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अर्द्धविक्षिप्त युवक सड़क पर दौड़ाता रहा बस
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
Updated Mon, 02 Nov 2015 12:50 AM IST
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बागपत में एक मनोरोगी युवक रोडवेज की बस को सड़क पर दौड़ाता रहा। वह बस को दौड़ा कर बड़ौत से बागपत के गांव अहेड़ा तक करीब 23 किलोमीटर ले आया, जहां गियर फंसने पर बस बंद हो गई। यहां लोगों ने उसे पकड़ कर पुलिस को सौंप दिया। गनीमत रही कि कोई बस की चपेट मेें नहीं आया। हैरत की बात यह है कि कोतवाली पुलिस ने बिना जांच किए ही युवक को छोड़ दिया। लोगों ने पुलिस के खुद को चिकित्सक की भूमिका निभाने पर सवाल उठाया है।
रविवार की सुबह करीब छह बजे अहेड़ा गांव के ग्रामीणों ने एक मनोरोगी युवक को सड़क किनारे खड़ी मुजफ्फरनगर डिपो की अनुबंधित बस में गियर के साथ छेड़छाड़ करते पकड़ लिया और पुलिस को सूचना दी। सूचना पर पहुंची पुलिस के सामने ही युवक अजीब हरकतें करते हुए ग्रामीणों और पुलिस कर्मियों से गाली गलौज करने लगा।
पुलिस ने डांट फटकार कर उससे पूछताछ की तो उसने बताया कि बस बड़ौत में तहसील के पास खड़ी थी। वहीं से वह बस को स्टार्ट करके लाया है। गियर फंस जाने के कारण बस बंद हो गई थी। यहां हैरत की बात यह रही कि एक मनोरोगी युवक बस को 23 किलोमीटर दौड़ा कर ले आया, लेकिन पुलिस ने छानबीन किए बिना ही उसे छोड़ दिया। गनीमत रही कि रास्ते में कोई हादसा नहीं हुआ।
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यहीं नहीं मौके पर पहुंचे लापरवाह बस के चालक और परिचालक को भी बस ले जाने दिया गया, जबकि उनके खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए थी। यह स्थिति तब है जब बागपत में लगातार क्राइम ग्राफ बढ़ रहा है। बदमाश वाहनों को रोक-रोक कर लूट कर रहे है। बावजूद इसके पुलिस गंभीर नहीं दिख रही है।
इस बाबत कोतवाली प्रभारी रणवीर सिंह का कहना था कि युवक मनोरोगी था, इस पर उसे छोड़ दिया गया। चालक और परिचालक ने भी गलती स्वीकारी तो उन्हें बस ले जाने दी गई। दोनों ने इतना जरूर बताया कि वह शनिवार की रात बस को तहसील के पास खड़ा करके कहीं चले गए थे।
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रविवार की सुबह करीब छह बजे अहेड़ा गांव के ग्रामीणों ने एक मनोरोगी युवक को सड़क किनारे खड़ी मुजफ्फरनगर डिपो की अनुबंधित बस में गियर के साथ छेड़छाड़ करते पकड़ लिया और पुलिस को सूचना दी। सूचना पर पहुंची पुलिस के सामने ही युवक अजीब हरकतें करते हुए ग्रामीणों और पुलिस कर्मियों से गाली गलौज करने लगा।
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पुलिस ने डांट फटकार कर उससे पूछताछ की तो उसने बताया कि बस बड़ौत में तहसील के पास खड़ी थी। वहीं से वह बस को स्टार्ट करके लाया है। गियर फंस जाने के कारण बस बंद हो गई थी। यहां हैरत की बात यह रही कि एक मनोरोगी युवक बस को 23 किलोमीटर दौड़ा कर ले आया, लेकिन पुलिस ने छानबीन किए बिना ही उसे छोड़ दिया। गनीमत रही कि रास्ते में कोई हादसा नहीं हुआ।
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यहीं नहीं मौके पर पहुंचे लापरवाह बस के चालक और परिचालक को भी बस ले जाने दिया गया, जबकि उनके खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए थी। यह स्थिति तब है जब बागपत में लगातार क्राइम ग्राफ बढ़ रहा है। बदमाश वाहनों को रोक-रोक कर लूट कर रहे है। बावजूद इसके पुलिस गंभीर नहीं दिख रही है।
इस बाबत कोतवाली प्रभारी रणवीर सिंह का कहना था कि युवक मनोरोगी था, इस पर उसे छोड़ दिया गया। चालक और परिचालक ने भी गलती स्वीकारी तो उन्हें बस ले जाने दी गई। दोनों ने इतना जरूर बताया कि वह शनिवार की रात बस को तहसील के पास खड़ा करके कहीं चले गए थे।