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मोक्ष की चाह रखने वाला ही पाप को छोड़ता है- अरूण मुनि 18-51-04
Updated Thu, 21 Sep 2017 01:43 AM IST
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बड़ौत (बागपत)।
जैन संत अरुण मुनि ने कहा जिन्हें मोक्ष की प्यास होती है, वे ही पाप को छोड़ते हैं।
जैन स्थानक मंडी में आयोजित धर्मसभा में जैन संत ने कहा आत्मा कुछ भी करें या ना करें मन में संशय बना रहता है। इससे राम की वृत्ति होती है। पाप को जो छोड़ देता है और आनंद को त्याग देता है । उन्होंने कहा भोग विलास सुविधा, ऐश्वर्य सभी चीजों ही रति के अंदर आती है। धर्म को नापसंद करना अरति है। शास्त्र के एक शब्द को पकड़ने से काम चलेगा। इसके बाद अपने मन को टटोलने से पता लगेगा कि हम कहां खड़े हैं। उन्होंने कहा जब इंसान पृथ्वी पर है सुख-दुख तो लगे रहते हैं। यदि साधु बनकर भी मन में तनाव है तो फिर कहां का संयम है। 22 प्रकार के दुख तो उठा लिए, मगर रति अरति का ध्यान नहीं किया तो ऐसे संयम को व्यर्थ ही कहा जाता है। धर्मसभा में शिखर चंद, अनुराग, घसीटू, कालू, नरेश चंद, संजय, बाबूराम, त्रिलोक चंद, डीके जैन, हंस कुमार जैन, गौरव, शैलबाला, इंद्राणी, चित्रा, सविता, मोनिका, अनुराधा आदि रहे।
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जैन संत अरुण मुनि ने कहा जिन्हें मोक्ष की प्यास होती है, वे ही पाप को छोड़ते हैं।
जैन स्थानक मंडी में आयोजित धर्मसभा में जैन संत ने कहा आत्मा कुछ भी करें या ना करें मन में संशय बना रहता है। इससे राम की वृत्ति होती है। पाप को जो छोड़ देता है और आनंद को त्याग देता है । उन्होंने कहा भोग विलास सुविधा, ऐश्वर्य सभी चीजों ही रति के अंदर आती है। धर्म को नापसंद करना अरति है। शास्त्र के एक शब्द को पकड़ने से काम चलेगा। इसके बाद अपने मन को टटोलने से पता लगेगा कि हम कहां खड़े हैं। उन्होंने कहा जब इंसान पृथ्वी पर है सुख-दुख तो लगे रहते हैं। यदि साधु बनकर भी मन में तनाव है तो फिर कहां का संयम है। 22 प्रकार के दुख तो उठा लिए, मगर रति अरति का ध्यान नहीं किया तो ऐसे संयम को व्यर्थ ही कहा जाता है। धर्मसभा में शिखर चंद, अनुराग, घसीटू, कालू, नरेश चंद, संजय, बाबूराम, त्रिलोक चंद, डीके जैन, हंस कुमार जैन, गौरव, शैलबाला, इंद्राणी, चित्रा, सविता, मोनिका, अनुराधा आदि रहे।