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जानलेवा ग्लैंडर्स की पुष्टि, मारी जाएगी ‘धन्नो’
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
Updated Sat, 25 Jun 2016 12:02 AM IST
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ग्लैंडर्स बीमारी से पीड़ित घोड़ी।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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घोड़ों और खच्चरों में बेहद तेजी से फैलने वाली ग्लैंडर्स बीमारी का केस सामने आने से सनसनी फैल गई। पशु चिकित्सा विभाग ने सैंपल लेकर जांच के लिए राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान हिसार भेजा। सैंपल पॉजेटिव पाए जाने पर पशु निदेशालय ने घोड़ी (धन्नो) को मारने के निर्देश दिए हैं। पशु चिकित्सा विभाग शनिवार को घोड़ी मालिक से सहमति लेकर इसे मारने का काम करेगा।
एक अश्व से दूसरे अश्व के बीच ग्लैंडर्स तेजी से फैलने वाली बीमारी है। अभी तक प्रदेश में इस बीमारी के इक्का-दुक्का केस ही आमने आए हैं। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ राजपाल सिंह ने बताया कि 18 जून को फखरपुर के ईंट भट्ठेे से शामली जनपद के गांव सिलावर निवासी महमूद की घोड़ी में इस बीमारी के लक्षण मिलने की सूचना मिली थी।
विभाग की टीम ने सैंपल जांच के लिए राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र हिसार भेजें। शुक्रवार को ग्लैंडर्स नामक बीमारी की पुष्टि हो गई। हिसार के पशु चिकित्सकों ने इसके विषय में रिपोर्ट निदेशालय पशु पालन को दी। विभाग ने इस बीमारी के वर्ष 2009 के एक्ट का हवाला देते हुए घोड़ी को मारने के निर्देश दिए हैं।
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सीवीओ डॉ राजपाल सिंह ने बताया कि डीएम हृदय शंकर तिवारी को मामले से अवगत करा दिया गया है। घोड़ी के मालिक से मामले में सहमति लेकर इसे शनिवार को मार दिया जाएगा। इसके बाद घोड़ी के शव को दफनाया जाएगा, ताकि बीमारी अन्य पशुओं में न फैल सकें।
हिसार भेजे गए 55 सैंपल
बागपत। फखरपुर गांव के ईंट भट्टे पर घोड़ी में ग्लैंडर्स नामक बीमारी के लक्षण मिलने पर जिले के ईंट भट्ठों से 55 अन्य घोड़े और घोड़ियों के सैंपल लेकर हिसार भेजे गए हैं। इनकी रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
चार सौ से अधिक भट्टे, फैल सकती है बीमारी
बागपत। ग्लैंडर्स घोड़ों और खच्चरों में पाई जाने वाली बीमारी है। जनपद में 400 से अधिक ईंट भट्ठे हैं। इन पर बाहर के जिलों के परिवार अपने खच्चरों और घोड़ों के साथ आते हैं। इससे यहां बीमारी फैलने का अधिक खतरा है।
ग्लैंडर्स के लक्षण
घोड़े की नाक बहने लगती है।
घोड़ों को सांस लेने में दिक्कत होती है।
उनके आसपास का तापमान बढ़ जाता है।
उस दायरे में रहे लोगों को भी सांस लेने में परेशानी होने लगती है।
बागपत कंट्रोल एरिया किया घोषित
घोड़ी में ग्लैंडर्स नामक बीमारी का केस सामने आने के बाद जिले को कंट्रोल एरिया घोषित कर दिया गया है। पशु चिकित्सा विभाग की फाइल पर डीएम हृदय शंकर तिवारी ने अपनी मुहर लगा दी। अब बाहर के घोड़े-घोड़ियों के लिए जिले में नो एंट्री रहेगी। एसपी को पत्र लिखा गया है।
सीवीओ डॉ राजपाल सिंह ने बीमारी की पुष्टि होने के बाद शुक्रवार रात डीएम हृदय शंकर तिवारी से मुलाकात की। उन्होंने जनपद को कंट्रोल एरिया घोषित करने की मांग रखी। डीएम ने पशु चिकित्सा विभाग की फाइल पर अपनी अनुमति दे दी है। अब बागपत कंट्रोल एरिया होगा।
यहां बाहर के जनपदों के अलावा हरियाणा से घोड़े-घोड़ियों की नो एंट्री रहेगी। खच्चर और गधे भी इसी श्रेणी में शामिल रहेेंगे। जनपद से यह जानवर बाहर नहीं भेजा जा सकेगा। पशु मेलों में भी प्रतिबंध जारी रहेगा।
