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जिपं सदस्यों को एक-एक करोड़ तक का ऑफर
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बागपत। जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए कल यानि शनिवार को नामांकन होंगे। तीन जुलाई को मतदान होगा। चुनाव की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, वैसे वैसे वोटों की कीमत भी बढ़ रही है। जिला पंचायत सदस्यों को लुभावने ऑफर दिए जा रहे हैं। भाजपा और विपक्ष के बीच 11 सदस्य अपने पाले में करने के लिए जोर आजमाइश जारी है। दोनों ही धड़े अपने साथ पर्याप्त समर्थन होने का दावा कर रहे हैं, लेकिन बाजी कौन जीतेगा, यह तीन जुलाई को ही पता चलेगा।
जिला पंचायत अध्यक्ष का पद इस बार अनुसूचित जाति की महिला के लिए आरक्षित है। जिला पंचायत की 20 वार्ड में इस वर्ग से वार्ड -13 से रालोद की ममता जयकिशोर और वार्ड-18 से सपा की बबली देवी चुनाव जीती थीं। भाजपा के पास अपना कोई प्रत्याशी भी नहीं था। बबली देवी ने सपा को झटका देकर भाजपा का दामन थाम लिया था। इसके बाद भाजपा के पास सदस्यों की संख्या पांच हो गई थी। बबली देवी के भाजपा में शामिल होने में पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष ओंकार यादव और सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष किरण पाल उर्फ बिल्लू प्रधान की भूमिका सामने आने पर पार्टी ने दोनों को छह वर्ष के लिए निष्कासित कर दिया था।
आंकड़ों में ममता जयकिशोर का पलड़ा भारी
रालोद के सात प्रत्याशी जिला पंचायत सदस्य पद का चुनाव जीते थे। इसके अलावा तीन सदस्य सपा के हैं। रालोद नेताओं का दावा है कि तीन और सदस्य उनके साथ हैं। भाजपा के पास पांच सदस्य हैं। छह सदस्य उन्हें और जुटाने होंगे। भाजपा नेताओं का दावा है कि सपा और रालोद के कुल सात सदस्य उनके संपर्क में हैं। कई जिला पंचायत सदस्यों को जिले से बाहर भेज दिया गया है। बताया जा रहा है कि राजस्थान के किसी शहर में उन्हें ठहराया गया है। उनके खाने-पीने और सैर सपाटे का खर्च भी प्रत्याशी उठा रहे हैं। सभी के फोन भी अपने कब्जे में ले लिए गए हैं। उन्हें हिदायत दी गई कि चुनाव तक अपने परिजनों से भी संपर्क न करें।
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तिथि घोषित न होने से प्रमुख पद के दावेदारों की हालत पतली
बागपत। ब्लॉक प्रमुख पद के चुनाव की तिथि अभी घोषित नहीं हुई है। ऐसे में प्रमुख पद के दावेदारों की हालत पतली होती जा रही है। दरअसल वोट के लिए उन्हें बीडीसी को एडवांस रकम देनी पड़ी। इसके बाद अपने संपर्क के बीडीसी को जिले से बाहर दूसरे राज्यों में भेज दिया गया। उनके रहने और खाने पीने का खर्च प्रमुख पद के दावेदार उठा रहे हैं। जो दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। चुनाव की तिथि घोषित न होने से दावेदारों पर अतिरिक्त भार पड़ रहा है। कई दावेदार इस बढ़ते खर्च की वजह से चुनाव से पीछे हटने का मन भी बना रहे हैं।
दोनों हाथ में लड्डू रखने वाले भी हैं
जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुख के चुनाव में कई सदस्य ऐसे भी हैं जो दोनों हाथ में लड्डू रखना चाहते हैं। अपनी वोट के बदले इन लोगों ने दोनों दावेदारों से एडवांस रकम ले ली है। जिससे दावेदारों की सांस भी अटकी है। वह चुनाव होने तक अपनी रकम वापस मांगने की स्थिति में भी नहीं हैं।
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जिला पंचायत अध्यक्ष का पद इस बार अनुसूचित जाति की महिला के लिए आरक्षित है। जिला पंचायत की 20 वार्ड में इस वर्ग से वार्ड -13 से रालोद की ममता जयकिशोर और वार्ड-18 से सपा की बबली देवी चुनाव जीती थीं। भाजपा के पास अपना कोई प्रत्याशी भी नहीं था। बबली देवी ने सपा को झटका देकर भाजपा का दामन थाम लिया था। इसके बाद भाजपा के पास सदस्यों की संख्या पांच हो गई थी। बबली देवी के भाजपा में शामिल होने में पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष ओंकार यादव और सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष किरण पाल उर्फ बिल्लू प्रधान की भूमिका सामने आने पर पार्टी ने दोनों को छह वर्ष के लिए निष्कासित कर दिया था।
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आंकड़ों में ममता जयकिशोर का पलड़ा भारी
रालोद के सात प्रत्याशी जिला पंचायत सदस्य पद का चुनाव जीते थे। इसके अलावा तीन सदस्य सपा के हैं। रालोद नेताओं का दावा है कि तीन और सदस्य उनके साथ हैं। भाजपा के पास पांच सदस्य हैं। छह सदस्य उन्हें और जुटाने होंगे। भाजपा नेताओं का दावा है कि सपा और रालोद के कुल सात सदस्य उनके संपर्क में हैं। कई जिला पंचायत सदस्यों को जिले से बाहर भेज दिया गया है। बताया जा रहा है कि राजस्थान के किसी शहर में उन्हें ठहराया गया है। उनके खाने-पीने और सैर सपाटे का खर्च भी प्रत्याशी उठा रहे हैं। सभी के फोन भी अपने कब्जे में ले लिए गए हैं। उन्हें हिदायत दी गई कि चुनाव तक अपने परिजनों से भी संपर्क न करें।
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तिथि घोषित न होने से प्रमुख पद के दावेदारों की हालत पतली
बागपत। ब्लॉक प्रमुख पद के चुनाव की तिथि अभी घोषित नहीं हुई है। ऐसे में प्रमुख पद के दावेदारों की हालत पतली होती जा रही है। दरअसल वोट के लिए उन्हें बीडीसी को एडवांस रकम देनी पड़ी। इसके बाद अपने संपर्क के बीडीसी को जिले से बाहर दूसरे राज्यों में भेज दिया गया। उनके रहने और खाने पीने का खर्च प्रमुख पद के दावेदार उठा रहे हैं। जो दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। चुनाव की तिथि घोषित न होने से दावेदारों पर अतिरिक्त भार पड़ रहा है। कई दावेदार इस बढ़ते खर्च की वजह से चुनाव से पीछे हटने का मन भी बना रहे हैं।
दोनों हाथ में लड्डू रखने वाले भी हैं
जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुख के चुनाव में कई सदस्य ऐसे भी हैं जो दोनों हाथ में लड्डू रखना चाहते हैं। अपनी वोट के बदले इन लोगों ने दोनों दावेदारों से एडवांस रकम ले ली है। जिससे दावेदारों की सांस भी अटकी है। वह चुनाव होने तक अपनी रकम वापस मांगने की स्थिति में भी नहीं हैं।