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उत्पादन, पेराई, रिकवरी का रिकॉर्ड, किसान फिर भी खाली हाथ
Updated Sun, 29 Apr 2018 12:14 AM IST
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बागपत। गन्ने के उत्पादन, चीनी मिलों की पेराई और चीनी रिकवरी का इस बार नया रिकॉर्ड बना है, लेकिन इसके बावजूद किसानों का करीब छह सौ करोड़ रुपये भुगतान लटका है। मलकपुर चीनी मिल का अधिकतम परता 12.50 प्रतिशत तक पहुंच गया। गन्ने से चीनी रिकवरी का यह नया रिकॉर्ड है। लेकिन जिले की चीनी मिलों पर किसानों के गन्ना भुगतान के 456 करोड़ रुपये बकाया है। जबकि 14 चीनी मिलों का बकाया भुगतान देखें तो यह आंकड़ा 600 करोड़ रुपये है। सीएम योगी आदित्यनाथ तक भुगतान का मुद्दा पहुंच चुका है, लेकिन किसान खाली हाथ है।
बागपत के किसान पश्चिमी उत्तर प्रदेश की 14 चीनी मिलों को गन्ना सप्लाई करते हैं। गन्ने की बंपर पैदावार का आलम यह है कि खेतों में गन्ना खड़ा हैं और चीनी मिलें तौल केंद्र उखाड़ने लगी हैं। जिला गन्ना अधिकारी सुशील कुमार बताते हैं कि अधिकतम रिकवरी ने इस बार रिकॉर्ड बनाया है। मलकपुर चीनी मिल की अब तक अधिकतम रिकवरी 12.50 प्रतिशत, बागपत चीनी मिल की 11.41 और रमाला चीनी मिल की अधिकतम रिकवरी 11.75 फीसदी तक पहुंच गई। यह पिछले करीब एक दशक में पहली बार हुआ है, जब एक दिन की अधिकतम रिकवरी नए कीर्तिमान पर पहुंची है। इससे चीनी मिलों को निश्चित तौर पर लाभ होगा। लेकिन बेहतर रिकवरी के बावजूद अभी तक कई चीनी मिलों ने किसानों का भुगतान लटका दिया है, जिससे किसान परेशान हैं।
दूसरी तरफ केंद्रीय मानव संसाधन राज्यमंत्री डा. सत्यपाल सिंह का कहना है कि किसानों का बकाया भुगतान दिलाने के लिए सीएम योगी आदित्यनाथ से बात की गई है। जल्द ही किसानों को कंपलीट भुगतान मिलेगा। किसानों ने बिजली का सरचार्ज माफ कर बड़ा तोहफा देने का काम किया है। वहीं रालोद उपाध्यक्ष जयंत चौधरी का कहना है कि किसानों को उनका हक मिलना चाहिए। बेहतर उत्पादन और चीनी मिलों के मुनाफे के बाद भी गन्ने का भुगतान नहीं किया गया, इससे किसान और मजदूर वर्ग को परेशानी होना लाजिमी है। किसान समस्याओं पर आंदोलन किया जाएगा।
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चीनी मिलों की अधिकतम रिकवरी
पेराई सत्र रमाला मलकपुर बागपत
2014-15 9.80 10.16 9.50
2015-16 10.05 10.85 10.10
2016-17 10.52 10.47 10.20
2017-18 11.75 12.50 11.41
क्षेत्रफल बराबर, लेकिन उत्पादन अधिक
बागपत। जिले में गन्ने का रकबा 71449 हेक्टेयर है। पिछले कई सालों से लगभग इसी क्षेत्रफल में किसान गन्ने का उत्पादन कर रहे हैं। लेकिन इस बार रिकॉर्ड उत्पादन से चीनी मिलें हांफती दिख रही है। किसान 317 तौल केंद्रों पर गन्ना सप्लाई करते हैं, जिनमें अधिकतर चल रहे हैं। नए वैरायटी के बीजों के चलते उत्पादन अधिक हुआ है।
चीनी मिलों पर 45685.77 लाख बकाया
चीनी मिल बकाया
मलकपुर 37717.00
रमाला 3879.82
बागपत 4088.95
नोट- बकाया 26 अप्रैल तक और लाख रुपये में
इन चीनी मिलों को देते हैं गन्ना
बागपत के किसान मलकपुर, बागपत, रमाला, किनौनी, भैसाना, ऊन, दौराला, सिंभावली, मोदीनगर, ब्रजनाथपुर, नंगलामल, खतौली, गांगनौली और तितावी मिल शामिल हैं।
गन्ना पेराई में पिछले सत्र को पीछे छोड़ा
