फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Baghpat News ›   खाली पड़े कमरे, स्कूलों तक नहीं पहुंच रहे बच्चे

खाली पड़े कमरे, स्कूलों तक नहीं पहुंच रहे बच्चे

Wed, 24 Apr 2019 01:39 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 24 Apr 2019 01:39 AM IST
विज्ञापन
खाली पड़े कमरे, स्कूलों तक नहीं पहुंच रहे बच्चे
बागपत। जनपद के अधिकांश परिषदीय स्कूलों में शिक्षा का हाल बेहाल दिख रहा है। बच्चे ही नहीं तो पढ़ाई कैसी। स्कूल के रजिस्टर में बच्चों की संख्या भले ही सैकड़ों में हो, लेकिन हकीकत इसके उलट है। कमरे खाली पड़े हैं और नाम मात्र के ही बच्चे स्कूलों तक पहुंच रहे हैं। काठा गांव के प्राथमिक विद्यालय नंबर एक और दो में बच्चों की संख्या नाम मात्र की ही दिखी। स्कूल नंबर एक की इंचार्ज प्रधानाध्यापक मधु से बच्चों की कम उपस्थिति पर सवाल किया तो उन्होंने कहा कि 150 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं, लेकिन 79 ही उपस्थित हैं। वह इसकी वजह बताती है कि कोई छात्र भट्ठों पर परिवार के साथ मजदूरी करने गया तो कोई गेहूं की कटाई में। कई बार अभिभावकों के साथ बैठक कर चुके है रैलियां भी निकाली, लेकिन कोई फायदा नहीं हो रहा है। गर्मी की छुट्टी के बाद नामांकन बढ़ने की उम्मीद है। यहां पर सहायक अध्यापक अमिता, अर्चना पाराशर, निधि जैन, सीमा गौतम, शिक्षा मित्र अमृता चौधरी है। यही हाल प्राथमिक विद्यालय नंबर दो का है। यहां 221 छात्र पंजीकृत हैं, लेकिन उपस्थित 104 उपस्थित मिले। किसी कक्षा में दस छात्र थे, किसी में आठ। प्रधानाध्यापक अजित सिंह का कहना है कि गेहूं की कटाई चल रही। इसमें अभिभावकों के साथ बच्चे भी गए हुए हैं। यहां पर सहायक अध्यापक अंशु चौधरी, वंदना, नेहा, रोमी प्रभाकर, संगीता, सोनिया वर्मा, शिक्षा मित्र मधुबाला तैनात है।
विज्ञापन


कमरा नहीं, बरामदे में ही पढ़ाई
बागपत। भीषण गर्मी हो रही है, लेकिन प्राथमिक विद्यालय नंबर एक में छात्रों को बरामदे में बैठाकर पढ़ाया जाता है। गर्मी के कारण बच्चों को बुरा हाल रहा। बीमार होने का भी खतरा रहा। प्रभारी प्रधानाध्यापक मधु ने बताया कि अतिरिक्त कमरे बनवाने के लिए विभाग को लिखा हुआ है। मजबूर होकर कक्षा एक के बच्चों को बरामदे में पढ़ाना पड़ रहा है।
विज्ञापन


सरकारी स्कूल में की जाएगी शिक्षा अनिवार्य
काठा गांव निवासी प्रेम सिंह ने कहा कि प्राइवेट स्तर की शिक्षा जब तक स्कूलों में शुरू नहीं होगी तब तक बच्चों की संख्या नहीं बढ़ेगी। बेसिक शिक्षा विभाग को इस पर ध्यान देने की जरूरत है।
विज्ञापन
विज्ञापन

नरेंद्र कुमार ने कहा कि बच्चों के लिए शिक्षा बेहद जरूरी है। इसके लिए अभिभावकों को भी जागरूक होना चाहिए। बचपन में ही बच्चों को काम पर न लगाए। उन्हें स्कूल भेजे।
डॉ. ओमपाल ने कहा कि किताब, जूते या अन्य सामग्री फ्री देने से परिषदीय विद्यालयों की शिक्षा में सुधार नहीं होने वाला है। पाठ्यक्रम बदलना पड़ेगा। सरकारी स्कूल में शिक्षा अनिवार्य करनी होगी।

सतेंद्र चौहान ने कहा कि काम के चक्कर में बच्चों की पढ़ाई को प्रभावित नहीं करना चाहिए। जो अभिभावक ऐसा करता है वह गलत है। इसके लिए गांव के लोगों को भी जागरूकता फैलानी चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed