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स्कूलों में नहीं पहुंच रहे बच्चे, मोबाइल पर बतिया रही शिक्षिका

Thu, 25 Apr 2019 01:19 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 25 Apr 2019 01:19 AM IST
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स्कूलों में नहीं पहुंच रहे बच्चे, मोबाइल पर बतिया रही शिक्षिका
बागपत। सरकारी स्कूलों में नामांकन के सापेक्ष छात्र-छात्राएं नहीं पहुंच रहे हैं। शिक्षकों का दावा है कि गेहूं कटाई के कारण कक्षाएं खाली पड़ी है। अभिभावकों से बच्चों को स्कूल भेजने का आह्वान किया जा रहा है, लेकिन नतीजा सिफर। नया गांव हमीदाबाद स्थित प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में भी नामांकन के सापेक्ष छात्र-छात्राएं नहीं मिले। एक कक्षा में शिक्षिका मोबाइल पर बतिया मिली, अधिकतर कक्षा खाली मिली। बीएसए राजीव रंजन मिश्र का कहना है कक्षाओं में शिक्षक मोबाइल नहीं चला सकते हैं, लेकिन यहां हालात इसके उलट मिले। प्राथमिक विद्यालय की प्रभारी प्रधानाध्यापक मीनाक्षी कहती हैं कि गेहूं कटाई के कारण बच्चे नहीं आ रहे हैं। मीनाक्षी का दावा है कि रोजाना छुट्टी के बाद स्कूल चलो अभियान के तहत ग्रामीणों को जागरूक करते हैं, लेकिन बच्चों की संख्या नहीं बढ़ रही है। यहां पर 123 छात्रों का पंजीकरण है, लेकिन उपस्थित 87 है। उच्च प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक सुरेंद्र कुमार का कहना है कि गेहूं कटाई के कारण छात्रों की उपस्थित कम हो रही है। जो छात्र नहीं आ रहे है उनके घर जाकर जांच पड़ताल कर रहे है। उच्च प्राथमिक विद्यालय में 54 छात्र पंजीकृत है, इनमें से 36 उपस्थित रहे।
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दूसरी तरफ खंड शिक्षा अधिकारी वीरेंद्र पाल सिंह ने कहा प्राथमिक विद्यालयों में क्लास के दौरान मोबाइल प्रतिबंधित है। छात्रों की संख्या गेहूं की कटाई के कारण कम हो रही है। फसल के कटने के बाद उपस्थिति बढ़ जाएगी। स्कूल के बाहर गंदगी है, उसको हटवाया जाएगा। लापरवाही की जांच करवाकर कार्रवाई करेंगे।
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सरकारी नौकरी वालों के लिए अनिवार्य हो सरकारी स्कूल
अभिभावक समिति के अध्यक्ष राकेश ने बताया कि स्कूल में छात्रों की संख्या बढ़ाने पर ध्यान दिया जा रहा है। गांव के लोगों से ज्यादा से ज्यादा स्कूल पहुंचने का अनुरोध कर रहे है।
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यशपाल सिंह ने कहा कि गांव के लोग प्राइवेट स्कूलों में अपने बच्चों को पढ़ा रहे है। क्योंकि यहां पर अच्छी शिक्षा दी जा रही है। सक्षम व्यक्ति सरकारी स्कूलों में बच्चों को नहीं भेज रहे हैं। इसमें सुधार की जरूरत है। नौकरी पेशा लोग प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाते हैं।
पूर्व प्रधान मुकेश ने कहा कि गांव के लोगों को कई बार बच्चों को स्कूल भेजने के लिए जागरूक किया है, लेकिन हालात नहीं बदल रहे हैं। प्राइवेट स्कूलों की तर्ज पर सरकारी स्कूलों में पढ़ाई कराई जानी चाहिए। प्राइमरी स्कूलों की शिक्षा को अनिवार्य किया जाना चाहिए।

जयभगवान ने कहा कि प्राइवेट स्कूल सरकारी पर हावी हो गए है। कोई भी नहीं चाहता अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाए। जबकि पहले और अब की पढ़ाई में काफी बदलाव आया है। कक्षा 10 तक की पढ़ाई सरकारी स्कूलों में अनिवार्य कर देनी चाहिए।
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