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तीन दिवसीय यजुर्वेद पारायण यज्ञ शुरू
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तीन दिवसीय यजुर्वेद पारायण यज्ञ शुरू
दोघट। आजमपुर मुलसम गांव के शिव मंदिर में तीन दिवसीय यजुर्वेद पारायण यज्ञ का शुभारंभ हुआ। यज्ञ से पूर्व सरस्वती ज्ञान मंदिर के छात्र-छात्राओं ने गांव में प्रभात फेरी निकाली।
यज्ञ का शुभारंभ तेजपाल सिंह धनौरा और प्रधान कृष्णपाल ने संयुक्त रूप से दीप जलाकर किया। यज्ञ के ब्रह्मा योगाचार्य अरविंद कुमार शास्त्री ने कहा कि आज मनुष्य अपने अस्तित्व के लिए चिंतित नहीं है बल्कि पाश्चात्य संस्कृति की चकाचौंध में डूबा है। स्वामी दयानंद सरस्वती ने आर्य समाज की स्थापना की थी। उनका मत था कि अगर समाज में सुख, समृद्धि और मानव में सच्चे अर्थों में मानवता का विकास कराना चाहते है तो वेदों की और लौटना होगा। वेद वह ज्ञान का स्रोत है, जो निर्माण की बात करता है और स्वयं परमात्मा की वाणी है।
इस मौके पर सुनील कुमार शास्त्री, सोमपाल राणा ने ओम ध्वजा फहराया गया। इस मौके पर महावीर सिंह, मा. कृष्णपाल, जयपाल सिंह, टिंकू, महेश, गौरव चौधरी, सतेंद्र, विशंबर, जितेंद्र, संदीप, हरपाल सिंह आदि मौजूद रहे। इसके अलावा आर्य समाज मंदिर धनौरा में भी यज्ञ का शुभारंभ हुआ। यज्ञ में पहले ही दिन काफी संख्या में लोगाें ने आहुतियां डालकर धर्म लाभ उठाया।
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दोघट। आजमपुर मुलसम गांव के शिव मंदिर में तीन दिवसीय यजुर्वेद पारायण यज्ञ का शुभारंभ हुआ। यज्ञ से पूर्व सरस्वती ज्ञान मंदिर के छात्र-छात्राओं ने गांव में प्रभात फेरी निकाली।
यज्ञ का शुभारंभ तेजपाल सिंह धनौरा और प्रधान कृष्णपाल ने संयुक्त रूप से दीप जलाकर किया। यज्ञ के ब्रह्मा योगाचार्य अरविंद कुमार शास्त्री ने कहा कि आज मनुष्य अपने अस्तित्व के लिए चिंतित नहीं है बल्कि पाश्चात्य संस्कृति की चकाचौंध में डूबा है। स्वामी दयानंद सरस्वती ने आर्य समाज की स्थापना की थी। उनका मत था कि अगर समाज में सुख, समृद्धि और मानव में सच्चे अर्थों में मानवता का विकास कराना चाहते है तो वेदों की और लौटना होगा। वेद वह ज्ञान का स्रोत है, जो निर्माण की बात करता है और स्वयं परमात्मा की वाणी है।
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इस मौके पर सुनील कुमार शास्त्री, सोमपाल राणा ने ओम ध्वजा फहराया गया। इस मौके पर महावीर सिंह, मा. कृष्णपाल, जयपाल सिंह, टिंकू, महेश, गौरव चौधरी, सतेंद्र, विशंबर, जितेंद्र, संदीप, हरपाल सिंह आदि मौजूद रहे। इसके अलावा आर्य समाज मंदिर धनौरा में भी यज्ञ का शुभारंभ हुआ। यज्ञ में पहले ही दिन काफी संख्या में लोगाें ने आहुतियां डालकर धर्म लाभ उठाया।
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