बागपत। पिछले पेराई सत्र में बागपत के किसानों ने वेस्ट यूपी की 16 चीनी मिलों को गन्ना सप्लाई दिया था। तीन करोड़ 35 लाख कुंतल गन्ने की सप्लाई चीनी मिलों को की गई थी। लेकिन वर्तमान पेराई सत्र में अब तक ही करीब साढे़ तीन करोड़ कुंतल गन्ने की सप्लाई की जा चुकी है और खेतों में गन्ना खड़ा है। यही नहीं चीनी बोरों के उत्पादन भी पिछले सत्र का रिकॉर्ड तोड़ दिया है।
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बागपत के किसान पश्चिमी उत्तर प्रदेश की 14 चीनी मिलों को गन्ना सप्लाई करते हैं। गन्ने की बंपर पैदावार का आलम यह है कि खेतों में गन्ना खड़ा हैं और चीनी मिलें तौल केंद्र उखाड़ने लगी हैं। जिला गन्ना अधिकारी सुशील कुमार बताते हैं कि अधिकतम रिकवरी ने इस बार रिकॉर्ड बनाया है। मलकपुर चीनी मिल की अब तक अधिकतम रिकवरी 12.50 प्रतिशत, बागपत चीनी मिल की 11.41 और रमाला चीनी मिल की अधिकतम रिकवरी 11.75 फीसदी तक पहुंच गई। यह पिछले करीब एक दशक में पहली बार हुआ है, जब एक दिन की अधिकतम रिकवरी नए कीर्तिमान पर पहुंची है। इससे चीनी मिलों को निश्चित तौर पर लाभ होगा। लेकिन बेहतर रिकवरी के बावजूद अभी तक कई चीनी मिलों ने किसानों का भुगतान लटका दिया है, जिससे किसान परेशान हैं।
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दूसरी तरफ केंद्रीय मानव संसाधन राज्यमंत्री डा. सत्यपाल सिंह का कहना है कि किसानों का बकाया भुगतान दिलाने के लिए सीएम योगी आदित्यनाथ से बात की गई है। जल्द ही किसानों को कंपलीट भुगतान मिलेगा। किसानों ने बिजली का सरचार्ज माफ कर बड़ा तोहफा देने का काम किया है। वहीं रालोद उपाध्यक्ष जयंत चौधरी का कहना है कि किसानों को उनका हक मिलना चाहिए। बेहतर उत्पादन और चीनी मिलों के मुनाफे के बाद भी गन्ने का भुगतान नहीं किया गया, इससे किसान और मजदूर वर्ग को परेशानी होना लाजिमी है। किसान समस्याओं पर आंदोलन किया जाएगा।
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चीनी मिलों की अधिकतम रिकवरी
पेराई सत्र रमाला मलकपुर बागपत
2014-15 9.80 10.16 9.50
2015-16 10.05 10.85 10.10
2016-17 10.52 10.47 10.20
2017-18 11.75 12.50 11.41
क्षेत्रफल बराबर, लेकिन उत्पादन अधिक
बागपत। जिले में गन्ने का रकबा 71449 हेक्टेयर है। पिछले कई सालों से लगभग इसी क्षेत्रफल में किसान गन्ने का उत्पादन कर रहे हैं। लेकिन इस बार रिकॉर्ड उत्पादन से चीनी मिलें हांफती दिख रही है। किसान 317 तौल केंद्रों पर गन्ना सप्लाई करते हैं, जिनमें अधिकतर चल रहे हैं। नए वैरायटी के बीजों के चलते उत्पादन अधिक हुआ है।
चीनी मिलों पर 45685.77 लाख बकाया
चीनी मिल बकाया
मलकपुर 37717.00
रमाला 3879.82
बागपत 4088.95
नोट- बकाया 26 अप्रैल तक और लाख रुपये में
इन चीनी मिलों को देते हैं गन्ना
बागपत के किसान मलकपुर, बागपत, रमाला, किनौनी, भैसाना, ऊन, दौराला, सिंभावली, मोदीनगर, ब्रजनाथपुर, नंगलामल, खतौली, गांगनौली और तितावी मिल शामिल हैं।
गन्ना पेराई में पिछले सत्र को पीछे छोड़ा
बागपत। पिछले पेराई सत्र में बागपत के किसानों ने वेस्ट यूपी की 16 चीनी मिलों को गन्ना सप्लाई दिया था। तीन करोड़ 35 लाख कुंतल गन्ने की सप्लाई चीनी मिलों को की गई थी। लेकिन वर्तमान पेराई सत्र में अब तक ही करीब साढे़ तीन करोड़ कुंतल गन्ने की सप्लाई की जा चुकी है और खेतों में गन्ना खड़ा है। यही नहीं चीनी बोरों के उत्पादन भी पिछले सत्र का रिकॉर्ड तोड़ दिया है।