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रियो में दम दिखाएगा मलकपुर का छोरा
ब्यूरो/ अमर उजाला, बागपत
Updated Sun, 07 Aug 2016 01:58 AM IST
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गांव में परिजनों के साथ पहलवान संदीप तोमर
- फोटो : अमर उजाला
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बागपत। अंतरराष्ट्रीय कुश्ती के अखाड़े में मलकपुर गांव किसी परिचय का मोहताज नहीं है। देश का नाम रोशन करने वाले सुभाष से लेकर रियो रवाना हुए संदीप तोमर तक। एक से बढ़कर एक दिलेर पहलवान। अकेला गांव ऐसा है, जिसके बाहुबली पहलवानों ने चार अर्जुन अवार्ड दिलाए हैं। हुक्के पर कुश्ती की बातें होती हैं। नई पीढ़ी पुराने खिलाड़ियों के विदेशी दौरों की बात सुनकर आगे बढ़ती है। मलकपुर की इसी धरती का बेटा संदीप तोमर रियो ओलंपिक के 57 केजी भार वर्ग में अपना रंग जमाने जा रहा है।
पिता बोले, संदीप पीछे नहीं हटेगा
मलकपुर के हरपाल सिंह किसान है। अर्जुन अवार्डी शोकेंद्र तोमर इनके पड़ोसी हैं। संदीप ने कुश्ती शुरू की तो हरपाल तोमर ने कहा शोकेंद्र की तरह नाम कमाकर आना। हरपाल सिंह बताते हैं संदीप ने अखाड़े में हमेशा ऊंचा नाम किया है। सैकड़ों ट्रॉफी जीती, पदकों की भरमार है। ओलंपिक किसी भी पहलवान के लिए सपना होता है। मां सुनीता, भाई राहुल तोमर और बहन काजल कहती है रियो में संदीप अपना रंग जमा देगा। वह बेहतर खेलेगा और दूसरे पहलवानों को दिखाएगा कि उसमें दम है।
संदीप ने यूं सीखी कुश्ती
रियो रवाना हुए संदीप ने पहले गांव में ही कुश्ती सीखी। इसके बाद वह छपरौली में खलीफा कृष्णपाल के अखाड़े में रहा। यहां कुश्ती की बारीकियां सीखने को मिली। इसके बाद नेवी में भर्ती हो गया। दिल्ली के अखाड़े में रहा। नेवी में भर्ती होने के बाद उसे रोहतक के मेहर सिंह अखाड़े में कुश्ती सीखी। इसके बाद संदीप ने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
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तोमर के हिस्से में 11 पदक
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युवा पहलवान के हिस्से में अब तक 11 पदक है। भाई राहुल तोमर बताते हैं रियो में पदक की उम्मीद है। परिवार से वह सोशल मीडिया के माध्यम से और फोन पर बात कर रहे हैं। संदीप अपनी तरफ से कोई कोर कसर बाकी नहीं रखेगा।
पिता बोले, संदीप पीछे नहीं हटेगा
मलकपुर के हरपाल सिंह किसान है। अर्जुन अवार्डी शोकेंद्र तोमर इनके पड़ोसी हैं। संदीप ने कुश्ती शुरू की तो हरपाल तोमर ने कहा शोकेंद्र की तरह नाम कमाकर आना। हरपाल सिंह बताते हैं संदीप ने अखाड़े में हमेशा ऊंचा नाम किया है। सैकड़ों ट्रॉफी जीती, पदकों की भरमार है। ओलंपिक किसी भी पहलवान के लिए सपना होता है। मां सुनीता, भाई राहुल तोमर और बहन काजल कहती है रियो में संदीप अपना रंग जमा देगा। वह बेहतर खेलेगा और दूसरे पहलवानों को दिखाएगा कि उसमें दम है।
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संदीप ने यूं सीखी कुश्ती
रियो रवाना हुए संदीप ने पहले गांव में ही कुश्ती सीखी। इसके बाद वह छपरौली में खलीफा कृष्णपाल के अखाड़े में रहा। यहां कुश्ती की बारीकियां सीखने को मिली। इसके बाद नेवी में भर्ती हो गया। दिल्ली के अखाड़े में रहा। नेवी में भर्ती होने के बाद उसे रोहतक के मेहर सिंह अखाड़े में कुश्ती सीखी। इसके बाद संदीप ने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युवा पहलवान के हिस्से में अब तक 11 पदक है। भाई राहुल तोमर बताते हैं रियो में पदक की उम्मीद है। परिवार से वह सोशल मीडिया के माध्यम से और फोन पर बात कर रहे हैं। संदीप अपनी तरफ से कोई कोर कसर बाकी नहीं रखेगा।