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Baghpat News: संग्राम नहीं समझौता करो, एकता के सूत्र में बंधो
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ऋषभदेव सभागार में आयोजित धर्मसभा मेें बोले जैनमुनि आचार्य विशुद्ध सागर महाराज
फोटो संख्या-1
बड़ौत। जैनाचार्य विशुद्धसागर ने कहा कि बुद्धिमान बनना है तो गुरु चरणों में आना पड़ेगा। ज्ञानियों, संयमियों के संसर्ग सानिध्य से ही हमें ज्ञान आचरण की प्राप्ति सम्भव है। इस जगत में अनेकानेक जीव हैं, सभी के अनेक प्रकार के विचार हैं और स्व-स्व विचारों के अनुसार व्यक्ति प्रवृत्ति करता है।
जैनमुनि बृहस्पतिवार को ऋषभदेव सभागार में आयोजित धर्मसभा मेें बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि जीव जैसा विचार करेगा, भाव करेगा, वैसा ही उसका कार्य होगा। संसार में अच्छे निमित्त भी हैं और बुरे निमित्त भी हैं, हम स्वयं ही निमित्तों से प्रभावित होते हैं। एक ही घर में दो सगे भाई रहते हैं, स्थान एक है, पर दोनों की अनुभूति भिन्न-भिन्न है। एक भाई गोरा है, दूसरा काला है। एक भाई स्वस्थ है, दूसरा भाई बीमार है। एक भाई बुद्धिमान है, दूसरा भाई मंद बुद्धि है। स्थान एक होने पर भी दोनों का भाग्य भिन्न-भिन्न हैं। एक वह इंसान है, जिसके पास खाने को रोटी नहीं और एक वह मनुष्य है, जो श्वान को बिस्किट खिला रहा है। सब पाप-पुण्य का ही प्रभाव है। परस्पर में झगड़ा, कलह का मूल कारण अहंकार है। अहंकारी अपने अहंकारी की पुष्टि के लिए कुछ भी अनर्थ करने खड़ा हो जाता है। दुनिया में जितने भी अनर्थ होते हैं, वह मात्र अहं (मान) पुष्टि के कारण होते हैं। अहंकार छोड़ो, नम्र बनो। संग्राम नहीं, समझौता करो। सभा का संचालन पंडित श्रेयांस जैन ने किया। सभा में प्रवीण जैन, दिनेश जैन, विनोद जैन, राकेश जैन, मनोज जैन, अशोक जैन, सुनील जैन, अतुल जैन शामिल रहे।
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फोटो संख्या-1
बड़ौत। जैनाचार्य विशुद्धसागर ने कहा कि बुद्धिमान बनना है तो गुरु चरणों में आना पड़ेगा। ज्ञानियों, संयमियों के संसर्ग सानिध्य से ही हमें ज्ञान आचरण की प्राप्ति सम्भव है। इस जगत में अनेकानेक जीव हैं, सभी के अनेक प्रकार के विचार हैं और स्व-स्व विचारों के अनुसार व्यक्ति प्रवृत्ति करता है।
जैनमुनि बृहस्पतिवार को ऋषभदेव सभागार में आयोजित धर्मसभा मेें बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि जीव जैसा विचार करेगा, भाव करेगा, वैसा ही उसका कार्य होगा। संसार में अच्छे निमित्त भी हैं और बुरे निमित्त भी हैं, हम स्वयं ही निमित्तों से प्रभावित होते हैं। एक ही घर में दो सगे भाई रहते हैं, स्थान एक है, पर दोनों की अनुभूति भिन्न-भिन्न है। एक भाई गोरा है, दूसरा काला है। एक भाई स्वस्थ है, दूसरा भाई बीमार है। एक भाई बुद्धिमान है, दूसरा भाई मंद बुद्धि है। स्थान एक होने पर भी दोनों का भाग्य भिन्न-भिन्न हैं। एक वह इंसान है, जिसके पास खाने को रोटी नहीं और एक वह मनुष्य है, जो श्वान को बिस्किट खिला रहा है। सब पाप-पुण्य का ही प्रभाव है। परस्पर में झगड़ा, कलह का मूल कारण अहंकार है। अहंकारी अपने अहंकारी की पुष्टि के लिए कुछ भी अनर्थ करने खड़ा हो जाता है। दुनिया में जितने भी अनर्थ होते हैं, वह मात्र अहं (मान) पुष्टि के कारण होते हैं। अहंकार छोड़ो, नम्र बनो। संग्राम नहीं, समझौता करो। सभा का संचालन पंडित श्रेयांस जैन ने किया। सभा में प्रवीण जैन, दिनेश जैन, विनोद जैन, राकेश जैन, मनोज जैन, अशोक जैन, सुनील जैन, अतुल जैन शामिल रहे।
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