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Baghpat News: नदियों के संगम पर बसा बरनावा कई धर्मों की महत्ता समेटे हुए
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सुनील कुमार
बिनौली (बागपत)। कृष्णा व हिंडन नदी के संगम पर बसा करीब 12 हजार की आबादी वाला बरनावा गांव ऐतिहासिक धरोहर के साथ कई धर्म की महत्ता को समेटे हुए है। यहां महाभारत काल का लाक्षागृह मौजूद है तो हजारों वर्ष पुराना भव्य श्री चंद्रप्रभ अतिशय क्षेत्र मंदिर है। मुस्लिम समाज की करीब 13 मस्जिद है, जिनमें से एक प्राचीन मस्जिद में अलाउद्दीन चिस्ती की दरगाह भी मौजूद है। यहां हर कोई अपने त्योहार सौहार्द व उल्लास के साथ मनाता है और हर कोई भाईचारा कायम रखने के साथ ही इसके लिए अपील भी करता है।
वर्णावत से बरनावा बना
बरनावा में महाभारत कालीन अवशेष मौजूद हैं और इसे तब वर्णावत कहा जाता था। यहां महाभारत कालीन लाक्षागृह मौजूद है तो पांडवों को मारने के लिए बनाए गए लाख के महल व सुरंग के साक्ष्य भी यहां मिलते है। यहां वर्ष 1960 में ब्रह्मचारी कृष्ण दत्त महाराज ने गांधीधाम समिति बनाकर 5 यज्ञ शाला स्थापित कर चारों वेदों का यज्ञ करना प्रारंभ कर दिया। तभी से यहां रक्षाबंधन पर अखंड सामवेद पारण यज्ञ एवं होली से पूर्व चारों वेदों के पांच वेदियों पर प्रत्येक वर्ष यज्ञ होते चले आ रहे हैं। वर्ष 1977 में श्रीमाहानंद संस्कृत महाविद्यालय आरंभ हो गया। यहां कई राज्यों के विद्यार्थी पढ़ाई करने आते हैं।
हजारों साल पुराना श्री चंद्रप्रभ अतिशय क्षेत्र मंदिर मौजूद
गांव की आबादी के बीच हजारों वर्ष पुराना भव्य श्री चंद्रप्रभ अतिशय क्षेत्र मंदिर स्थित है। अपनी विशेषताओं के कारण यह मंदिर देशभर के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र है। मंदिर में हजारों वर्ष पुरानी भगवान चंद्रप्रभ की अतिशयकारी प्रतिमा विद्यमान है। इसको लेकर मान्यता है कि यह इस क्षेत्र पर खोदाई के दौरान निकली थी। यहां मध्यप्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, कर्नाटक, हरियाणा, आंध्रप्रदेश सहित विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु आकर भगवान के दर्शन करते हैं। इस समय मंदिर में 131 फुट ऊंचे शिखर का निर्माण कराया जा रहा है। इसके अलावा मंदिर परिसर में भव्य कमल मंदिर, भगवान चौबीस मंदिर, नेमिनाथ भगवान गिरनार पर्वत की रचना, मेरठ-बड़ौत मेरठ मार्ग स्थित पांडुक शिला व मंदिर की भव्यता के चलते आकर्षण का केंद्र है।
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शिव मंदिर व भूमिया देव भी प्रसिद्ध
गांव में 200 वर्ष पुराने अति प्राचीन श्री ठाकुरद्वारा शिव मंदिर व भूमिया देव मंदिर भी प्रसिद्ध है। बड़ौत-मेरठ मार्ग पर वर्ष 1980 में दूसरी पातशाही शाह सतनाम सिंह महाराज ने यहां डेरे सच्चा सौदा की स्थापना की। यहां पहले वर्ष में कई बार बड़े आयोजन होते थे, जिनमें देश विदेश से लोग आते हैं।
13 मस्जिद, अलाउद्दीन चिस्ती की दरगाह भी मौजूद
बरनावा में मुस्लिम समाज की 13 मस्जिद है। जिनमें प्राचीन जामा मस्जिद में अलाउद्दीन चिस्ती की दरगाह है। मस्जिद में विभिन्न प्रांतों से जमात भी आती है। यहां पर प्रतिवर्ष उर्स भी होता है। तीन इस्लामिया मदरसे हैं, जिनमे सबसे बड़ा मदरसा दाहा बरनावा मार्ग पर स्थित है।
