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प्रधान समेत आठ पर केस
ब्यूरो/ अमर उजाला, बागपत
Updated Mon, 26 Sep 2016 02:07 AM IST
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दोघट। हिस्ट्रीशीटर रामबली का अपहरण कर हत्या करने का आरोप निरपुड़ा गांव की प्रधान मुनेश समेत आठ लोगों पर लगा है। इसमें तीन पुलिस वाले भी शामिल हैं। कोर्ट के आदेश पर आरोपियों के खिलाफ दोघट थाना में रिपोर्ट दर्ज हुई है।
निरपुड़ा गांव की महिला कमलेश के शिकायत पत्र के मुताबिक उसके बेटे रामबली को गांव की पार्टीबाजी के चलते ब्रजपाल की हत्या के केस में फर्जी तरीके से नामजद कराया था। रामबली जमानत पर जेल से आया था। इस रंजिश के चलते रामबली अधिकांश गांव से बाहर रहता था। विपक्षी उसे जान से मारने की फिराक में रहते थे। कई बार उस पर हमला हो चुका था। इसकी शिकायत पुलिस अफसरों से की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
15 जुलाई 2015 को रामबली गांव में आया। अगले दिन सुबह रामबली गांव के एक व्यक्ति के साथ खेत में गया था। रास्ते में एक बुलेरो गाड़ी मिली। इसमें गांव का निश्चय, उसकी मां मुनेश (वर्तमान ग्राम प्रधान), सोनू, अजीत, बिजेंद्र उर्फ बिल्लू और तीन पुलिस वाले निकले। मुनेश को छोड़कर सभी हथियार लिए थे।
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आरोपियों ने रामबली को दबोच कर गाड़ी में डाल लिया। रामबली के साथ गया व्यक्ति वहां से भागने में कामयाब हो गया। उसने दोघट थाना में घटना की शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की। इसके बाद उसने पुलिस अधिकारियों, मुख्यमंत्री, मानवाधिकार आयोग और प्रधानमंत्री को पत्र भेजकर शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
27 जुलाई 2015 को उसे सूचना मिली निश्चय राणा के खेत में स्थित कुआं में किसी व्यक्ति की लाश मिली। उसने दोघट थाना में सूचना दी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। बाद में आरोपियों ने कुएं को मिट्टी से ढक दिया था। उसका आरोप है आरोपियों ने उसके बेटे रामबली की हत्या कर शव कुएं में दबा दिया है। शिकायत के बाद भी कोई कार्रवाई न होने पर उसने कोर्ट की शरण ली। कोर्ट के आदेश पर आरोपियों के खिलाफ दोघट थाने में रिपोर्ट दर्ज हुई। थाना प्रभारी चितवन सिंह ने कहा केस की विवेचना के आधार पर कार्रवाई होगी।
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निरपुड़ा गांव की महिला कमलेश के शिकायत पत्र के मुताबिक उसके बेटे रामबली को गांव की पार्टीबाजी के चलते ब्रजपाल की हत्या के केस में फर्जी तरीके से नामजद कराया था। रामबली जमानत पर जेल से आया था। इस रंजिश के चलते रामबली अधिकांश गांव से बाहर रहता था। विपक्षी उसे जान से मारने की फिराक में रहते थे। कई बार उस पर हमला हो चुका था। इसकी शिकायत पुलिस अफसरों से की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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15 जुलाई 2015 को रामबली गांव में आया। अगले दिन सुबह रामबली गांव के एक व्यक्ति के साथ खेत में गया था। रास्ते में एक बुलेरो गाड़ी मिली। इसमें गांव का निश्चय, उसकी मां मुनेश (वर्तमान ग्राम प्रधान), सोनू, अजीत, बिजेंद्र उर्फ बिल्लू और तीन पुलिस वाले निकले। मुनेश को छोड़कर सभी हथियार लिए थे।
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आरोपियों ने रामबली को दबोच कर गाड़ी में डाल लिया। रामबली के साथ गया व्यक्ति वहां से भागने में कामयाब हो गया। उसने दोघट थाना में घटना की शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की। इसके बाद उसने पुलिस अधिकारियों, मुख्यमंत्री, मानवाधिकार आयोग और प्रधानमंत्री को पत्र भेजकर शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
27 जुलाई 2015 को उसे सूचना मिली निश्चय राणा के खेत में स्थित कुआं में किसी व्यक्ति की लाश मिली। उसने दोघट थाना में सूचना दी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। बाद में आरोपियों ने कुएं को मिट्टी से ढक दिया था। उसका आरोप है आरोपियों ने उसके बेटे रामबली की हत्या कर शव कुएं में दबा दिया है। शिकायत के बाद भी कोई कार्रवाई न होने पर उसने कोर्ट की शरण ली। कोर्ट के आदेश पर आरोपियों के खिलाफ दोघट थाने में रिपोर्ट दर्ज हुई। थाना प्रभारी चितवन सिंह ने कहा केस की विवेचना के आधार पर कार्रवाई होगी।