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वाराणसी एयरपोर्ट के निजीकरण के विरोध में अधिकारी एवं कर्मचारी होंगे लामबंद
Mon, 02 Dec 2019 08:41 PM IST
अमर शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: अमर शर्मा
Updated Mon, 02 Dec 2019 08:41 PM IST
सार
- देश के छह एयरपोर्ट के निजीकरण के फैसले से हतोत्साहित दिखे अधिकारी एवं कर्मचारी
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बाबतपुर हवाईअड्डा
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विस्तार
देश के छह बड़े हवाईअड्डों का निजीकरण किए जाने के बाद अब वाराणसी सहित कई अन्य हवाईअड्डों के निजीकरण के सरकार के फैसले से वाराणसी हवाईअड्डे पर कार्यरत अधिकारी और कर्मचारी हतोत्साहित दिखे। हालांकि एयरपोर्ट तथा रेलवे के निजीकरण के सरकार के फैसले से एयरपोर्ट तथा रेलवे में कार्यरत अधिकारियों तथा कर्मचारियों में नाराजगी की स्थिति बनी हुई है। अधिकारी एवं कर्मचारी इस निजीकरण का पुरजोर विरोध करते रहे हैं।
एयरपोर्ट के निजीकरण का विरोध देशव्यापी रूप से अधिकारी और कर्मचारी कर रहे हैं। साथ ही साथ समय-समय पर धरना प्रदर्शन व भूख हड़ताल कर सरकार से उनके निजीकरण के फैसले को वापस लेने की मांग करते रहे है ।
इसके बावजूद इनकी व्यथा को सुने बगैर देश के छह बड़े हवाईअड्डों- लखनऊ, गुवाहाटी, जयपुर, अहमदाबाद, मंगलुरू और तिरुवंतपुरम एयरपोर्ट का इसी साल फरवरी में निजीकरण कर दिया गया। और अब वाराणसी, अमृतसर, त्रिची, रायपुर ,भुनेश्वर और इंदौर एयरपोर्ट के निजीकरण का फैसला लिया गया है।
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वाराणसी एयरपोर्ट के संयुक्त मोर्चा के संयोजक सुभाष तिवारी के नेतृत्व में केंद्रीय मुख्यालय के आदेश का पालन गंभीरता से करते हुए सभी सदस्य निजीकरण का पुरजोर विरोध करेंगे।
संयुक्त मोर्चा संघर्ष के लिए लामबंद
वाराणसी एयरपोर्ट के संयुक्त मोर्चा के संयोजक सुभाष तिवारी ने कहा कि केंद्रीय मुख्यालय से जो भी आदेश आएगा उसी आधार पर हमारे संयुक्त मोर्चा के सदस्य के सहयोग से उसका गंभीरता से पालन किया जाएगा और किसी भी लड़ाई को लड़ने के लिए सभी संयुक्त मोर्चा के सदस्य लामबंद हैं। और आर पार की लड़ाई को लड़ने के लिए तैयार है।
तिवारी ने बताया कि वाराणसी एयरपोर्ट लाभ में है फिर भी इस एयरपोर्ट का निजीकरण होना दुर्भाग्यपूर्ण फैसला है। यह सोचने वाली बात है कि लाभ के एयरपोर्ट को भी निजी हाथों में देने से क्या लाभ होगा। सरकार एक बार फिर गंभीरता से इस फैसले पर पुनर्विचार करे।
वाराणसी एयरपोर्ट के निजीकरण होने से होने वाली हानि
वाराणसी एयरपोर्ट के साथ अन्य एयरपोर्ट के निजीकरण होने से इसका दुष्प्रभाव ज्यादातर यात्रियों को ही उठाना पड़ेगा। साथ ही साथ एयरपोर्ट अथॉरिटी आफ इंडिया (एएआई) द्वारा वाराणसी एयरपोर्ट के निजीकरण की सिफारिश को देखते हुए कर्मचारियों में विरोध की स्थिति शुरू हो गई है।
निजीकरण के बाद अधिकारियों एवं कर्मचारियों की सुविधाओं में कमी होने की भी संभावना जताई जा रही है। साथ ही साथ वाराणसी एयरपोर्ट से आने-जाने वाले यात्रियों की जेब पर इसका प्रभाव पड़ेगा क्योंकि जिन हवाईअड्डों का निजीकरण हुआ है उसको देखते हुए यह होना लाजमी है। यात्रियों को वाराणसी एयरपोर्ट से यात्रा करने में फिलहाल की अपेक्षा निजीकरण के बाद अधिक जेब ढीली करनी पड़ेगी।
