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तीर्थकर आदिनाथ भगवान की बरात निकाली
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बागपत। पंचकल्याणक समारोह में सोमवार को तीर्थंकर आदिनाथ भगवान की बरात निकाली गई। विधि विधान से शादी कराई गई। श्रद्धालुओं को उनके जीवन की विशेषताएं बताई गई। कार्यक्रम के दौरान जैनाचार्य ज्ञान सागर महाराज ने प्रवचन किए।
जैन विद्वान डॉ. श्रेयांस कुमार जैन, जय निशांत शास्त्री टीकम गढ़, पंडित हंसराज जैन के निर्देशन में नित्य नियम की पूजा की। इसके बाद तीर्थंकर भगवान आदिनाथ की बरात निकाली। विद्वानों ने बताया कि आदिनाथ ने अपनी प्रजा को धर्म, कर्म, कृषि के बारे में शिक्षा दी। अपनी रक्षा के लिए तलवार के प्रयोग की शिक्षा दी। साथ ही हिदायत दी कि दीनहीन, बालक, स्त्रियों पर इस तलवार को प्रयोग नहीं करेंगे। कृषि कर्म के माध्यम से बताया कि कृषि करो या ऋषि बनो, लेकिन कृषि जरूर करने का उपदेश दिया। जीवन जीने की व्यवस्थित कला का उपदेश दिया। पांचवीं क्रिया कर्म के बारे में बताया। कर्म दो रूप में एक अक्षर ज्ञान एवं दूसरा अंक ज्ञान करने की शिक्षा दी। उन्होंने वस्त्र धोने, बाल काटने, लकड़ी की वस्तुएं बनाने की कलां की शिक्षा दी।
वहीं आचार्य ज्ञान सागर महाराज ने कहा जैन धर्म के अनुसार प्राणी में अनंत संभावनाएं हैं। प्रत्येक प्राणी में परमात्मा की शक्ति विद्यमान है। इस शक्ति की अभिव्यक्ति के लिए तप और साधना जरूरी है। जिस प्रकार स्वर्ण पाषाण में स्वर्ण छिपा होता है, तिल में तेल हैं, इसी प्रकार देह में आत्मा विद्यमान है। अनुष्ठान के द्वारा आत्मा कुंदन बन जाती है। जब व्यक्ति अनुष्ठान करता हैै उसकी चित्त व चेतना की अशुद्धि दूर हो जाती है। इसमें राकेश मित्तल, नागेंद्र गोयल, ईश्वर जैन, पंकज जैन, बिजेंद्र जैन, पीयूष जैन, अतुल जैन, राकेश मित्तल, प्रमोद जैन, अशोक शास्त्री, शिखर चंद जैन आदि रहे।
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जैन विद्वान डॉ. श्रेयांस कुमार जैन, जय निशांत शास्त्री टीकम गढ़, पंडित हंसराज जैन के निर्देशन में नित्य नियम की पूजा की। इसके बाद तीर्थंकर भगवान आदिनाथ की बरात निकाली। विद्वानों ने बताया कि आदिनाथ ने अपनी प्रजा को धर्म, कर्म, कृषि के बारे में शिक्षा दी। अपनी रक्षा के लिए तलवार के प्रयोग की शिक्षा दी। साथ ही हिदायत दी कि दीनहीन, बालक, स्त्रियों पर इस तलवार को प्रयोग नहीं करेंगे। कृषि कर्म के माध्यम से बताया कि कृषि करो या ऋषि बनो, लेकिन कृषि जरूर करने का उपदेश दिया। जीवन जीने की व्यवस्थित कला का उपदेश दिया। पांचवीं क्रिया कर्म के बारे में बताया। कर्म दो रूप में एक अक्षर ज्ञान एवं दूसरा अंक ज्ञान करने की शिक्षा दी। उन्होंने वस्त्र धोने, बाल काटने, लकड़ी की वस्तुएं बनाने की कलां की शिक्षा दी।
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वहीं आचार्य ज्ञान सागर महाराज ने कहा जैन धर्म के अनुसार प्राणी में अनंत संभावनाएं हैं। प्रत्येक प्राणी में परमात्मा की शक्ति विद्यमान है। इस शक्ति की अभिव्यक्ति के लिए तप और साधना जरूरी है। जिस प्रकार स्वर्ण पाषाण में स्वर्ण छिपा होता है, तिल में तेल हैं, इसी प्रकार देह में आत्मा विद्यमान है। अनुष्ठान के द्वारा आत्मा कुंदन बन जाती है। जब व्यक्ति अनुष्ठान करता हैै उसकी चित्त व चेतना की अशुद्धि दूर हो जाती है। इसमें राकेश मित्तल, नागेंद्र गोयल, ईश्वर जैन, पंकज जैन, बिजेंद्र जैन, पीयूष जैन, अतुल जैन, राकेश मित्तल, प्रमोद जैन, अशोक शास्त्री, शिखर चंद जैन आदि रहे।
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