15 हजार रुपये में खरीदी और कारतूस भी गांव के ही मुस्ताक पुत्र युनूस से खरीदे।
उन्होंने बताया बदमाशों को पकड़ने वाली पुलिस टीम को एसपी ने पांच हजार रुपये का ईनाम और प्रशंसा पत्र देने की घोषणा की। दोनों को ही न्यायालय में पेश कर जेल भेजा। पकड़े गए बदमाशों के खुलासे से लगता है असारा गांव में जल्दी ही खून बहने वाला है, क्योंकि पकड़े गए बदमाशों की गांव के ही लोगों से खूनी रंजिश चली आ रही है। उनके पिता और दो भाइयों की हत्या की जा चुकी है। बदमाशों ने बताया वे शीघ्र ही जेल से छूट जाएंगे और उन्हें फिर कोई रोक नहीं पाएगा।
हथियारों की मंडी बना असारा
बड़ौत। पकड़े गए बदमाशों से जो बात सामने आई हैं, इससे लगता है असारा गांव में हथियारों की मंडी बना हुआ है। बदमाशों के अनुसार तराबू नामक व्यक्ति 15 हजार रुपये की पेशगी लेकर हथियार सप्लाई करता है और मुस्ताक 250 रुपये में एक कारतूस बेचता है। पकड़े गए बदमाशों ने बताया ये दोनों ही धंधे को कई वर्षों से कर रहे है, लेकिन पुलिस को इसकी भनक तक नहीं है।
बदमाशों का यह भी कहना था कि ये लोग असारा ही नहीं आसपास के क्षेत्र में भी हथियारों की सप्लाई करते हैं। ये हथियार कहां से लाते हैं, इसकी अभी जानकारी नहीं मिली है। उनके पकड़े जाने के बाद ही जानकारी मिल सकेगी। सीओ रमाला राजवीर सिंह ने बताया प्रकाश में आए हथियार बेचने वाले सौदागरों पर अब शिकंजा कसा जाएगा।