पशु चिकित्सा विभाग की ओर से जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी, एसपी पूनम, तीनों तहसील के एसडीएम और सीओ को इस बाबत पत्र जारी कर दिया है। सीवीओ ने बताया कि जिस क्षेत्र में यह बीमारी सामने आई है, उसके पांच किमी के एरिया में सौ फीसदी सैंपलिंग की जाएगी। इसके अलावा अन्य क्षेत्रों में 50 फीसदी सैंपलिंग होगी।
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एक अश्व से दूसरे अश्व के बीच ग्लैंडर्स तेजी से फैलने वाली बीमारी है। अभी तक प्रदेश में इस बीमारी के इक्का-दुक्का केस ही आमने आए हैं। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ राजपाल सिंह ने बताया कि 18 जून को फखरपुर के ईंट भट्ठेे से शामली जनपद के गांव सिलावर निवासी महमूद की घोड़ी में इस बीमारी के लक्षण मिलने की सूचना मिली थी।
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विभाग की टीम ने सैंपल जांच के लिए राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र हिसार भेजें। शुक्रवार को ग्लैंडर्स नामक बीमारी की पुष्टि हो गई। हिसार के पशु चिकित्सकों ने इसके विषय में रिपोर्ट निदेशालय पशु पालन को दी। विभाग ने इस बीमारी के वर्ष 2009 के एक्ट का हवाला देते हुए घोड़ी को मारने के निर्देश दिए हैं।
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सीवीओ डॉ राजपाल सिंह ने बताया कि डीएम हृदय शंकर तिवारी को मामले से अवगत करा दिया गया है। घोड़ी के मालिक से मामले में सहमति लेकर इसे शनिवार को मार दिया जाएगा। इसके बाद घोड़ी के शव को दफनाया जाएगा, ताकि बीमारी अन्य पशुओं में न फैल सकें।
हिसार भेजे गए 55 सैंपल
बागपत। फखरपुर गांव के ईंट भट्टे पर घोड़ी में ग्लैंडर्स नामक बीमारी के लक्षण मिलने पर जिले के ईंट भट्ठों से 55 अन्य घोड़े और घोड़ियों के सैंपल लेकर हिसार भेजे गए हैं। इनकी रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
चार सौ से अधिक भट्टे, फैल सकती है बीमारी
बागपत। ग्लैंडर्स घोड़ों और खच्चरों में पाई जाने वाली बीमारी है। जनपद में 400 से अधिक ईंट भट्ठे हैं। इन पर बाहर के जिलों के परिवार अपने खच्चरों और घोड़ों के साथ आते हैं। इससे यहां बीमारी फैलने का अधिक खतरा है।
ग्लैंडर्स के लक्षण
घोड़े की नाक बहने लगती है।
घोड़ों को सांस लेने में दिक्कत होती है।
उनके आसपास का तापमान बढ़ जाता है।
उस दायरे में रहे लोगों को भी सांस लेने में परेशानी होने लगती है।
बागपत कंट्रोल एरिया किया घोषित
घोड़ी में ग्लैंडर्स नामक बीमारी का केस सामने आने के बाद जिले को कंट्रोल एरिया घोषित कर दिया गया है। पशु चिकित्सा विभाग की फाइल पर डीएम हृदय शंकर तिवारी ने अपनी मुहर लगा दी। अब बाहर के घोड़े-घोड़ियों के लिए जिले में नो एंट्री रहेगी। एसपी को पत्र लिखा गया है।
सीवीओ डॉ राजपाल सिंह ने बीमारी की पुष्टि होने के बाद शुक्रवार रात डीएम हृदय शंकर तिवारी से मुलाकात की। उन्होंने जनपद को कंट्रोल एरिया घोषित करने की मांग रखी। डीएम ने पशु चिकित्सा विभाग की फाइल पर अपनी अनुमति दे दी है। अब बागपत कंट्रोल एरिया होगा।
यहां बाहर के जनपदों के अलावा हरियाणा से घोड़े-घोड़ियों की नो एंट्री रहेगी। खच्चर और गधे भी इसी श्रेणी में शामिल रहेेंगे। जनपद से यह जानवर बाहर नहीं भेजा जा सकेगा। पशु मेलों में भी प्रतिबंध जारी रहेगा।
पशु चिकित्सा विभाग की ओर से जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी, एसपी पूनम, तीनों तहसील के एसडीएम और सीओ को इस बाबत पत्र जारी कर दिया है। सीवीओ ने बताया कि जिस क्षेत्र में यह बीमारी सामने आई है, उसके पांच किमी के एरिया में सौ फीसदी सैंपलिंग की जाएगी। इसके अलावा अन्य क्षेत्रों में 50 फीसदी सैंपलिंग होगी।