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Baghpat News: घर में चल रही थी पटाखा फैक्टरी, पुलिस के सामने भाग गए आरोपी
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बालैनी। दत्तनगर गांव के किसान इंद्रपाल के मकान में रिजवान अपने साथियों के साथ पटाखा फैक्टरी चला रहा था। सोमवार देर रात छापा मारते ही रिजवान अपने दो साथियों के साथ पुलिस के सामने ही भाग गया। पुलिस ने मकान से 10 क्विंटल बने हुए व अधबने पटाखे और उनमें प्रयुक्त होने वाला सामान बरामद किया। पुलिस ने रिजवान और दो अज्ञात के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस को दत्तनगर गांव में बंद मकान में पटाखे बनाने की सूचना मिली थी। सोमवार रात पुलिस की टीम ने मकान की घेराबंदी कर छापा मारा की तो वहां काफी मात्रा में पटाखे बनते हुए मिले। वहां पर रिजवान अपने दो साथियों के साथ पटाखे बना रहा था, जो पुलिस को देखते ही मकान की दीवार कूदकर भाग गया।
पुलिसकर्मियों ने पीछा कर तीनों को पकड़ने का प्रयास भी किया, लेकिन वे हाथ नहीं आए। पुलिस ने मकान में जांच की तो वहां से डेढ़ क्विंटल सुतली बम, 25 किलो अधबने सुतली बम, 45 किलो तेज धमाके में प्रयुक्त होने वाला बारुद, सुतली की रील और कागज समेत अन्य सामान बरामद किया। इस मामले में सीओ रोहन चौरसिया का कहना है कि एनसीआर क्षेत्र में पटाखों की बिक्री और उनका स्टॉक लगवाना अवैध है। पटाखे बनाने और बेचने वालों को पकड़ने के लिए कार्रवाई जारी रहेगी।
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दत्तनगर गांव में बार-बार पकड़ी जा रही पटाखा फैक्टरी
लोगों की मानें तो दीपावली पर्व पर दत्तनगर गांव में बनने वाले पटाखे कई जिलों में सप्लाई किए जाते हैं। इसको लेकर पहले भी कई बार दत्तनगर गांव में पटाखा फैक्टरी पकड़ी जा चुकी है। घरों में चलने वाली पटाखा फैक्टरियों से कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
सिर्फ ग्रीन पटाखों को मंजूरी, सामान्य पटाखे लाने की भी मंजूरी नहीं
प्रदूषण के कारण पटाखों के प्रयोग पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाई हुई है। एनसीआर क्षेत्र में सिर्फ ग्रीन पटाखों के प्रयोग की मंजूरी दी गई है, जबकि एनसीआर क्षेत्र में सामान्य धमाके वाले पटाखों के साथ पकड़े जाने पर कार्रवाई की जाएगी। लोगों को एनसीआर क्षेत्र के बाहर के जिले से खरीदकर पटाखे लेकर आने की भी अनुमति नहीं है, ऐसे लोगों की तलाश में चेकिंग अभियान भी चलाए जा रहे हैं।
यह है ग्रीन पटाखों और सामान्य पटाखों में अंतर
अफसरों के अनुसार ग्रीन पटाखों की सूची में छोटे पटाखे शामिल किए गए हैं, जिनकी आवाज 110 से 125 डेसिबल तक रहती है, जबकि सामान्य पटाखों की आवाज 160 डेसिबल से ज्यादा हो जाती है। इसके अलावा ग्रीन पटाखे सामान्य पटाखों की अपेक्षा 30 फीसदी प्रदूषण भी कम करते हैं, जिनमें हानिकारक गैस बेरियम नहीं होती। ग्रीन पटाखों पर राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान की मंजूरी का क्यूआर कोड भी लगा है, जिसके स्कैन करने पर ग्रीन पटाखों के नाम पर होने वाला फर्जीवाड़ा भी पकड़ा जा सकता है।
वर्जन
जिले में पटाखों की बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित है। पटाखे बनाने और बेचने वालों के खिलाफ छापा मार अभियान चलाकर कार्रवाई की जा रही है।
-दिग्विजय सिंह, एसडीएम
छह मामलो में 12 के खिलाफ हुई कार्रवाई
