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जातीय गणित जोड़कर प्रत्याशी उतारने की तैयारी में सभी पार्टियां
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- रालोद-सपा, भाजपा, बसपा सभी में चल रहा हर वर्गों व जातियों का गुणा भाग
- एक सीट पर उतारे गए प्रत्याशी से दूसरी सीट प्रभावित हो, इस पर भी चल रहा मंथन
- सभी पार्टियों के तीन दिन बाद प्रत्याशी घोषित होने की उम्मीद, अभी जोड़तोड़ जारी
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। विधानसभा का चुनावी रण तैयार हो चुका है। दो दिन बाद नामांकन के साथ जंग की शुरूआत हो जाएगी। मगर, अभी तक किसी भी प्रमुख दल ने अपने प्रत्याशी मैदान में नहीं उतारे है। इसका एक बड़ा कारण यह है कि सभी पार्टियां जातीय गणित जोड़कर प्रत्याशी उतारने की तैयारी कर रही है। इसके लिए सभी सीटों पर हर वर्ग और जातियों को देखकर गुणा भाग किया जा रहा है। तीन दिन बाद प्रत्याशी घोषित होने की उम्मीद है।
बागपत विधानसभा सीट पर सबसे ज्यादा मुस्लिम मतदाता है तो जाट मतदाता भी कम नहीं है। रालोद-सपा, भाजपा, बसपा सहित सभी पार्टियां ऐसे प्रत्याशी पर मंथन कर रही है, जो दोनों वर्गों का वोट हासिल कर सके। गुर्जर मतदाता भी इस सीट पर काफी है, इसलिए गुर्जर प्रत्याशी के नाम पर भी पार्टियां विचार कर रही है। बड़ौत विधानसभा सीट पर जहां सबसे ज्यादा जाट मतदाता है, वहीं मुस्लिम मतदाता भी काफी है। इस सीट पर अन्य जातियों के मतदाता भी चुनावी समीकरण बदलने के लिए काफी है। सभी जातियों के वोटरों को देखते हुए प्रत्याशियों के नाम पर मंथन चल रहा है। छपरौली सीट पर सबसे ज्यादा जाट वोटर है। रालोद-सपा व भाजपा का केवल जाट प्रत्याशी पर ही मंथन कर रही है। हालांकि बसपा जरूर अन्य पर मंथन कर रही है। पार्टी सूत्रों के अनुसार सभी पार्टियां अपने प्रत्याशी घोषित करने में आसपास सीट का गणित भी देख रही है।
बागपत विधानसभा सीट
मुस्लिम 73 हजार, जाट 45 हजार, दलित 29 हजार, यादव 24 हजार, गुर्जर 22 हजार, ब्राह्मण 20 हजार, त्यागी 13 हजार, ठाकुर 9 हजार
बड़ौत विधानसभा सीट
जाट 80 हजार, मुस्लिम 45 हजार, कश्यप 30 हजार, दलित 25 हजार, वैश्य 18 हजार, गुर्जर 18 हजार, राजपूत 12 हजार
छपरौली विधानसभा सीट
जाट 1 लाख 30 हजार, मुस्लिम 60 हजार, कश्यप 25 हजार, दलित 20 हजार, गुर्जर 15 हजार
नोट: यह जातिगत मतदाताओं के आंकड़े अनुमानित है।
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- एक सीट पर उतारे गए प्रत्याशी से दूसरी सीट प्रभावित हो, इस पर भी चल रहा मंथन
- सभी पार्टियों के तीन दिन बाद प्रत्याशी घोषित होने की उम्मीद, अभी जोड़तोड़ जारी
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। विधानसभा का चुनावी रण तैयार हो चुका है। दो दिन बाद नामांकन के साथ जंग की शुरूआत हो जाएगी। मगर, अभी तक किसी भी प्रमुख दल ने अपने प्रत्याशी मैदान में नहीं उतारे है। इसका एक बड़ा कारण यह है कि सभी पार्टियां जातीय गणित जोड़कर प्रत्याशी उतारने की तैयारी कर रही है। इसके लिए सभी सीटों पर हर वर्ग और जातियों को देखकर गुणा भाग किया जा रहा है। तीन दिन बाद प्रत्याशी घोषित होने की उम्मीद है।
बागपत विधानसभा सीट पर सबसे ज्यादा मुस्लिम मतदाता है तो जाट मतदाता भी कम नहीं है। रालोद-सपा, भाजपा, बसपा सहित सभी पार्टियां ऐसे प्रत्याशी पर मंथन कर रही है, जो दोनों वर्गों का वोट हासिल कर सके। गुर्जर मतदाता भी इस सीट पर काफी है, इसलिए गुर्जर प्रत्याशी के नाम पर भी पार्टियां विचार कर रही है। बड़ौत विधानसभा सीट पर जहां सबसे ज्यादा जाट मतदाता है, वहीं मुस्लिम मतदाता भी काफी है। इस सीट पर अन्य जातियों के मतदाता भी चुनावी समीकरण बदलने के लिए काफी है। सभी जातियों के वोटरों को देखते हुए प्रत्याशियों के नाम पर मंथन चल रहा है। छपरौली सीट पर सबसे ज्यादा जाट वोटर है। रालोद-सपा व भाजपा का केवल जाट प्रत्याशी पर ही मंथन कर रही है। हालांकि बसपा जरूर अन्य पर मंथन कर रही है। पार्टी सूत्रों के अनुसार सभी पार्टियां अपने प्रत्याशी घोषित करने में आसपास सीट का गणित भी देख रही है।
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बागपत विधानसभा सीट
मुस्लिम 73 हजार, जाट 45 हजार, दलित 29 हजार, यादव 24 हजार, गुर्जर 22 हजार, ब्राह्मण 20 हजार, त्यागी 13 हजार, ठाकुर 9 हजार
बड़ौत विधानसभा सीट
जाट 80 हजार, मुस्लिम 45 हजार, कश्यप 30 हजार, दलित 25 हजार, वैश्य 18 हजार, गुर्जर 18 हजार, राजपूत 12 हजार
छपरौली विधानसभा सीट
जाट 1 लाख 30 हजार, मुस्लिम 60 हजार, कश्यप 25 हजार, दलित 20 हजार, गुर्जर 15 हजार
नोट: यह जातिगत मतदाताओं के आंकड़े अनुमानित है।