बागपत: रोशनी गंवाई, लेकिन हिम्मत नहीं, पैरा एथलीट अंकुर धामा को अब मिलेगा नेशनल अवॉर्ड
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जिंदगी में आने वाली परेशानियों के दौरान हिम्मत हारने वाले युवाओं के लिए अंकुर धामा किसी प्रेरणा से कम नहीं है। मुश्किल चाहे जितनी भी बड़ी हो, लेकिन मेहनत के सामने रास्ते निकलते चले जाते हैं। खेकड़ा के निवासी पैरा एथलीट अंकुर धामा इसका सबसे सशक्त उदाहरण हैं।
अर्जुन अवार्डी विजेता अंकुर धामा का चयन अब सामाजिक अधिकारिता मंत्रालय की ओर से नेशनल पुरस्कार के लिए हुआ है। तीन दिसंबर को उप राष्ट्रपति वैंकेया नायडू विज्ञान भवन में अंकुर धामा को यह पुरस्कार देंगे। देश में तीन लोगों का चयन किया गया है। पैरा खेलों में शानदार प्रदर्शन कर दिव्यांगों के लिए प्रेरणा बनने के चलते अंकुर का चयन किया गया है।
अंकुर ने जीता था छठा अर्जुन अवार्ड
अंकुर धामा ने बागपत जिले को छठा अर्जुन अवार्ड दिलाया था। सबसे पहले मलकपुर के नामचीन पहलवान सुभाष तोमर को साल 1987 में पहला अर्जुन अवार्ड मिला था। जौहड़ी के पिस्टल शूटर विवेक सिंह को साल 1999 में अर्जुन अवार्ड से नवाजा गया। मलकपुर गांव पहलवान शोकेंद्र तोमर ने दुनियाभर में बागपत का नाम रोशन किया।
साल 2003 में शोकेंद्र को अर्जुन अवार्ड, साल 2010 में मलकपुर के फ्री स्टाइल के पहलवान राजीव तोमर को अर्जुन अवार्ड दिए जाने से बागपत का नाम ऊंचा हुआ।
कुश्ती में पहलवान सुनील राणा ने भी जिले का नाम रोशन किया। दाहा गांव के पहलवान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने दांव-पेंच की धाक जमाई थी। जिसके चलते साल 2014 में उन्हें राष्ट्रपति ने अर्जुन अवार्ड से नवाजा। इसके बाद साल 2018 में पैरा एथलीट अंकुर धामा को अर्जुन अवार्ड से नवाजा गया था।
रोशनी गंवाई, लेकिन हिम्मत नहीं
बागपत। पैरा एथलीट अंकुर धामा ने नेशनल पुरस्कार जीतकर एक बार फिर खुद को साबित कर दिखाया। बचपन में ही आंखों की रोशनी गंवाने वाले अंकुर ने पैरालंपिक खेलों में भाग लिया। साल 2014 के एशियाई खेलों में दमदार खेलों का प्रदर्शन कर पदक जीते थे। अंकुर धामा के भाई गौरव धामा ने कामयाबी पर खुशी जताई है।