पटाखे बेचने, बनाने और तस्करी करने के अभी तक छह मामले पकड़े जा चुके हैं। इनमे खेकड़ा पुलिस ने दो आरोपितों को गिरफ्तार किया गया, जबकि बड़ौत पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया। इसके अलावा बागपत में दो, दोघट में एक, सिंघवाली अहीर थाने में चार और बालैनी थाना पुलिस ने तीन के खिलाफ विस्फोटक अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई।
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पुलिस को दत्तनगर गांव में बंद मकान में पटाखे बनाने की सूचना मिली थी। सोमवार रात पुलिस की टीम ने मकान की घेराबंदी कर छापा मारा की तो वहां काफी मात्रा में पटाखे बनते हुए मिले। वहां पर रिजवान अपने दो साथियों के साथ पटाखे बना रहा था, जो पुलिस को देखते ही मकान की दीवार कूदकर भाग गया।
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पुलिसकर्मियों ने पीछा कर तीनों को पकड़ने का प्रयास भी किया, लेकिन वे हाथ नहीं आए। पुलिस ने मकान में जांच की तो वहां से डेढ़ क्विंटल सुतली बम, 25 किलो अधबने सुतली बम, 45 किलो तेज धमाके में प्रयुक्त होने वाला बारुद, सुतली की रील और कागज समेत अन्य सामान बरामद किया। इस मामले में सीओ रोहन चौरसिया का कहना है कि एनसीआर क्षेत्र में पटाखों की बिक्री और उनका स्टॉक लगवाना अवैध है। पटाखे बनाने और बेचने वालों को पकड़ने के लिए कार्रवाई जारी रहेगी।
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दत्तनगर गांव में बार-बार पकड़ी जा रही पटाखा फैक्टरी
लोगों की मानें तो दीपावली पर्व पर दत्तनगर गांव में बनने वाले पटाखे कई जिलों में सप्लाई किए जाते हैं। इसको लेकर पहले भी कई बार दत्तनगर गांव में पटाखा फैक्टरी पकड़ी जा चुकी है। घरों में चलने वाली पटाखा फैक्टरियों से कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
सिर्फ ग्रीन पटाखों को मंजूरी, सामान्य पटाखे लाने की भी मंजूरी नहीं
प्रदूषण के कारण पटाखों के प्रयोग पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाई हुई है। एनसीआर क्षेत्र में सिर्फ ग्रीन पटाखों के प्रयोग की मंजूरी दी गई है, जबकि एनसीआर क्षेत्र में सामान्य धमाके वाले पटाखों के साथ पकड़े जाने पर कार्रवाई की जाएगी। लोगों को एनसीआर क्षेत्र के बाहर के जिले से खरीदकर पटाखे लेकर आने की भी अनुमति नहीं है, ऐसे लोगों की तलाश में चेकिंग अभियान भी चलाए जा रहे हैं।
यह है ग्रीन पटाखों और सामान्य पटाखों में अंतर
अफसरों के अनुसार ग्रीन पटाखों की सूची में छोटे पटाखे शामिल किए गए हैं, जिनकी आवाज 110 से 125 डेसिबल तक रहती है, जबकि सामान्य पटाखों की आवाज 160 डेसिबल से ज्यादा हो जाती है। इसके अलावा ग्रीन पटाखे सामान्य पटाखों की अपेक्षा 30 फीसदी प्रदूषण भी कम करते हैं, जिनमें हानिकारक गैस बेरियम नहीं होती। ग्रीन पटाखों पर राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान की मंजूरी का क्यूआर कोड भी लगा है, जिसके स्कैन करने पर ग्रीन पटाखों के नाम पर होने वाला फर्जीवाड़ा भी पकड़ा जा सकता है।
वर्जन
जिले में पटाखों की बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित है। पटाखे बनाने और बेचने वालों के खिलाफ छापा मार अभियान चलाकर कार्रवाई की जा रही है।
-दिग्विजय सिंह, एसडीएम
छह मामलो में 12 के खिलाफ हुई कार्रवाई
पटाखे बेचने, बनाने और तस्करी करने के अभी तक छह मामले पकड़े जा चुके हैं। इनमे खेकड़ा पुलिस ने दो आरोपितों को गिरफ्तार किया गया, जबकि बड़ौत पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया। इसके अलावा बागपत में दो, दोघट में एक, सिंघवाली अहीर थाने में चार और बालैनी थाना पुलिस ने तीन के खिलाफ विस्फोटक अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई।