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असारा में जल भराव की समस्या गंभीर
Updated Mon, 06 Aug 2018 01:28 AM IST
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रमाला (बागपत)।
असारा गांव में जलभराव की समस्या से ग्रामीणों को जूझना पड़ रहा है। तालाब गंदगी से अटे पड़े है। वहीं कृष्णा नदी के दूसरी तरफ कब्रिस्तान है। कच्चे पुल से लोग जनाते को लेकर जाते हैं। इससे हादसा होने की आशंका रहती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से समस्या का समाधान कराने की मांग की।
अल्पसंख्यक अधिकार परिषद के प्रदेश सचिव कारी मोहम्मद तारीक फलाही ने बताया कि असारा गांव के कई मुख्य मार्गों पर जलभराव की समस्या बनी हुई है। ग्रामीण सड़कों पर कूड़ा, गोबर आदि डाल देते हैं। हल्की सी वर्षा होते ही गलियों में गंदगी फैल जाती है। वहीं कृष्णा नदी पर कच्चा पुल है। जो बारिश के कारण बह गया था। ग्रामीणों ने फिर से कच्चा पुल बना लिया है। नदी के दूसरी तरफ मंदिर, प्राइमरी पाठशाला व कब्रिस्तान है। कच्चे पुलिस से ग्रामीणों और स्कूली बच्चों को जाना पड़ता है। कब्रिस्तान मेें जनाजा ले जाने में परेशानी होती है। कच्चा पुल टूटने की आशंका रहता है। ग्रामीण जान जोखिम में डालकर नदी पार करते है। उन्होंने कई बार अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। चेतावनी दी कि यदि समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन किया जाएगा। इनमें मौलाना इलियास, मास्टर मेहरबान अली, अजय कुमार, मोहम्मद शहजाद, कारी खालिद, मोहम्मद उमर आदि रहे।
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असारा गांव में जलभराव की समस्या से ग्रामीणों को जूझना पड़ रहा है। तालाब गंदगी से अटे पड़े है। वहीं कृष्णा नदी के दूसरी तरफ कब्रिस्तान है। कच्चे पुल से लोग जनाते को लेकर जाते हैं। इससे हादसा होने की आशंका रहती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से समस्या का समाधान कराने की मांग की।
अल्पसंख्यक अधिकार परिषद के प्रदेश सचिव कारी मोहम्मद तारीक फलाही ने बताया कि असारा गांव के कई मुख्य मार्गों पर जलभराव की समस्या बनी हुई है। ग्रामीण सड़कों पर कूड़ा, गोबर आदि डाल देते हैं। हल्की सी वर्षा होते ही गलियों में गंदगी फैल जाती है। वहीं कृष्णा नदी पर कच्चा पुल है। जो बारिश के कारण बह गया था। ग्रामीणों ने फिर से कच्चा पुल बना लिया है। नदी के दूसरी तरफ मंदिर, प्राइमरी पाठशाला व कब्रिस्तान है। कच्चे पुलिस से ग्रामीणों और स्कूली बच्चों को जाना पड़ता है। कब्रिस्तान मेें जनाजा ले जाने में परेशानी होती है। कच्चा पुल टूटने की आशंका रहता है। ग्रामीण जान जोखिम में डालकर नदी पार करते है। उन्होंने कई बार अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। चेतावनी दी कि यदि समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन किया जाएगा। इनमें मौलाना इलियास, मास्टर मेहरबान अली, अजय कुमार, मोहम्मद शहजाद, कारी खालिद, मोहम्मद उमर आदि रहे।
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