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मुस्लिम महिलाएं तैयार कर रही दुर्गा की चुनरी

Thu, 21 Sep 2017 01:55 AM IST
Updated Thu, 21 Sep 2017 01:55 AM IST
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मुस्लिम महिलाएं तैयार कर रही दुर्गा की चुनरी

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बागपत। शारदीय नवरात्र भक्ति और शक्ति का प्रतीक हैं, लेकिन जिले में नवरात्र का त्योहार भाईचारे का संदेश भी देता है। जिले में कई जगह मुस्लिम महिलाएं मां की चुनरियां तैयार कर रही है। यहां तैयार होने वाली चुनरी हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान और उत्तराखंड में सप्लाई की जाती है। सैकड़ों मुस्लिम परिवार हैं, जहां इन दिनों चुनरी बनाने का काम चल रहा है। रोजाना यहां से आपूर्ति होती है।
बृहस्पतिवार से मां दुर्गा के विभिन्न रूपों की आराधना शुरू होगी। मां दुर्गा को शक्ति की देवी माना जाता है। मां की आराधना यहां एकता का प्रतीक भी बन गई है। बड़ौत के पठानकोट, शोरगिरान, छपरौली रोड के अलावा बागपत, डौला, नौरोजपुर गुर्जर समेत ऐसे कई गांव हैं, जहां मुस्लिम परिवारों में मां की चुनरी तैयार की जा रही है।
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बड़ौत निवासी मीना बताती है नवरात्र आने से पहले यहां काम शुरू हो जाता है। दुर्गा की चुनरी बनाने में विशेष ख्याल स्वच्छता का रखा जाता है। चुनरी आस्था से जुड़ी है, इसलिए वह इस बात का खास ख्याल रखते हैं कि इसे बेहद सफाई से और स्वच्छ स्थान पर बनाई जाएं। शोरगिरान की खुर्शीदा कहती है कि सैकड़ों परिवार चुनरियां बना रहे हैं। नवरात्र से पहले ही ठेकेदार आने शुरू हो जाते हैं। वह कपड़ा देते हैं और बाद में सप्लाई लेकर चले जाते हैं। कई राज्यों में यहां से चुनरियों की सप्लाई की जाती है। भले ही यह पेट से जुड़ा मामला हो, लेकिन जिस तन्मयता और सलीके से चुनरियां तैयार की जा रही है, इसमें भाईचारे का संदेश भी छिपा है।
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12 चुनरी पर सिर्फ दो रुपये
बागपत। जिले भर में मुस्लिम के अलावा अन्य बिरादरी की महिलाएं भी चुनरी तैयारी करती हैं। इनको 12 चुनरी तैयार करने पर सिर्फ दो रुपये ही मिलते हैं, यह बेहद कम है। वह बार-बार रुपये बढ़वाने के लिए कह चुके हैं।


बच्चे भी करते हैं सहयोग
बागपत। नौरोजपुर गांव की शमिता कहती हैं कि परिवारों के बच्चे भी इस कार्य से जुड़े हैं। स्कूल से आने बाद परिवार के बच्चे भी चुनरी बनाने में सहयोग करते हैं। माता की चुन्नी बनाने में मेहनत ज्यादा है, लेकिन इसकी एवज में रुपये उन्हें कम मिलते हैं।
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