फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Baghpat News ›   कारगिल में बागपत के बेटों ने लिखी बलिदानी गाथा

कारगिल में बागपत के बेटों ने लिखी बलिदानी गाथा

Thu, 26 Jul 2018 01:28 AM IST
Updated Thu, 26 Jul 2018 01:28 AM IST
विज्ञापन
कारगिल में बागपत के बेटों ने लिखी बलिदानी गाथा
बागपत। कारगिल में दुश्मन को धूल चटाने वाले देश के बेटों में बागपत के वीरों का भी बलिदान शामिल है। बलिदानी शौर्य गाथा के पन्नों पर बेटों की अमिट कहानी लिखी है। जिले के चार बेटों ने भी इस लड़ाई में भारत माता के लिए प्राण न्यौछावर कर दिए थे। साल बीतें, सरकारें आई और चली गईं। ऊंची चोटियों पर बलिदान देकर परिवारों को गौरवान्वित करने वाले बेटों की यादें आज भी लोगों के दिल में हैं। बहादुरी के किस्से हैं। बेटों को याद कर मां-बाप की आंखें नम हो जाती है। जिवाना गुलियान के जितेंद्र सिंह, बावली के अनिल कुमार, खेकड़ा के लांस नायक राजेंद्र सिंह और बिनौली गांव के हवलदार पदम सिंह का बलिदान अमर है।
विज्ञापन


खेकड़ा के राजेंद्र सिंह का अमर बलिदान
बागपत। कारगिल की चोटी पर खेकड़ा के लांस नायक राजेंद्र सिंह ने भी प्राण गवाएं थे। द्रास सेक्टर में आठ जुलाई 1999 को राजेंद्र सिंह शहीद हुए। उनके भाई का कहना है कि किससे क्या शिकायत करें, कोई समाधान नहीं निकलता। प्रशासन की ओर से जो सहयोग मिलना चाहिए था वो नहीं मिल रहा है। जमीन देने की घोषणा हुई थी उसका भी कुछ पता नहीं है। पाकिस्तान अब हमारे देश में ही आतंकवादी पैदा कर रहा है। समय रहते इसका काबू नहीं पाया तो देश को बड़ा नुकसान होगा।
विज्ञापन


बेटा खो दिया, किससे और क्या-क्या शिकायत करें
बागपत। बावली गांव के अनिल कुमार ने द्रास सेक्टर में आठ जुलाई 1999 को देश के लिए अमर बलिदान दिया। शहीद के पिता सुलतान सिंह कहते हैं बेटा चला गया। देश के लिए जान दी है, वह गौरवान्वित है। लेकिन जिस तरह सीमा पर आए दिन भारतीय सैनिक शहीद हो रहे हैं, वह बेहद दुखद है। जिस परिवार के बेटे शहीद होते हैं, उनका दर्द वही समझ सकते हैं। पाकिस्तान को उसकी ही भाषा में समझाना होगा, तभी वह अपनी हरकतों से बाज आएगा। कश्मीर में ऐसे नेताओं पर भी लगाम लगाई जानी चाहिए, जो देश के युवाओं को पत्थरबाज बना रहे हैं। भोले-भाले लड़कों को लालच देकर आतंक की दलदल में धकेले जाने का काम चल रहा है। परिवार में माता संतोष देवी, पत्नी सविता देवी, बेटी प्रिया, बेटे प्रियांशु और हिमांशु हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


बेटा चला गया, मां-बाप को सरकार भूल गई
बागपत। जिवाना गुलियान निवासी शहीद सिपाही जितेंद्र सिंह ने सात जुलाई 1999 को द्रास सेक्टर में युद्ध के दौरान बलिदान दिया। शहीद की मां ब्रहम कौर ने कहा कि सरकार ने इतने साल भी जितेंद्र के मां-बाप की सुध नहीं ली। शादी के तीन माह बाद बेटा शहीद हो गया था। जो सहायता मिली, उसे लेकर बहू मायके चली गई। उन्हें शासन और प्रशासन से कोई लाभ नहीं मिला। भाई बिजेंद्र सिंह, भूपेंद्र सिंह, भतीजे दीपक कुमार और सूरज का कहना है कि सरकार को परिवारों की सुध लेनी चाहिए। देश में आतंकी घटनाएं हो रही है, इसके लिए सख्त कदम उठाने की जरूरत है। शहीद के माता-पिता को विशेष पेंशन की व्यवस्था होनी चाहिए।

जंग छिड़ते ही पहला बलिदान बिनौली के बेटे का
बागपत। बिनौली गांव के हवलदार पदम सिंह धामा का बलिदान अमर है। कारगिल की चोटियों पर सबसे पहले पदम सिंह धामा ने ही बलिदान दिया था। भाई सौराज सिंह बताते हैं कि आठ मई 1999 को बटालिक सेक्टर में शहादत दी थी। दुश्मन घुसपैठ कर चुका था। सबसे पहले मोर्चे पर पदम सिंह और उनकी टुकड़ी को भेजा गया था। युद्ध में दुश्मन के दांत खट्टे कर बलिदान दिया। परिवार में माता शकुंतला देवी, भाई सौराज सिंह, पत्नी मुकेश देवी, बेटे अक्षय धामा और निखिल धामा है। सौराज सिंह कहते हैं कि देश की सीमा पर आज घटनाएं हो रही है उससे सरकार को कठोर कदम उठाने चाहिए।

दूसरी तरफ जिला सैनिक कल्याण बोर्ड के अधिकारी कर्नल (सेवानिवृत्त) संजय ने बताया कि किसी भी शहीद के परिजनों ने जमीन के संबंध में कोई प्रार्थना पत्र दफ्तर में नहीं दिया। यदि कोई परिवार पत्र देता है तो अग्रिम कार्रवाई के लिए डीएम को पत्र भेजा जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed