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नदियों के किनारे कराई जाएगी बांस की खेती

Sun, 04 Aug 2019 12:09 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 04 Aug 2019 12:09 AM IST
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Bamboo farming will be done on the banks of rivers
नदियों के किनारे कराई जाएगी बांस की खेती
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बागपत। डीएम शकुंतला गौतम ने कहा किसानों की आय में वृद्धि के लिए फसल चक्र बदलना होगा। जिला स्तर पर लेमन ग्रास और बांस की खेती करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। मधुमक्खी पालन के लिए भी जागरूक करेंगे। किसानों का चयन किया जाएगा। खेती करने के फायदे बताएंगे। कृषि अपशिष्ट प्रबंधन पर भी ध्यान केंद्रित करेंगे।
कलक्ट्रेट सभागार में शनिवार को जैव ऊर्जा विकास बोर्ड के अधिकारियों के साथ बैठक की। इसमें किसानों की आय दोगुनी करने का भी मुद्दा रहा। डीएम ने बताया कि किसानों की आय में वृद्धि के लिए सरकार विभिन्न कार्य कर रही है। इसके चलते परंपरागत किसानों के लिए अन्य फसलों की बुवाई करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि लेमन ग्रास आय दोगुनी करने का मुख्य स्रोत है। इसके लिए किसानों को जागरूक किया जाएगा। इससे होने वाले फायदे बताएं जाएंगे। जिला स्तर पर दो किसान इसकी खेती शुरू कर दी है। बसौली गांव में ऋषिपाल और नरवेंद्र नाम के किसानों पहल की है। इसके अलावा हिंडन और कृष्णा नदी क्षेत्रों में बांस की खेती कराई जाएगी। इससे किसान अपनी आय को दोगुनी से भी अधिक कर सकते हैं। एक साल में 80 हजार से एक लाख रुपये तक की कमाएं कर पाएंगे। इससे नदी का पानी भी शुद्ध होगा और किसान की आय बढ़ेगी। सहजन की खेती के लिए भी जागरूकता लाई जा रही है। वहीं जैव ऊर्जा विकास बोर्ड की ओर से किसानों को फसलों के अवशेष को इस्तेमाल करने के लिए बताया जाएगा। डीएम ने कहा कि मधुमक्खी पालन के लिए भी प्रेरित करेंगे। सीडीओ पीसी जायसवाल, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट पुलकित गर्ग, नेडा के पीडी जावेद खान, उप कृषि निदेशक प्रशांत कुमार, जिला कृषि अधिकारी डॉ. सूर्यप्रताप सिंह, एलडीएम प्रदीप थोराट, उपायुक्त स्व रोजगार बीबी सिंह, जैव ऊर्जा के स्टेट कोआर्डिनेटर पीएस ओझा सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
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फसल अवशेषों से प्राप्त होती जैव ऊर्जा
जैव ऊर्जा के स्टेट कोआर्डिनेटर पीएस ओझा ने बताया कि कृषि अवशेषों को जला दिया जाता है। इससे पर्यावरण को प्रदूषित होता है ही, पोषक तत्वों का भी खत्म हो जाते हैं। धान का पुआ,ल गेहूं का भूसा, गन्ना का अवशेष, सरसों के डंठल, फसल की थ्रेसिंग के पश्चात बचा हुआ बायोमास एवं पेड़ों की छंटाई से प्राप्त बायोमास से जैव ऊर्जा प्राप्त किए जाने की व्यवस्था की जा चुकी है।
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फसल अवशेष जलाने से ये होता है नुकसान
- वातावरण में कार्बन डाई ऑक्साइड का अधिक उत्सर्जन
- नाइट्रोजन का नुकसान
- फास्फोरस का नुकसान
- पोटाश का नुकसान
- सल्फर का नुकसान
- स्मोग के दुष्प्रभाव
- मिट्टी के पोषक तत्वों एवं मित्र कीटों होते है खत्म
- कार्बन चक्र का ह्रास
मधुमक्खी पालन के लिए किया जाएगा जागरूक
जिला कृषि अधिकारी डॉ. सूर्यप्रताप सिंह ने बताया कि किसानों को मधुमक्खी पालन के लिए जागरूक किया जा रहा है। इसके लाभ बता रहे है। मधुमक्खी पालन के लिए 10-10 डिब्बे दिए जाएंगे। इसमें किसान 40 किलो तक शहद प्राप्त कर सकता है। इससे किसानों की आय दोगुनी होगी।
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