वाराणसी एयरपोर्ट के निजीकरण होने से एयरपोर्ट के अलग-अलग दफ्तरों में जैसे कमर्शियल ऑफिस, एपीडी ऑफिस, एटीसी ऑफिस, सिविल ऑफिस में संविदा पर कार्य कर रहे कर्मचारियों पर भी इसका दुष्प्रभाव पड़ेगा।
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एयरपोर्ट के निजीकरण का विरोध देशव्यापी रूप से अधिकारी और कर्मचारी कर रहे हैं। साथ ही साथ समय-समय पर धरना प्रदर्शन व भूख हड़ताल कर सरकार से उनके निजीकरण के फैसले को वापस लेने की मांग करते रहे है ।
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इसके बावजूद इनकी व्यथा को सुने बगैर देश के छह बड़े हवाईअड्डों- लखनऊ, गुवाहाटी, जयपुर, अहमदाबाद, मंगलुरू और तिरुवंतपुरम एयरपोर्ट का इसी साल फरवरी में निजीकरण कर दिया गया। और अब वाराणसी, अमृतसर, त्रिची, रायपुर ,भुनेश्वर और इंदौर एयरपोर्ट के निजीकरण का फैसला लिया गया है।
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वाराणसी एयरपोर्ट के संयुक्त मोर्चा के संयोजक सुभाष तिवारी के नेतृत्व में केंद्रीय मुख्यालय के आदेश का पालन गंभीरता से करते हुए सभी सदस्य निजीकरण का पुरजोर विरोध करेंगे।
संयुक्त मोर्चा संघर्ष के लिए लामबंद
वाराणसी एयरपोर्ट के संयुक्त मोर्चा के संयोजक सुभाष तिवारी ने कहा कि केंद्रीय मुख्यालय से जो भी आदेश आएगा उसी आधार पर हमारे संयुक्त मोर्चा के सदस्य के सहयोग से उसका गंभीरता से पालन किया जाएगा और किसी भी लड़ाई को लड़ने के लिए सभी संयुक्त मोर्चा के सदस्य लामबंद हैं। और आर पार की लड़ाई को लड़ने के लिए तैयार है।
तिवारी ने बताया कि वाराणसी एयरपोर्ट लाभ में है फिर भी इस एयरपोर्ट का निजीकरण होना दुर्भाग्यपूर्ण फैसला है। यह सोचने वाली बात है कि लाभ के एयरपोर्ट को भी निजी हाथों में देने से क्या लाभ होगा। सरकार एक बार फिर गंभीरता से इस फैसले पर पुनर्विचार करे।
वाराणसी एयरपोर्ट के निजीकरण होने से होने वाली हानि
वाराणसी एयरपोर्ट के साथ अन्य एयरपोर्ट के निजीकरण होने से इसका दुष्प्रभाव ज्यादातर यात्रियों को ही उठाना पड़ेगा। साथ ही साथ एयरपोर्ट अथॉरिटी आफ इंडिया (एएआई) द्वारा वाराणसी एयरपोर्ट के निजीकरण की सिफारिश को देखते हुए कर्मचारियों में विरोध की स्थिति शुरू हो गई है।
निजीकरण के बाद अधिकारियों एवं कर्मचारियों की सुविधाओं में कमी होने की भी संभावना जताई जा रही है। साथ ही साथ वाराणसी एयरपोर्ट से आने-जाने वाले यात्रियों की जेब पर इसका प्रभाव पड़ेगा क्योंकि जिन हवाईअड्डों का निजीकरण हुआ है उसको देखते हुए यह होना लाजमी है। यात्रियों को वाराणसी एयरपोर्ट से यात्रा करने में फिलहाल की अपेक्षा निजीकरण के बाद अधिक जेब ढीली करनी पड़ेगी।
वाराणसी एयरपोर्ट के निजीकरण होने से एयरपोर्ट के अलग-अलग दफ्तरों में जैसे कमर्शियल ऑफिस, एपीडी ऑफिस, एटीसी ऑफिस, सिविल ऑफिस में संविदा पर कार्य कर रहे कर्मचारियों पर भी इसका दुष्प्रभाव पड़ेगा।
लाभ में है वाराणसी एयरपोर्ट, हैरान करने वाला है निजीकरण का फैसला
