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Baghpat News: महाभारत कालीन लाक्षागृह को वक्फ की संपत्ति बताकर कोर्ट में डाला था केस
Fri, 04 Apr 2025 12:17 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत
संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत
Updated Fri, 04 Apr 2025 12:17 AM IST
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वक्फ बोर्ड की खबर से संबंधित फोटो। बरनावा में स्थित लाक्षाग्रह की भूमि पर गुंबद
बागपत। वक्फ संशोधन विधेयक लोकसभा में पास होने के साथ ही बरनावा का महाभारत कालीन लाक्षागृह भी चर्चा में आ गया। जिस प्राचीन टीले पर लाक्षागृह है, उसको वक्फ की संपत्ति बताते हुए ही मुस्लिम पक्ष ने कोर्ट में केस डाला था। हालांकि पिछले साल सिविल जज जूनियर डिवीजन प्रथम ने मुस्लिम पक्ष के केस को खारिज कर दिया था।
बरनावा के रहने वाले मुकीम खान ने वर्ष 1970 में मेरठ की अदालत में वाद दायर किया था। इसमें लाक्षागृह गुरुकुल के संस्थापक ब्रह्मचारी कृष्णदत्त महाराज को प्रतिवादी बनाया गया था। इसमें मुकीम खान की तरफ से दावा किया गया था कि बरनावा में प्राचीन टीले पर खसरा संख्या 3377 की 36 बीघा 6 बिस्से 8 बिस्वांसी जमीन है।
इस पर करीब 600 साल पहले हजरत शेख बदरूद्दीन ने इबादत की और वहीं दफन हो गए। उनके दफन होने के बाद सैंकड़ों वर्ष से लोगों को मरने पर यहां दफन करना शुरू कर दिया गया और यहां कब्रिस्तान में हजारों कब्र मौजूद हैं। वह कब्रिस्तान टीला दरगाह मकदूर शाह विलायत साहब के नाम से मशहूर है और वह इसके मुतवल्ली हैं। यह भी दावा किया गया कि सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड में वह जमीन बतौर वक्फ दर्ज है।
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इसमें मुकीम खान और कृष्णदत्त महाराज दोनों का निधन हो चुका है। वहीं वर्ष 1997 में बागपत जिला बनने पर यह मामला मेरठ से यहां आने पर सिविल जज जूनियर डिवीजन प्रथम के न्यायालय में चल रहा था। इसमें एक पक्ष से अय्यूब, मुन्ना समेत अन्य और दूसरे पक्ष से गांधी धाम समिति के प्रबंधक राजपाल त्यागी, पैरोकार विजयपाल कश्यप ने वकीलों के माध्यम से कोर्ट में अपने-अपने साक्ष्य प्रस्तुत किए थे।
इसमें न्यायाधीश शिवम द्विवेदी ने मुस्लिम पक्ष की याचिका को 6 फरवरी 2024 को खारिज किया था। इसके साथ ही वहां महाभारत कालीन लाक्षागृह और शिव मंदिर मानते हुए जमीन पर हिंदुओं को मालिकाना हक दिया। इसके बाद मुस्लिम पक्ष ने अपील दायर की और यह मामला अब अपर जिला एवं सत्र न्यायालय में चल रहा है। इस मामला चलते हुए 55 साल हो गए।
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बरनावा के रहने वाले मुकीम खान ने वर्ष 1970 में मेरठ की अदालत में वाद दायर किया था। इसमें लाक्षागृह गुरुकुल के संस्थापक ब्रह्मचारी कृष्णदत्त महाराज को प्रतिवादी बनाया गया था। इसमें मुकीम खान की तरफ से दावा किया गया था कि बरनावा में प्राचीन टीले पर खसरा संख्या 3377 की 36 बीघा 6 बिस्से 8 बिस्वांसी जमीन है।
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इस पर करीब 600 साल पहले हजरत शेख बदरूद्दीन ने इबादत की और वहीं दफन हो गए। उनके दफन होने के बाद सैंकड़ों वर्ष से लोगों को मरने पर यहां दफन करना शुरू कर दिया गया और यहां कब्रिस्तान में हजारों कब्र मौजूद हैं। वह कब्रिस्तान टीला दरगाह मकदूर शाह विलायत साहब के नाम से मशहूर है और वह इसके मुतवल्ली हैं। यह भी दावा किया गया कि सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड में वह जमीन बतौर वक्फ दर्ज है।
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इसमें मुकीम खान और कृष्णदत्त महाराज दोनों का निधन हो चुका है। वहीं वर्ष 1997 में बागपत जिला बनने पर यह मामला मेरठ से यहां आने पर सिविल जज जूनियर डिवीजन प्रथम के न्यायालय में चल रहा था। इसमें एक पक्ष से अय्यूब, मुन्ना समेत अन्य और दूसरे पक्ष से गांधी धाम समिति के प्रबंधक राजपाल त्यागी, पैरोकार विजयपाल कश्यप ने वकीलों के माध्यम से कोर्ट में अपने-अपने साक्ष्य प्रस्तुत किए थे।
इसमें न्यायाधीश शिवम द्विवेदी ने मुस्लिम पक्ष की याचिका को 6 फरवरी 2024 को खारिज किया था। इसके साथ ही वहां महाभारत कालीन लाक्षागृह और शिव मंदिर मानते हुए जमीन पर हिंदुओं को मालिकाना हक दिया। इसके बाद मुस्लिम पक्ष ने अपील दायर की और यह मामला अब अपर जिला एवं सत्र न्यायालय में चल रहा है। इस मामला चलते हुए 55 साल हो गए।