{"_id":"51-58834","slug":"Baghpat-58834-51","type":"story","status":"publish","title_hn":"करीब से देखी प्रलय की विभीषिका ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
करीब से देखी प्रलय की विभीषिका
Baghpat
Updated Fri, 21 Jun 2013 05:30 AM IST
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बड़ौत। केदारनाथ-बदरीनाथ की यात्रा करने गया एक परिवार मौत के मुंह से निकाल किसी तरह वापस पहुंचा लेकिन अब भी उनके चेहरे पर वह उस मंजर का नजारा साफ दिखाई दे रहा है।
बड़ौत निवासी विनोद शर्मा, उनकी पत्नी सुषपा शर्मा, जीजी मांगेराम, बहन प्रेमलता, जय रोशन 15 जून को बड़ौत से चार धाम की यात्रा के लिए चले थे। उन्होंने ऋषिकेश पहुंचकर 16 की सुबह बदरीनाथ, केदारनाथ के लिए बस किराए पर की। जब वे चमोली के नजदीक पहुंचे तो उन्हें पता चला कि वहां पुल टूट गया है और केदारनाथ में बादल फट गया है तो वे श्रीनगर रुक गए। पूरी रात तेज बारिश होती रही। 17 जून की सुबह वे श्रीनगर से बदरीनाथ के लिए चले तो बीच में ही रुद्रप्रयाग के पास पहाड़ टूटकर गिरने लगे और उनके सामने मंदाकिनी नदी उफान पर थी तथा उनमें बसें, कारें बह रही थीं। उन्होंने बताया कि रुद्रप्रयाग के पास उनके सामने ही सड़क 25 मीटर नीचे खिसक गई और पानी में प्रलय का नजारा देख उनकी रूह कांपने लगी। चालक ने किसी तरह बस को वापस मोड़ा और बच-बचकर वे किसी तरह 19 जून को वापस ऋषिकेश पहुंचे और उन्हें कुछ राहत मिलीं। 19 जून को ही वे वापस बड़ौत लौट आए।
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बड़ौत निवासी विनोद शर्मा, उनकी पत्नी सुषपा शर्मा, जीजी मांगेराम, बहन प्रेमलता, जय रोशन 15 जून को बड़ौत से चार धाम की यात्रा के लिए चले थे। उन्होंने ऋषिकेश पहुंचकर 16 की सुबह बदरीनाथ, केदारनाथ के लिए बस किराए पर की। जब वे चमोली के नजदीक पहुंचे तो उन्हें पता चला कि वहां पुल टूट गया है और केदारनाथ में बादल फट गया है तो वे श्रीनगर रुक गए। पूरी रात तेज बारिश होती रही। 17 जून की सुबह वे श्रीनगर से बदरीनाथ के लिए चले तो बीच में ही रुद्रप्रयाग के पास पहाड़ टूटकर गिरने लगे और उनके सामने मंदाकिनी नदी उफान पर थी तथा उनमें बसें, कारें बह रही थीं। उन्होंने बताया कि रुद्रप्रयाग के पास उनके सामने ही सड़क 25 मीटर नीचे खिसक गई और पानी में प्रलय का नजारा देख उनकी रूह कांपने लगी। चालक ने किसी तरह बस को वापस मोड़ा और बच-बचकर वे किसी तरह 19 जून को वापस ऋषिकेश पहुंचे और उन्हें कुछ राहत मिलीं। 19 जून को ही वे वापस बड़ौत लौट आए।
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