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मदरसा हाजा में छात्रों की दीनी शिक्षा का किया अवलोकन
Updated Wed, 24 Oct 2018 01:09 AM IST
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बड़ौत। नगर के गुराना रोड पर स्थित मदरसा हाजा के प्रांगण में मदरसों के छात्रों के दीनी कार्यक्रम का आयोजन किया और मदरसों के छात्रों की दीनी शिक्षा का अवलोकन किया। इसमें मदरसे के मोहतमिम मौलाना कारी अब्दुल वाजिद ने कहा कि शिक्षा को इस्लाम में प्राथमिकता दी गई है और शिक्षा ग्रहण करना हर मुसलमान का कर्त्तव्य है। हमें चाहिए कि अपने बच्चों को दीनी तालीम से आरास्ता करें। तालीम हासिल करके ही व्यक्ति जलालत और गुमराही के अंधेरे से बच सकता है। ज्ञान की रोशनी लेकर निकलने वाले प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है कि वह समाज में फैली बौद्धिक अंधेरे को दूर करें। दीन-ए-इस्लाम जिंदगी गुजारने का बेहतर तरीका है।
इस मौके पर मौलाना कारी साबिर ने कहा कि दीनी तालीम के जरिये दीन-दुनिया को संवारा जा सकता है। उन्होंने कहा कि मदरसा हाजा में बच्चों की तालीम व तरबियत पर जिस तरह से मदरसे के मोहतमिम कारी अब्दुल वाजिद ने मेहनत की है, ऐसा कम ही मदरसों में देखने को मिलता है। उन्होंने कहा कि घरों को नमूना-ए-जन्नत बनाने के लिए मुसलमान अपनी बच्ची को भी दीनी तालीम दिलाएं। एक आलिम की बड़ी जिम्मेदारी होती है, उसे चाहिए कि खुद तो बुराई से बचे, दूसरों को भी बुराई से बचाए और अच्छाई की तरफ बुलाए। आलिम को सनद मिल जाने के बाद अपनी जिम्मेदारी को निभाना चाहिए। इस मौके पर मौलाना खालिद, मौलाना हारिस, मौलाना इरफान, मौलाना नोशाद, कारी शाहिद, कारी रागिब, मौलाना अब्दुल मोमीन, कारी अब्दुल फिरोज, कारी फिरोज आदि लोग मौजूद रहे।
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इस मौके पर मौलाना कारी साबिर ने कहा कि दीनी तालीम के जरिये दीन-दुनिया को संवारा जा सकता है। उन्होंने कहा कि मदरसा हाजा में बच्चों की तालीम व तरबियत पर जिस तरह से मदरसे के मोहतमिम कारी अब्दुल वाजिद ने मेहनत की है, ऐसा कम ही मदरसों में देखने को मिलता है। उन्होंने कहा कि घरों को नमूना-ए-जन्नत बनाने के लिए मुसलमान अपनी बच्ची को भी दीनी तालीम दिलाएं। एक आलिम की बड़ी जिम्मेदारी होती है, उसे चाहिए कि खुद तो बुराई से बचे, दूसरों को भी बुराई से बचाए और अच्छाई की तरफ बुलाए। आलिम को सनद मिल जाने के बाद अपनी जिम्मेदारी को निभाना चाहिए। इस मौके पर मौलाना खालिद, मौलाना हारिस, मौलाना इरफान, मौलाना नोशाद, कारी शाहिद, कारी रागिब, मौलाना अब्दुल मोमीन, कारी अब्दुल फिरोज, कारी फिरोज आदि लोग मौजूद रहे।
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