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बिनौली (बागपत)। कृष्णा व हिंडन नदी के संगम पर बसा करीब 12 हजार की आबादी वाला बरनावा गांव ऐतिहासिक धरोहर के साथ कई धर्म की महत्ता को समेटे हुए है। यहां महाभारत काल का लाक्षागृह मौजूद है तो हजारों वर्ष पुराना भव्य श्री चंद्रप्रभ अतिशय क्षेत्र मंदिर है। मुस्लिम समाज की करीब 13 मस्जिद है, जिनमें से एक प्राचीन मस्जिद में अलाउद्दीन चिस्ती की दरगाह भी मौजूद है। यहां हर कोई अपने त्योहार सौहार्द व उल्लास के साथ मनाता है और हर कोई भाईचारा कायम रखने के साथ ही इसके लिए अपील भी करता है।
वर्णावत से बरनावा बना
बरनावा में महाभारत कालीन अवशेष मौजूद हैं और इसे तब वर्णावत कहा जाता था। यहां महाभारत कालीन लाक्षागृह मौजूद है तो पांडवों को मारने के लिए बनाए गए लाख के महल व सुरंग के साक्ष्य भी यहां मिलते है। यहां वर्ष 1960 में ब्रह्मचारी कृष्ण दत्त महाराज ने गांधीधाम समिति बनाकर 5 यज्ञ शाला स्थापित कर चारों वेदों का यज्ञ करना प्रारंभ कर दिया। तभी से यहां रक्षाबंधन पर अखंड सामवेद पारण यज्ञ एवं होली से पूर्व चारों वेदों के पांच वेदियों पर प्रत्येक वर्ष यज्ञ होते चले आ रहे हैं। वर्ष 1977 में श्रीमाहानंद संस्कृत महाविद्यालय आरंभ हो गया। यहां कई राज्यों के विद्यार्थी पढ़ाई करने आते हैं।
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हजारों साल पुराना श्री चंद्रप्रभ अतिशय क्षेत्र मंदिर मौजूद
गांव की आबादी के बीच हजारों वर्ष पुराना भव्य श्री चंद्रप्रभ अतिशय क्षेत्र मंदिर स्थित है। अपनी विशेषताओं के कारण यह मंदिर देशभर के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र है। मंदिर में हजारों वर्ष पुरानी भगवान चंद्रप्रभ की अतिशयकारी प्रतिमा विद्यमान है। इसको लेकर मान्यता है कि यह इस क्षेत्र पर खोदाई के दौरान निकली थी। यहां मध्यप्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, कर्नाटक, हरियाणा, आंध्रप्रदेश सहित विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु आकर भगवान के दर्शन करते हैं। इस समय मंदिर में 131 फुट ऊंचे शिखर का निर्माण कराया जा रहा है। इसके अलावा मंदिर परिसर में भव्य कमल मंदिर, भगवान चौबीस मंदिर, नेमिनाथ भगवान गिरनार पर्वत की रचना, मेरठ-बड़ौत मेरठ मार्ग स्थित पांडुक शिला व मंदिर की भव्यता के चलते आकर्षण का केंद्र है।
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शिव मंदिर व भूमिया देव भी प्रसिद्ध
गांव में 200 वर्ष पुराने अति प्राचीन श्री ठाकुरद्वारा शिव मंदिर व भूमिया देव मंदिर भी प्रसिद्ध है। बड़ौत-मेरठ मार्ग पर वर्ष 1980 में दूसरी पातशाही शाह सतनाम सिंह महाराज ने यहां डेरे सच्चा सौदा की स्थापना की। यहां पहले वर्ष में कई बार बड़े आयोजन होते थे, जिनमें देश विदेश से लोग आते हैं।
13 मस्जिद, अलाउद्दीन चिस्ती की दरगाह भी मौजूद
बरनावा में मुस्लिम समाज की 13 मस्जिद है। जिनमें प्राचीन जामा मस्जिद में अलाउद्दीन चिस्ती की दरगाह है। मस्जिद में विभिन्न प्रांतों से जमात भी आती है। यहां पर प्रतिवर्ष उर्स भी होता है। तीन इस्लामिया मदरसे हैं, जिनमे सबसे बड़ा मदरसा दाहा बरनावा मार्ग पर स्थित है।