जहां एक और वाराणसी एयरपोर्ट विकास व विस्तारीकरण के दौर से गुजर रहा है वहीं दूसरी ओर इसके निजीकरण का भी पुरजोर तरीके से प्रयास किया जा रहा है। वाराणसी एयरपोर्ट से साल दर साल यात्रा करने वाले यात्रियों की संख्या में इजाफा भी हुआ है। जिसको देखते हुए एयरपोर्ट पर एक और नया टर्मिनल बनाने की योजना प्रस्तावित है।
इसका निर्माण कार्य 2020 से शुरू होना है और इसकी अनुमानित लागत 948 करोड रुपये और 58,691 स्क्वायर मीटर में इसका निर्माण होना है। इस टर्मिनल को डोमेस्टिक और जो अभी फिलहाल में टर्मिनल बिल्डिंग है उसको इंटरनेशनल कर दिया जाएगा। हालांकि अभी इस पूरे प्रक्रिया में लगभग चार साल में क्रमवार तरीके से निर्माण कार्य किया जाएगा।
नई सुविधाओं से लैस एटीसी भवन का कार्य तीव्रता से प्रगति पर है। वाराणसी एयरपोर्ट से इस समय दिन और रात मिलाकर कुल 80 विमानों का आवागमन हो रहा है और साढ़े 10 हजार से 11 हजार यात्रियों का प्रतिदिन आवागमन हो रहा है। अभी एयरपोर्ट पर दो एयरोब्रिज है और दो एयरो ब्रिज का निर्माण कार्य जारी है। विकास और विस्तारीकरण के दौर से गुजरने के बाद भी एयरपोर्ट निजी हाथों में देना कर्मचारियों को रास नहीं आ रहा है।
अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का संचालन
बैंकाक, मलेशिया, काठमांडू, श्रीलंका, शारजाह के लिए संचालित होता है।
घरेलू उड़ानों का संचालन
दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, बंगलूरू, चेन्नई, देहरादून, जयपुर, अहमदाबाद, खजुराहो, आगरा इत्यादि शहरों के लिए कुल लगभग 80 विमानों का आवागमन हो रहा है।
जहां एक और वाराणसी एयरपोर्ट विकास व विस्तारीकरण के दौर से गुजर रहा है वहीं दूसरी ओर इसके निजीकरण का भी पुरजोर तरीके से प्रयास किया जा रहा है। वाराणसी एयरपोर्ट से साल दर साल यात्रा करने वाले यात्रियों की संख्या में इजाफा भी हुआ है। जिसको देखते हुए एयरपोर्ट पर एक और नया टर्मिनल बनाने की योजना प्रस्तावित है।
इसका निर्माण कार्य 2020 से शुरू होना है और इसकी अनुमानित लागत 948 करोड रुपये और 58,691 स्क्वायर मीटर में इसका निर्माण होना है। इस टर्मिनल को डोमेस्टिक और जो अभी फिलहाल में टर्मिनल बिल्डिंग है उसको इंटरनेशनल कर दिया जाएगा। हालांकि अभी इस पूरे प्रक्रिया में लगभग चार साल में क्रमवार तरीके से निर्माण कार्य किया जाएगा।
नई सुविधाओं से लैस एटीसी भवन का कार्य तीव्रता से प्रगति पर है। वाराणसी एयरपोर्ट से इस समय दिन और रात मिलाकर कुल 80 विमानों का आवागमन हो रहा है और साढ़े 10 हजार से 11 हजार यात्रियों का प्रतिदिन आवागमन हो रहा है। अभी एयरपोर्ट पर दो एयरोब्रिज है और दो एयरो ब्रिज का निर्माण कार्य जारी है। विकास और विस्तारीकरण के दौर से गुजरने के बाद भी एयरपोर्ट निजी हाथों में देना कर्मचारियों को रास नहीं आ रहा है।
अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का संचालन
बैंकाक, मलेशिया, काठमांडू, श्रीलंका, शारजाह के लिए संचालित होता है।
घरेलू उड़ानों का संचालन
दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, बंगलूरू, चेन्नई, देहरादून, जयपुर, अहमदाबाद, खजुराहो, आगरा इत्यादि शहरों के लिए कुल लगभग 80 विमानों का आवागमन हो रहा है।