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चकबंदी ने बिगाड़ा किसानों के मुआवजे का गणित

Sun, 12 Jun 2022 10:39 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 12 Jun 2022 10:39 PM IST
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Consolidation spoiled the mathematics of farmers' compensation
बागपत के काठा गांव में दिल्ली इकोनामिक कॉरिडोर का शुभारंम कराते डीएम राजकमल यादव का फाइल फोटो - फोटो : BAGHPAT
संवाद न्यूज एजेंसी
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बागपत। दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर के अधिग्रहित जमीन के मुआवजे का गणित चकबंदी ने बिगाड़ दिया है। अभिलेखों में जमीन किसी अन्य किसान के नाम है तो मौके पर कब्जा किसी ओर का है। इस तरह की समस्या उन गांवों में ज्यादा हो रही हैं, जहां चकबंदी कुछ साल पहले ही हुई हैं और इन समस्याओं का अभी तक निस्तारण नहीं हो सका है। अब अधिकारी जल्द उनकी समस्याओं का निस्तारण कर रहे हैं।
दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर के लिए 32 गांवों के 5286 किसानों की 292 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया गया है। इसके अलावा 23 हेक्टेयर सरकारी जमीन का अधिग्रहण भी हुआ है। किसानों को जमीन का 824 करोड़ रुपये से ज्यादा का मुआवजा दिया जाना है। इसमें से करीब 300 से ज्यादा किसानों ने अभी तक मुआवजा ले लिया है। इस अधिग्रहण में अब नया मामला चकबंदी की समस्या के रूप में सामने आया है। कॉरिडोर के लिए टीकरी और गांगनौली के जिन किसानों की जमीन को अधिग्रहित किया गया है, अभिलेखों में किसी अन्य के नाम दर्ज है। चकबंदी के कारण अभी तक नाम नहीं बदले गए हैं। इस तरह के विवादों को अधिकारी जल्द से जल्द निपटाने में लगे हैं।
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मवीकलां का जद्दोजहद के बाद 10 हजार रुपये वर्ग मीटर मुआवजा तय
इकोनॉमिक कॉरिडोर के लिए अधिग्रहित की गई जमीन का सभी गांवों में मुआवजा तय हो गया था। मगर, मवीकलां गांव का मुआवजा तय नहीं हो सका था। इसे लेकर काफी जद्दोजहद चल रही थी। किसान मुआवजा बढ़वाने की जुगत लगा रहे थे। अब मवीकलां गांव का भी मुआवजा तय कर दिया गया है। दस हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर के आधार पर मुआवजा तय किया गया है। गांव के करीब 30 किसानों की 50 बीघा जमीन अधिग्रहित की गई हैं।
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गांगनौली व टीकरी जैसे गांव है, जहां चकबंदी के कारण मुआवजे को लेकर कुछ आपत्ति है। इन आपत्तियाें को दूर किया जा रहा है, ताकि जल्द मुआवजा दिया जा सके। मवीकलां गांव का मुआवजा भी निर्धारित कर दिया गया है। - अमित कुमार, एडीएम
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