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बदरखा में नहीं बनेगा गो-संरक्षण केंद्र
Updated Mon, 10 Sep 2018 01:25 AM IST
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बागपत। गो-संरक्षण केंद्र पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। प्रोजेक्ट इंजीनियर ने बदरखा गांव की भूमि को रिजेक्ट कर दिया है। यमुना से सटी होने और सड़क से दो-ढाई फीट नीचे होने के कारण भूमि को निरस्त किया गया है। अब यहां पर गोसंरक्षण केंद्र नहीं बनेगा।
जिले में 1.20 करोड़ की लागत से गो-संरक्षण केंद्र बनना प्रस्तावित है। मुख्य पशु चिकित्सा विभाग ने बदरखा के खादर में यमुना के नजदीक भूमि का चयन कर शासन को रिपोर्ट भेज दी थी। इसके लिए 50 लाख रुपये की किश्त भी विभाग को प्राप्त हो गई। कुछ दिन पूर्व प्रोजेक्ट इंजीनियर जमीन का मौका मुआयना करने के लिए पहुंचे। जमीन की यमुना से दूरी और सड़क से गिराई का अवलोकन किया। जांच पड़ताल में पाया गया कि गो-संरक्षण केंद्र के लिए भूमि सही नहीं है। क्योंकि बाढ़ संभावित क्षेत्र है। कभी भी यमुना में अधिक पानी आ गया तो केंद्र डूब जाएगा। यह भूमि यमुना से सटी हुई है। इसके अलावा जमीन सड़क से दो-ढाई फीट नीचे है। मिट्टी भराव करने में ही लाखों रुपये खर्च हो जाएंगे। इससे भवन अधूरा रह जाएगा। दोनों कारणों के कारण बदरखा में गो-संरक्षण केंद्र को निरस्त किया गया।
खट्टा प्रहलादपुर गांव में पसंद आई जमीन
बागपत। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. राजपाल सिंह ने बताया कि यमुना के नजदीक होने और सड़क से दो-ढाई फीट नीचे होने के कारण प्रोजेक्ट इंजीनियर ने भूमि को निरस्त किया है। सीवीओ ने बताया कि उन्होंने और डॉक्टरों की टीम ने खट्टा प्रहलादपुर, चमरावल, सांकरौद और पाली गांव में जमीन देखी है। सबसे सही जमीन खट्टा प्रहलादपुर में मिली है। उबड़-खाबड़ है, जिसे सही कराया जाएगा। प्रोजेक्ट इंजीनियर को भी जमीन दिखाई जाएगी।
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जिले में 1.20 करोड़ की लागत से गो-संरक्षण केंद्र बनना प्रस्तावित है। मुख्य पशु चिकित्सा विभाग ने बदरखा के खादर में यमुना के नजदीक भूमि का चयन कर शासन को रिपोर्ट भेज दी थी। इसके लिए 50 लाख रुपये की किश्त भी विभाग को प्राप्त हो गई। कुछ दिन पूर्व प्रोजेक्ट इंजीनियर जमीन का मौका मुआयना करने के लिए पहुंचे। जमीन की यमुना से दूरी और सड़क से गिराई का अवलोकन किया। जांच पड़ताल में पाया गया कि गो-संरक्षण केंद्र के लिए भूमि सही नहीं है। क्योंकि बाढ़ संभावित क्षेत्र है। कभी भी यमुना में अधिक पानी आ गया तो केंद्र डूब जाएगा। यह भूमि यमुना से सटी हुई है। इसके अलावा जमीन सड़क से दो-ढाई फीट नीचे है। मिट्टी भराव करने में ही लाखों रुपये खर्च हो जाएंगे। इससे भवन अधूरा रह जाएगा। दोनों कारणों के कारण बदरखा में गो-संरक्षण केंद्र को निरस्त किया गया।
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खट्टा प्रहलादपुर गांव में पसंद आई जमीन
बागपत। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. राजपाल सिंह ने बताया कि यमुना के नजदीक होने और सड़क से दो-ढाई फीट नीचे होने के कारण प्रोजेक्ट इंजीनियर ने भूमि को निरस्त किया है। सीवीओ ने बताया कि उन्होंने और डॉक्टरों की टीम ने खट्टा प्रहलादपुर, चमरावल, सांकरौद और पाली गांव में जमीन देखी है। सबसे सही जमीन खट्टा प्रहलादपुर में मिली है। उबड़-खाबड़ है, जिसे सही कराया जाएगा। प्रोजेक्ट इंजीनियर को भी जमीन दिखाई जाएगी।
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