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आत्मकल्याण के लिए यज्ञ सर्वोतम साधन- शास्त्री
Updated Sun, 10 Sep 2017 01:03 AM IST
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बिनौली (बागपत)।
लाक्षा गृह बरनावा स्थित श्री महानंद संस्कृत विद्यालय परिसर में ब्रह्मलीन कृष्णदत्त महाराज के जन्मोत्सव के अवसर पर चल रहे सामवेद पारायण यज्ञ का शनिवार को पूर्ण आहुति के साथ समापन हो गया।
यज्ञ के ब्रह्मा आचार्य गुरुवचन शास्त्री ने कहा यज्ञ को जीवन में आत्मसात करने वाला मनुष्य सदा सुखी रहता है। आत्मकल्याण के लिए यज्ञ सर्वोत्तम साधन है। मनुष्य को जीवन में उन्नति प्राप्त करने के लिए दानशील होना चाहिए। योगाचार्य अरविंद शास्त्री ने कहा यज्ञ पर्यावरण शुद्धि के साथ वेद मंत्रोच्चरण से आत्मिक शुद्धि का भी साधन है। आज जनमान सच ढोगी बाबा के पास तो तुरंत चला जाता है, लेकिन संसार का सबसे श्रेष्ठ कर्म यज्ञ में भाग लेने के लिए समय नहीं है। ये बहुत बड़ी विडंबना है। यज्ञ हमारी प्राचीन ऋषि संस्कृति और परंपरा का प्रतीक है। आचार्य अंकुर भारद्वाज ने ईश भक्ति के भजनों की प्रस्तुति दी। इस मौके पर आचार्य गुरु वचन, आचार्य विनोद कुमार, आचार्य रविदत्त, ब्रह्म प्रकाश त्यागी ने वेदापदेश दिया। इसमें सतीश भारद्वाज, देवेंद्र, संजय, अजय, ब्रजपाल सिंह शास्त्री, आशीष कुमार, विजय, धनपाल, यशोधर्मा सोलंकी, साधना, निमेष, ईश्वर, जेपी, पूर्व प्रमुख जयचंद त्यागी, सतीश चेयरमैन, भगीरथ, विजय, निमेष, मनोज, आशीष, सतीश आदि रहे।
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लाक्षा गृह बरनावा स्थित श्री महानंद संस्कृत विद्यालय परिसर में ब्रह्मलीन कृष्णदत्त महाराज के जन्मोत्सव के अवसर पर चल रहे सामवेद पारायण यज्ञ का शनिवार को पूर्ण आहुति के साथ समापन हो गया।
यज्ञ के ब्रह्मा आचार्य गुरुवचन शास्त्री ने कहा यज्ञ को जीवन में आत्मसात करने वाला मनुष्य सदा सुखी रहता है। आत्मकल्याण के लिए यज्ञ सर्वोत्तम साधन है। मनुष्य को जीवन में उन्नति प्राप्त करने के लिए दानशील होना चाहिए। योगाचार्य अरविंद शास्त्री ने कहा यज्ञ पर्यावरण शुद्धि के साथ वेद मंत्रोच्चरण से आत्मिक शुद्धि का भी साधन है। आज जनमान सच ढोगी बाबा के पास तो तुरंत चला जाता है, लेकिन संसार का सबसे श्रेष्ठ कर्म यज्ञ में भाग लेने के लिए समय नहीं है। ये बहुत बड़ी विडंबना है। यज्ञ हमारी प्राचीन ऋषि संस्कृति और परंपरा का प्रतीक है। आचार्य अंकुर भारद्वाज ने ईश भक्ति के भजनों की प्रस्तुति दी। इस मौके पर आचार्य गुरु वचन, आचार्य विनोद कुमार, आचार्य रविदत्त, ब्रह्म प्रकाश त्यागी ने वेदापदेश दिया। इसमें सतीश भारद्वाज, देवेंद्र, संजय, अजय, ब्रजपाल सिंह शास्त्री, आशीष कुमार, विजय, धनपाल, यशोधर्मा सोलंकी, साधना, निमेष, ईश्वर, जेपी, पूर्व प्रमुख जयचंद त्यागी, सतीश चेयरमैन, भगीरथ, विजय, निमेष, मनोज, आशीष, सतीश आदि रहे।
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