दस साल बाद फिर दौड़ेंगी मेरठ से छपरौली तक बसें
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जून 2007 में राष्ट्रीयकृत मार्गों पर प्राइवेट बसों का संचालन रोकने के लिए हाईकोर्ट में रिट दाखिल की गई थी। हाईकोर्ट ने इन बसों का परमिट कैंसिल कर दिया था, जिस कारण बसों का संचालन बंद करना पड़ा था। टांडा से छपरौली, बड़ौत, बागपत से होते हुए मेरठ जाने वाली 72 बसों का संचालन बंद हो गया था। बस यूनियन के प्रधान नीरज चौधरी ने बताया कि बस मालिक कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे। पिछले दिनों शासन ने राष्ट्रीयकृत रूट पर बसों के संचालन को हरी झंडी दे दी है। इसके अलावा शुक्रवार को मेरठ में आयुक्त आलोक सिन्हा ने संभागीय परिवहन प्राधिकरण की बैठक लेकर इन बसों के संचालन संबंधी आदेश जारी किए। आदेश में वही परमिट धारक शामिल होंगे, जो 13 फरवरी 1986 से पहले बसों का संचालन करा रहे थे।
पांच अन्य बसों को नहीं मिली अनुमित
मोटर गाड़ी अधिनियम 1988 के अंतर्गत मेरठ से छपरौली टांडा मार्ग पर बसों के संचालन के लिए पांच नए आवेदन प्राप्त हुए, जिन्हें कमेटी ने स्वीकार नहीं किया है।
बड़ौत से मुरादनगर चल रही थी बसें
दस साल पहले राष्ट्रीकृत मार्ग से हटाए जाने से पहले यह बसें बड़ौत से मुरादनगर रूट पर चल रही थी। यूनियन के प्रधान नीरज चौधरी का कहना है कि अब यह बसें दोबारा इसी रूट पर लौट आएंगी। उन्होंने कहा कि मुरादनगर रूट पर भी बसों का इंतजाम रहेगा, यात्रियों को परेशानी नहीं होने दी जाएगी।