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Baghpat News: कांवड़ शिविर में महिलाओं के लिए बनेगा अलग पंडाल

Fri, 26 Jul 2024 04:24 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 26 Jul 2024 04:24 AM IST
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A separate pandal will be built for women in the Kanwar camp
बागपत। इस बार कांवड़ शिविरों में महिलाओं के लिए अलग से पंडाल बनाना होगा। महिला कांवड़ियों की सुरक्षा को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। शिविर के पास महिला पुलिस कर्मियों की भी ड्यूटी लगाई जाएगी। वहीं मंदिरों व कांवड़ मार्गों पर भी सीसीटीवी कैमरे लगाकर निगरानी रखी जाएगी।
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कांवड़ शिविर में इस बार बदलाव किया गया है। अभी तक शिविरों में महिला व पुरुष के लिए एक ही पंडाल बनाया जाता था। मगर इस बार कांवड़ लाकर शिविर में रुकने वाली महिलाओं के लिए अलग पंडाल बनाया जाएगा। डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह ने सभी जोनल व सेक्टर मजिस्ट्रेट को इसके लिए आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि शिविर में महिलाओं के रुकने की अलग व्यवस्था की जाए। साथ ही कांवड़ मार्गों पर कांवड़ियों की सुरक्षा के लिए निगरानी रखने को मंदिर व मार्गों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं ताकि वहां की गतिविधियों का पता चल सके।
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17 घंटे 40 मिनट में हरिद्वार से लाया जल, ग्रामीणों ने स्वागत किया
दाहा। दोघट कस्बा निवासी सूरज ने बताया कि वह हरिद्वार से गंगा जल लेकर 17 घंटे 40 मिनट में प्राचीन बाड़े वाले शिव मंदिर दोघट पर पहुंचा। इसके बाद भगवान शिव का जलाभिषेक किया। सूरज ने बताया कि कांवड़ लाने के लिए उसने छह महीनों से प्रतिदिन दौड़ कर अभ्यास किया था। मैं रास्ते में कहीं नहीं रुका और हरिद्वार से चलकर मंदिर पर पहुंचकर जल चढ़ाया है। मंदिर में कस्बावासियों ने युवक का फूल माला पहनाकर स्वागत किया। साथ ही सम्मान प्रतीक चिह्न देकर सम्मानित किया। स्वागत करने वालों में बृजेश पंवार, रामभरोसे लाल, किरणपाल, विकास, राहुल, मनोज, मोहित, अंकुश, मिंटू, आकाश, टिंकू, सचिन मौजूद रहे।
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दादी को कांवड़ में बैठाकर शिवालय की तरफ बढ़ रहे पोते
बागपत। हरियाणा के बहादुरगढ़ के रहने वाले विशाल व जतिन ने बताया कि वह पिछले नौ साल से कांवड़ लेकर आ रहे हैं। इस बार उनकी दादी राजबाला ने हरिद्वार से कांवड़ लाने की इच्छा जताई। इसके बाद उन्होंने दादी को कांवड़ में बैठाकर लाने का मन बनाया। वह दादी को हरिद्वार लेकर गए और पहले हरिद्वार में घुमाया। गंगा में स्नान कराने के बाद एक तरफ दादी को बैठाया और दूसरी तरफ जल रखकर हरिद्वार से कांवड़ लेकर चले और अब शिवालय की तरफ बढ़ते हुए गौरीपुर पहुंचे।
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