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सवाल अनसुलझे, कब खुलेंगे बजरंगी की हत्या के राज
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बागपत। पूर्वांचल के डॉन मुन्ना बजरंगी की हत्या के अधिकतर सवाल अनसुलझे हैं। पुलिस ने सुनील राठी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की, लेकिन अभी भी कई सवाल ऐसे हैं, इनसे पर्दा उठना बाकी है। पुलिस अधिकारी मामले में चुप्पी साधे हैं, जबकि आगरा से पिस्टल की बैलेस्टिक जांच रिपोर्ट को वापस भेजा था। दोबारा से अब लखनऊ में जांच कराने की बात कही जा रही है, लेकिन अधिकारी कुछ भी कहने से बच रहे हैं।
मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद बागपत जेल से बरामद पिस्टल की बैलेस्टिक जांच आगरा प्रयोगशाला में कराई गई । पुष्टि हुई थी जो पिस्टल जांच के लिए भेजा है, उससे गोली ही नहीं चली । बागपत पुलिस ने यह रिपोर्ट वापस भेज दी । पिस्टल की जांच दोबारा लखनऊ प्रयोगशाला में कराने की तैयारी चल रही है, लेकिन पुलिस ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
वारदात में कई सवाल अनसुलझे हैं, जिनका पुलिस जवाब नहीं दे पा रही है। बागपत जेल में पिस्टल कैसे पहुंचा, पिस्टल जेल में पहुंचाने वाला कौन है। वारदात में कितने लोग शामिल रहे। वारदात में कितने शस्त्रों का प्रयोग किया गया। लेकिन पुलिस की जांच में इनमें से किसी भी सवाल का जवाब आम नहीं हुआ है। एसपी शैलेश कुमार पांडेय का कहना है कि कई बिंदु जांच का विषय हैं। जब तक पूरी जानकारी नहीं होगी, वह कुछ नहीं बता सकेंगे।
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जेल में थे पिस्टल, तो जांच में क्यों नहीं मिले
बागपत। पुलिस और जेल अधिकारियों ने बजरंगी की हत्या के बाद बागपत जेल का कई बार निरीक्षण किया। सर्च अभियान चलाया। गटर में एक पिस्टल मिला। इससे सवाल है कि अगर शस्त्र एक से अधिक थे तो वह कहां गए। पुलिस की जांच में क्यों नहीं मिले। एंड्रायड मोबाइल भी नहीं मिले थे। जबकि फोटो भी जेल से ही वायरल किए गए थे।
वार्डर ने उठाए सिस्टम पर सवाल
बागपत। बागपत जेल में पिस्टल कैसे पहुंचा, इसकी जांच में जुटे अधिकारियों ने पिछले महीने ही जेल वार्डर और हेड जेल वार्डर को सस्पेंड किया। बर्खास्त जेल वार्डर के नाम से मुख्य सचिव को पत्र भेजकर जेल के अंदर के हालात और वारदात के दिन की कहानी बताई । यह भी बताया कि वारदात से पहले सुनील राठी और उसके भाई की मुलाकात हुई थी।
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मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद बागपत जेल से बरामद पिस्टल की बैलेस्टिक जांच आगरा प्रयोगशाला में कराई गई । पुष्टि हुई थी जो पिस्टल जांच के लिए भेजा है, उससे गोली ही नहीं चली । बागपत पुलिस ने यह रिपोर्ट वापस भेज दी । पिस्टल की जांच दोबारा लखनऊ प्रयोगशाला में कराने की तैयारी चल रही है, लेकिन पुलिस ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
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वारदात में कई सवाल अनसुलझे हैं, जिनका पुलिस जवाब नहीं दे पा रही है। बागपत जेल में पिस्टल कैसे पहुंचा, पिस्टल जेल में पहुंचाने वाला कौन है। वारदात में कितने लोग शामिल रहे। वारदात में कितने शस्त्रों का प्रयोग किया गया। लेकिन पुलिस की जांच में इनमें से किसी भी सवाल का जवाब आम नहीं हुआ है। एसपी शैलेश कुमार पांडेय का कहना है कि कई बिंदु जांच का विषय हैं। जब तक पूरी जानकारी नहीं होगी, वह कुछ नहीं बता सकेंगे।
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जेल में थे पिस्टल, तो जांच में क्यों नहीं मिले
बागपत। पुलिस और जेल अधिकारियों ने बजरंगी की हत्या के बाद बागपत जेल का कई बार निरीक्षण किया। सर्च अभियान चलाया। गटर में एक पिस्टल मिला। इससे सवाल है कि अगर शस्त्र एक से अधिक थे तो वह कहां गए। पुलिस की जांच में क्यों नहीं मिले। एंड्रायड मोबाइल भी नहीं मिले थे। जबकि फोटो भी जेल से ही वायरल किए गए थे।
वार्डर ने उठाए सिस्टम पर सवाल
बागपत। बागपत जेल में पिस्टल कैसे पहुंचा, इसकी जांच में जुटे अधिकारियों ने पिछले महीने ही जेल वार्डर और हेड जेल वार्डर को सस्पेंड किया। बर्खास्त जेल वार्डर के नाम से मुख्य सचिव को पत्र भेजकर जेल के अंदर के हालात और वारदात के दिन की कहानी बताई । यह भी बताया कि वारदात से पहले सुनील राठी और उसके भाई की मुलाकात हुई थी।