बदायूं: 'हमने दिए गवाहों को एक-एक लाख'
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बदायूं के कटरा सआदतगंज कांड में तफ्तीश कर रही सीबीआई के सवालों पर पीड़ित परिवार ने मीडिया के समक्ष सफाई दी। पीड़ित परिवार ने इस बात को स्वीकारा कि उन्होंने अपने दोनों गवाहों को एक-एक लाख रुपये दिए हैं। परिवार ने इसे जायज बताते हुए इसके पक्ष में तमाम दलीलें भी दीं।
बता दें कि दो बहनों के साथ दुराचार करने और हत्या की इस चर्चित घटना में दो मुख्य गवाह हैं। इनमें से एक लड़कियों के सगे चाचा हैं। दूसरे गवाह कुनबे के चाचा हैं। घटना के बाद तमाम राजनीतिक दलों की ओर से पीड़ित परिवार को लाखों रुपये की मदद दी गई।
दोनों बेटियों के पिता को कई लाख रुपये मिले, जो उन्होंने बैंक में एकाउंट खुलवाकर जमा करा दिए। सीबीआई को पता चला कि दोनों बेटियों के पिता के एकाउंट से एक-एक लाख रुपये निकाले गए हैं। जांच-पड़ताल में पता लगा कि ये रुपये इन दोनों ने अपने गवाहों को दे दिए हैं। यह चर्चा सार्वजनिक हुई तो इसमें पीड़ित पक्ष को ही कटघरे में खड़ा किया जाने लगा।
मीडिया के सामने बोला पीड़ित परिवार
शनिवार को इस सवाल पर पीड़ित परिवार ने मीडिया के कैमरों के सामने मुंह खोला। छोटी बेटी के पिता ने बताया कि एक गवाह उनका सगा भाई और दूसरा कुनबे का भाई है। दोनों ही मजदूरी-पेशा लोग हैं। महीने भर से ये लोग अपना काम-धंधा छोड़कर उनके साथ केस की पैरवी में लगे हैं। घटना वाले दिन से ही इनकी जान को खतरा भी बना हुआ है। इसलिए कहीं मजदूरी करने भी नहीं जा सकते। ऐसे में उनके परिवार के सामने रोजी-रोटी की समस्या थी।
इसके साथ ही पीड़ित परिवार ने मीडिया से ही सवाल किया कि अगर उन्होंने अपने भाइयों को रुपये दे भी दिए तो कौन सा पहाड़ टूट गया? कहा, रुपये लेकर कहां जाएंगे।
बड़ी बेटी के पिता ने फिर पुरानी बात दोहराई। बोले, उप्र सरकार का दिया मुआवजा उन्होंने लौटा दिया। वह इस सरकार से एक छदाम से लेकर एक करोड़ तक कुछ नहीं लेंगे।
गंगा पार जाकर लौट आई सीबीआई
कटरा सआदतगंज कांड की जांच कर रही केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) टीम शनिवार को फिर गांव की ओर निकली लेकिन टीम गांव में न रुककर गंगा के अटैना घाट की ओर चली गई।
पूर्वाह्न ग्यारह बजे के करीब एक गाड़ी में सवार टीम के कुछ सदस्य मंडी स्थित गेस्ट हाउस से गांव की ओर निकले थे लेकिन टीम के सभी सदस्य गांव में नहीं रुके और अटैना पुल की ओर बढ़ गए। बता दें कि गंगापार फर्रुखाबाद और कासगंज जिलों का क्षेत्र लगता है।
टीम काफी देर तक उसी इलाके में रहकर सुरागकशी करती रही। फिर दोपहर बाद टीम जिला मुख्यालय लौट आई। टीम दूसरे जिलों के इलाके में क्या तलाश करने गई? यह भविष्य में खुलासे के वक्त ही पता चलेगा।