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जन अनुयायियों ने चौथे दिन उतम सोच धर्म अंगीकार किया
Updated Wed, 30 Aug 2017 01:16 AM IST
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बड़ौत (बागपत)।
जैन समाज के चल रहे दशलक्षण पर्व के चौथे दिन अनुयायियों ने उत्तम सोच धर्म को अंगीकार कर मंदिरों में पूजा-अर्चना की। मंदिरों में विधान, पूजां में भी श्रद्धालुओं भाग लिया और रात्रि में संध्या भजन और अन्य कार्यक्रमों में भक्त जमकर झूमे।
दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में अनुमान सागर के सानिध्य में दिगंबर जैन युवा समिति द्वारा आयोजित तेरहदीप महामंडल विधान में चंद्रप्रभु भगवान का अभिषेक विधि-विधान से किया । इसके बाद पीत वस्त्रधारी इंद्र और इंद्राणियों ने नित्य नियम की पूजा और दशलक्षण पर्व की पूजा की। इसके बाद विधानाचार्य के निर्देशन में विधान में आठ तरह की पूजा की। इनमें धातुकी द्वीप पूर्व दिशा, विजय मेरू की धातु द्वीप, चारों दिशा मध्य की विजय मेरू के ईशान, विजय मेरू के पूर्व विधेय संबंधी, विजय मेरू के पश्चिम विधेय संबंधी, रूपांचल पर सिद्ध कूट, जिन मंदिर की पूजा विधान में लगने वाले इंद्र और इंद्राणियों ने की । बीच-बीच में पंडित अमर कुमार जैन ने विधान की महत्ता बताई।
दिगंबर जैन छोटा मंदिर में दिगंबर जैन युवा समिति ने भगवान का अभिषेक किया । नित्य नियम की पूजा तथा दशलक्षण की पूजा की । सायंकाल दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में जैन युवा मंच के कलाकारों ने भक्ति संगीत और आरती कार्यक्रम में भाग लिया। इस मौके पर नृत्य प्रतियोगिता भी हुई। इसमें बच्चों ने आकर्षक नृत्य प्रस्तुत किए। अतिथि भवन में भी धार्मिक कार्यक्रम हुए। इनमें अतुल जैन, प्रवीण जैन, सतीश जैन, अमित जैन, विपिन जैन, शीलचंद, विपुल कुमार, दिनेश जैन, अतुल जैन आदि रहेे।
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सत्य के आगमन से आत्मा की सफाई आवश्यक - अनुमान सागर
बड़ौत। जैन अतिथि भवन मेें अनुमान सागर महाराज ने कहा अतिथि जिस प्रकार अतिथि के आगमन से पूर्व घर की सफाई अनिवार्य है। बीजारोपण से पूर्व भूमि की सफाई आवश्यक है। इसी प्रकार सत्य के आगमन के पूर्व आत्मा की सफाई आवश्यक है। उन्होंने कहा सोच धर्म का अर्थ है आत्मा में लोभ का अंकुर फुटे उसके पहले ही उसे मिटा डालना संसार के धन को संसार वृद्धि का कारण समझना क्योंकि धन आसक्ति का भाव उत्पन्न करता है। वह मृत्यु को स्वीकार कर लेगा, लेकिन वह धन नहीं त्यागेगा।
उत्तम सोच धर्म की पूजा की
बड़ौत। दशलक्षण पर्व के चौथे दिन अजितनाथ दिगंबर जैन मंदिर कमेटी मंडी के तत्वावधान में विहर्ष सभागार सत्यवती जैन धर्मशाला में आचार्य सुंदर सागर महाराज के सानिध्य में उत्तम सोच धर्म की पूजा की । धर्मचारिणी डॉ. रीता दीदी और नीरज के निर्देशन में भक्ति भाव से इंद्र और इंद्राणियों ने अजितनाथ भगवान की पूजा की। नित्य नियम की पूजा में देवशास्त्र गुरू, विद्यमान विश्व शांति, तीर्थंकर और अनंता नंद सिद्ध प्रमेष्ठी भगवान की पूजा की। इसके अलावा सोलहकरण पंच मेरू और दशलक्षण पर्व की पूजा की। पूजा में प्रमोद जैन, वरदान जैन, इंद्राणी जैन, बालकिशन जैन, शशि जैन आदि का सहयोग रहा। शाम को विहर्ष सभागार में नेहरू बाल एकेडमी के बच्चों ने कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी। इस मौके पर आचार्य सुंदर सागर महाराज ने कहा जब तब मन में लोभ है, उत्तम सोच धर्म धारण नहीं कर पाओंगे। धर्म दिखावे के लिए नहीं, बल्कि आत्मा को शुद्ध करने के लिए किया जाता है। इस पर्व में जो उयवासों की साधना होती है, वह मन की निर्मलता के लिए होती है। समाज में दिखावे के लिए नहीं।
