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अमर उजाला एक्सक्लूसिव: कंपनी पर मेहरबानी, पहले करोड़ों का भुगतान, फिर थमाया नोटिस

Tue, 27 Jun 2023 03:56 PM IST
Dimple Sirohi मुकेश पंवार, अमर उजाला, बागपत
मुकेश पंवार, अमर उजाला, बागपत Published by: Dimple Sirohi Updated Tue, 27 Jun 2023 03:56 PM IST
सार

बागपत जनपद को स्वच्छ शहर बनाने के नाम पर नगरपालिका प्रशासन का बड़ा खेल उजागर हुआ है। पोल खुली तो कार्रवाई के नाम पर मात्र कंपनी को नोटिस थमा दिया गया।

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Amar Ujala Exclusive: Courtesy the company, first paid crores, then served notice
बागपत में जलभराव - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

शहर को साफ-सुथरा व स्वच्छ बनाने का काम केवल कागजों में ही चल रहा है। नगरपालिका प्रशासन का ऐसा ही एक खेल उजागर हुआ है, जहां पर पालिका प्रशासन ने गाजियाबाद की एक कंपनी को साफ-सफाई के लिए पहले करोड़ों का भुगतान किया।

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अब मामला उजागर हुआ तो कार्रवाई के नाम पर मात्र कंपनी को नोटिस थमा दिया। यह हाल तब है, जब कंपनी के अधिकारियों ने हठधर्मिता दिखाते हुए सफाई कर्मचारियों का लाखों रुपये पीएफ रोक रखा है। लगातार शिकायतों के बावजूद कंपनी पर ठोस कार्रवाई नहीं होती दिखाई दे रही है।
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आपको बता दें कि नगर को साफ-सुथरा और स्वच्छ बनाने के लिए गत वर्ष नगरपालिका प्रशासन ने गाजियाबाद की एक कंपनी का टेंडर जारी किया था। टेंडर जारी होने के बाद कंपनी ने नगर मेें सफाई कर्मचारियों की फौज खड़ी कर दी। तकरीबन 306 कर्मचारियों को नगर की साफ-सफाई का जिम्मा सौंपा गया और उन्हें सफाई के लिए दो जेसीबी मशीन, दो बड़ी सवपिंग मशीन, दो लोडर, दो टाटा 407, 16 पिकअप गाडियां, पांच ई-रिक्शा, छह टैक्टर-ट्राली दी गईं।
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प्रतिदिन नगर की साफ-सफाई और नालों की सफाई दर्शाई गई, लेकिन इसके बावजूद नगर में साफ-सफाई व्यवस्था सबके सामने जग जाहिर है। पहली ही बारिश में पूरा शहर जलमग्न हो गया, वहीं अभी भी नेहरू रोड, बड़का रोड, बड़ौली रोड के अलावा अन्य मुख्य मार्गों पर पूरे दिन गंदगी के ढेर लगे रहते हैं। नालों में शिल्ट भरी पड़ी है। बावजूद इसके नगरपालिका प्रशासन हर माह कंपनी को कर्मचारियों के भुगतान के लिए तकरीबन 50 से 60 लाख रुपये देता है।

यानी सात महीनों में तकरीबन 3 करोड़ रुपयों का भुगतान कर दिया गया। इसके अलावा वाहनों में डीजल के नाम पर तकरीबन एक करोड़ से ज्यादा भुगतान हुआ। अब फिर इस बोर्ड बैठक मेंं अलग से 76 लाख रुपये का बजट केवल नालों की सफाई के लिए पास किया गया। फिर भी शहर में सफाई व्यवस्था पूरी तरह कुप्रबंधन का शिकार हो गई है। ऐसा लगता है कि शहर की सफाई व्यवस्था केवल कागजों में ही चल रही है।

हैरानी की बात तो यह है कि उक्त कंपनी ने करीब 30 लाख रुपये कर्मचारियों का पीएफ भी रोक रखा है। मामला उजागर हुआ तो लोगों ने डीएम से लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री तक नगर में साफ-सफाई की खराब व्यवस्था को लेकर शिकायत की। अब करोड़ों का भुगतान करने के बाद नगरपालिका प्रशासन ने कंपनी को नोटिस भेजा है।

जिस कंपनी को नगर में साफ-सफाई का जिम्मा दिया गया था, वह सही ढंग से काम नहीं कर रही है। लगातार शिकायतें प्राप्त हो रही हैं। वहीं उक्त कंपनी ने कर्मचारियों का लाखों का पीएफ भी रोक रखा है, इसलिए कंपनी को नोटिस जारी किया गया है।- अनुज कौशिक ईओ नगरपालिका बड़ौत।
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