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सभी पापों की उत्पति है क्रोध- अरूण मुनि
Updated Fri, 11 Aug 2017 01:08 AM IST
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बड़ौत (बागपत)। जैन संत अरुण मुनि ने कहा क्रोध पाप का बाप होता है। सभी पापों की उत्पत्ति क्रोध से ही होती है।
बृहस्पतिवार को जैन स्थानक शहर में आयोजित धर्मसभा में उन्होंने कहा क्रोध में व्यक्ति विवेक खो देता है। उसे क्रोध में जो भी उसके मन में आता है वह कहता है और करता है। यदि क्रोध आने से पहले एक क्षण के लिए वह सोच लें कि तू क्रोध क्यों कर रहा है तो वह पाप से बच सकता है। उन्होंने बताया कि ब्रेक हट जाने पर गाड़ी कभी भी दुर्घटनाग्रस्त हो जाती है। उसी प्रकार क्रोध आने पर व्यक्ति की दशा बिना ब्रेक की गाड़ी के सामान हो जाती है। क्रोध आने पर व्यक्ति को अच्छे बुरे का ज्ञान नहीं रहता और वह क्रोध की स्थिति में कुछ भी कर बैठता है। जब उसका गुस्सा शांत होता है, तब वह सोचता है कि तुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था। उन्होंने कहा जब किसी के प्रति व्यक्ति ईर्ष्या करता है तो वह उस व्यक्ति के प्रति क्रोध में पागल हो जाता है। इसीलिए क्रोध की बहन को ईर्ष्या का नाम दिया जाता है । इससे पूर्व अमन मुनि ने भी विचार रखे। धर्मसभा में जयप्रकाश जैन, सोमपाल, राजीव, हंस कुमार, दीपक जैन, अतुल जैन, अभय कुमार, शैल बाला, इंद्राणी, कमलेश, गीता आदि रहे।
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बृहस्पतिवार को जैन स्थानक शहर में आयोजित धर्मसभा में उन्होंने कहा क्रोध में व्यक्ति विवेक खो देता है। उसे क्रोध में जो भी उसके मन में आता है वह कहता है और करता है। यदि क्रोध आने से पहले एक क्षण के लिए वह सोच लें कि तू क्रोध क्यों कर रहा है तो वह पाप से बच सकता है। उन्होंने बताया कि ब्रेक हट जाने पर गाड़ी कभी भी दुर्घटनाग्रस्त हो जाती है। उसी प्रकार क्रोध आने पर व्यक्ति की दशा बिना ब्रेक की गाड़ी के सामान हो जाती है। क्रोध आने पर व्यक्ति को अच्छे बुरे का ज्ञान नहीं रहता और वह क्रोध की स्थिति में कुछ भी कर बैठता है। जब उसका गुस्सा शांत होता है, तब वह सोचता है कि तुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था। उन्होंने कहा जब किसी के प्रति व्यक्ति ईर्ष्या करता है तो वह उस व्यक्ति के प्रति क्रोध में पागल हो जाता है। इसीलिए क्रोध की बहन को ईर्ष्या का नाम दिया जाता है । इससे पूर्व अमन मुनि ने भी विचार रखे। धर्मसभा में जयप्रकाश जैन, सोमपाल, राजीव, हंस कुमार, दीपक जैन, अतुल जैन, अभय कुमार, शैल बाला, इंद्राणी, कमलेश, गीता आदि रहे।