लोभ रूपी कषाय नर्क का पासपोर्ट है - अरुण मुनि
बड़ौत। जैन संत अरुण मुनि ने जैन स्थानक शहर में आयोजित धर्मसभा में कहा आशा, तृष्णा और स्वछंदता ( तीनों) दुखदाई है। पाप एक है। उसको करने के तरीके अनेक है। लोभ रूपी कषाय नर्क का पासपोर्ट होता है। पापी मनुष्य को पाप में उतना ही रस मिलता है, जितना कुत्ते को हड्डी चबाने में। जिस प्रकार बिजली भागने पर बिजली के सारे उपकरण बंद हो जाते हैं, उसी प्रकार लोभ रूपी कषाय का पल्ग भी बोर्ड से हट जाता है, तभी सब पापों का आना बंद हो जाता है। उन्होंने कहा प्रवृत्ति पर नियंत्रण करों, इससे वैराग्य उत्पन्न होगा। हमें यह देखना है हमारा पाप घट रहा है या बढ़ रहा है। धर्मसभा में अमन मुनि ने भी विचार रखे। धर्मसभा में रोहित, हिमांशु, पंकज, अमित, कालू जैन, वरदान जैन, हंस कुमार, दीपक जैन, शैल बाला जैन, इंद्राणी, सविता, रेखा, पूनम आदि रहे।
श्री जी की पूजा कर की आराधना
बागपत। शहर के दिगंबर जैन मंदिर में दशलक्षण पर्व में श्रद्धालुओं ने श्री जी की पूजा अर्चना की । अर्घ्य चढ़ाकर भगवान की आराधना की। शाम के समय भगवान की आरती हुई। सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। मयंक जैन, प्रहलाद जैन, कामिनी, दीप्ति, नमन, मनीष, अर्चना मौजूद रहे।
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जैन समाज के चल रहे दशलक्षण पर्व के चौथे दिन अनुयायियों ने उत्तम सोच धर्म को अंगीकार कर मंदिरों में पूजा-अर्चना की। मंदिरों में विधान, पूजां में भी श्रद्धालुओं भाग लिया और रात्रि में संध्या भजन और अन्य कार्यक्रमों में भक्त जमकर झूमे।
दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में अनुमान सागर के सानिध्य में दिगंबर जैन युवा समिति द्वारा आयोजित तेरहदीप महामंडल विधान में चंद्रप्रभु भगवान का अभिषेक विधि-विधान से किया । इसके बाद पीत वस्त्रधारी इंद्र और इंद्राणियों ने नित्य नियम की पूजा और दशलक्षण पर्व की पूजा की। इसके बाद विधानाचार्य के निर्देशन में विधान में आठ तरह की पूजा की। इनमें धातुकी द्वीप पूर्व दिशा, विजय मेरू की धातु द्वीप, चारों दिशा मध्य की विजय मेरू के ईशान, विजय मेरू के पूर्व विधेय संबंधी, विजय मेरू के पश्चिम विधेय संबंधी, रूपांचल पर सिद्ध कूट, जिन मंदिर की पूजा विधान में लगने वाले इंद्र और इंद्राणियों ने की । बीच-बीच में पंडित अमर कुमार जैन ने विधान की महत्ता बताई।
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दिगंबर जैन छोटा मंदिर में दिगंबर जैन युवा समिति ने भगवान का अभिषेक किया । नित्य नियम की पूजा तथा दशलक्षण की पूजा की । सायंकाल दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में जैन युवा मंच के कलाकारों ने भक्ति संगीत और आरती कार्यक्रम में भाग लिया। इस मौके पर नृत्य प्रतियोगिता भी हुई। इसमें बच्चों ने आकर्षक नृत्य प्रस्तुत किए। अतिथि भवन में भी धार्मिक कार्यक्रम हुए। इनमें अतुल जैन, प्रवीण जैन, सतीश जैन, अमित जैन, विपिन जैन, शीलचंद, विपुल कुमार, दिनेश जैन, अतुल जैन आदि रहेे।
