{"_id":"5a64e54c4f1c1b88268b5d94","slug":"antiquities-started-in-excavation","type":"story","status":"publish","title_hn":"उत्खनन में निकलने लगे पुरावशेष","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
उत्खनन में निकलने लगे पुरावशेष
ब्यूरो/अमर उजाला, बिनौली
Updated Mon, 22 Jan 2018 12:41 AM IST
विज्ञापन
लाक्षागृह टीले पर उत्खनन करती पुरातत्व विभाग की टीम।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भारतीय पुरातत्व संस्थान और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा बरनावा लाक्षा गृह पर कराए जा रहे उत्खनन के दौरान पुरावशेष निकलने शुरू हो गए हैं। छह दीवार मिलने के बाद वहां कुछ मृदभांड भी निकले हैं, इनको देखकर लोग अंदाजा लगा रहे हैं कि यहां प्राचीन भवन हो सकता है।
भारतीय पुरातत्व संस्थान लाल किला नई दिल्ली के डायरेक्टर डॉ. संजय मंजुल और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण उत्खनन शाखा द्वितीय की डायरेक्टर डॉ. अरविन मंजुल के निर्देशन में 10 जनवरी को लाक्षागृह पर उत्खनन शुरू किया।
खुदाई के प्रथम चरण में प्रतिदिन कुछ न कुछ पुरावशेष निकल रहे हैं। साफ-सफाई के दौरान टीले के अंदर छह दीवारों और उत्खनन के दौरान मृदभांड, दांत व एक हड्डी निकली है, जो इंसान की बताई जा रही है। दांतों को पशुओं के बताए जा रहे हैं।
विज्ञापन
लोगों का कहना है कि टीले के अंदर लाक्षा गृह दबा हो सकता है, जहां पांडवों को मारने के लिए कौरवों ने साजिश रची थी। रविवार को डॉ. संजय मंजुल और डॉ. अरविन मंजुल बरनावा पहुंचे और उन्होंने अभी तक निकले पुरावशेषों की जांच की। इसके अलावा उन्होंने सिनौली और चंदायन साइट का भी सर्वे किया। माना जा रहा है कि इन दोनों साइटों पर पहले की तरह उत्खनन शुरू हो सकता है।
विज्ञापन
भारतीय पुरातत्व संस्थान लाल किला नई दिल्ली के डायरेक्टर डॉ. संजय मंजुल और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण उत्खनन शाखा द्वितीय की डायरेक्टर डॉ. अरविन मंजुल के निर्देशन में 10 जनवरी को लाक्षागृह पर उत्खनन शुरू किया।
विज्ञापन
खुदाई के प्रथम चरण में प्रतिदिन कुछ न कुछ पुरावशेष निकल रहे हैं। साफ-सफाई के दौरान टीले के अंदर छह दीवारों और उत्खनन के दौरान मृदभांड, दांत व एक हड्डी निकली है, जो इंसान की बताई जा रही है। दांतों को पशुओं के बताए जा रहे हैं।
विज्ञापन
लोगों का कहना है कि टीले के अंदर लाक्षा गृह दबा हो सकता है, जहां पांडवों को मारने के लिए कौरवों ने साजिश रची थी। रविवार को डॉ. संजय मंजुल और डॉ. अरविन मंजुल बरनावा पहुंचे और उन्होंने अभी तक निकले पुरावशेषों की जांच की। इसके अलावा उन्होंने सिनौली और चंदायन साइट का भी सर्वे किया। माना जा रहा है कि इन दोनों साइटों पर पहले की तरह उत्खनन शुरू हो सकता है।