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सत्य के आगमन से आत्मा की सफाई आवश्यक - अनुमान सागर
बड़ौत। जैन अतिथि भवन मेें अनुमान सागर महाराज ने कहा अतिथि जिस प्रकार अतिथि के आगमन से पूर्व घर की सफाई अनिवार्य है। बीजारोपण से पूर्व भूमि की सफाई आवश्यक है। इसी प्रकार सत्य के आगमन के पूर्व आत्मा की सफाई आवश्यक है। उन्होंने कहा सोच धर्म का अर्थ है आत्मा में लोभ का अंकुर फुटे उसके पहले ही उसे मिटा डालना संसार के धन को संसार वृद्धि का कारण समझना क्योंकि धन आसक्ति का भाव उत्पन्न करता है। वह मृत्यु को स्वीकार कर लेगा, लेकिन वह धन नहीं त्यागेगा।
उत्तम सोच धर्म की पूजा की
बड़ौत। दशलक्षण पर्व के चौथे दिन अजितनाथ दिगंबर जैन मंदिर कमेटी मंडी के तत्वावधान में विहर्ष सभागार सत्यवती जैन धर्मशाला में आचार्य सुंदर सागर महाराज के सानिध्य में उत्तम सोच धर्म की पूजा की । धर्मचारिणी डॉ. रीता दीदी और नीरज के निर्देशन में भक्ति भाव से इंद्र और इंद्राणियों ने अजितनाथ भगवान की पूजा की। नित्य नियम की पूजा में देवशास्त्र गुरू, विद्यमान विश्व शांति, तीर्थंकर और अनंता नंद सिद्ध प्रमेष्ठी भगवान की पूजा की। इसके अलावा सोलहकरण पंच मेरू और दशलक्षण पर्व की पूजा की। पूजा में प्रमोद जैन, वरदान जैन, इंद्राणी जैन, बालकिशन जैन, शशि जैन आदि का सहयोग रहा। शाम को विहर्ष सभागार में नेहरू बाल एकेडमी के बच्चों ने कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी। इस मौके पर आचार्य सुंदर सागर महाराज ने कहा जब तब मन में लोभ है, उत्तम सोच धर्म धारण नहीं कर पाओंगे। धर्म दिखावे के लिए नहीं, बल्कि आत्मा को शुद्ध करने के लिए किया जाता है। इस पर्व में जो उयवासों की साधना होती है, वह मन की निर्मलता के लिए होती है। समाज में दिखावे के लिए नहीं।
लोभ रूपी कषाय नर्क का पासपोर्ट है - अरुण मुनि
बड़ौत। जैन संत अरुण मुनि ने जैन स्थानक शहर में आयोजित धर्मसभा में कहा आशा, तृष्णा और स्वछंदता ( तीनों) दुखदाई है। पाप एक है। उसको करने के तरीके अनेक है। लोभ रूपी कषाय नर्क का पासपोर्ट होता है। पापी मनुष्य को पाप में उतना ही रस मिलता है, जितना कुत्ते को हड्डी चबाने में। जिस प्रकार बिजली भागने पर बिजली के सारे उपकरण बंद हो जाते हैं, उसी प्रकार लोभ रूपी कषाय का पल्ग भी बोर्ड से हट जाता है, तभी सब पापों का आना बंद हो जाता है। उन्होंने कहा प्रवृत्ति पर नियंत्रण करों, इससे वैराग्य उत्पन्न होगा। हमें यह देखना है हमारा पाप घट रहा है या बढ़ रहा है। धर्मसभा में अमन मुनि ने भी विचार रखे। धर्मसभा में रोहित, हिमांशु, पंकज, अमित, कालू जैन, वरदान जैन, हंस कुमार, दीपक जैन, शैल बाला जैन, इंद्राणी, सविता, रेखा, पूनम आदि रहे।
श्री जी की पूजा कर की आराधना
बागपत। शहर के दिगंबर जैन मंदिर में दशलक्षण पर्व में श्रद्धालुओं ने श्री जी की पूजा अर्चना की । अर्घ्य चढ़ाकर भगवान की आराधना की। शाम के समय भगवान की आरती हुई। सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। मयंक जैन, प्रहलाद जैन, कामिनी, दीप्ति, नमन, मनीष, अर्चना मौजूद रहे।